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डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं, सतर्क रहें लोग : सिद्धांत जैन
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 01 Feb 2026 01:13 AM IST
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सिद्धांत जैन, पुलिस अधीक्षक फतेहाबाद
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फतेहाबाद। पुलिस विभाग ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम को लेकर एडवाइजरी जारी की है। पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने आमजन को साइबर अपराध के एक नए और खतरनाक रूप से आगाह करते हुए कहा है कि आधुनिक तकनीक के युग में अपराधी तत्व लगातार नए-नए हथकंडे अपनाकर मासूम नागरिकों को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं। वर्तमान समय में उभरता हुआ नया साइबर फ्रॉड डिजिटल अरेस्ट स्कैम लोगों को मानसिक रूप से डराकर उनसे बड़ी राशि ठगने का नया तरीका बन गया है।
इस ठगी के तहत अपराधी खुद को सीबीआई, एनआईए, साइबर सेल या स्थानीय पुलिस का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फ़ोन कॉल के माध्यम से पीड़ित से संपर्क करते हैं। उन्हें यह झूठी जानकारी दी जाती है कि उनके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता पाई गई है। अपराधी नकली पहचान पत्र, वारंट या सरकारी दस्तावेज़ भेजकर डर का माहौल बनाते हैं।
सबसे खतरनाक बात यह है कि वे पीड़ित को डिजिटल रूप से गिरफ्तार करने की बात कहते हैं, जिसका अर्थ है कि पीड़ित को मोबाइल कैमरे के सामने लगातार ऑनलाइन रहना पड़ता है और यह कहा जाता है कि वह अब जांच पूरी होने तक निगरानी में है। इस दौरान उनसे बैंक डिटेल, पासवर्ड,ओटीपी और यूपीआई जैसी संवेदनशील जानकारी ली जाती है, जिससे वे अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई खो बैठते हैं।
साइबर फ्रॉड को कैसे पहचाने
1 अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल या धमकी भरा फोन कॉल आना।
2 कॉलर द्वारा खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी या केंद्रीय एजेंसी का सदस्य बताना।
3 पैसे ट्रांसफर करने, एप डाउनलोड करने या गोपनीय जानकारी सांझा करने का दबाव बनाना।
भारत में किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी या पूछताछ केवल वैधानिक प्रक्रिया के तहत, प्रत्यक्ष रूप से की जाती है। न ही कोई सरकारी अधिकारी वीडियो कॉल पर आपको गिरफ्तार कर सकता है, और न ही किसी भी स्थिति में पैसे की मांग कर सकता है। ऐसे किसी भी संदेहजनक कॉल पर घबराएं नहीं, सतर्कता से काम लें और तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना दें।
-सिद्धांत जैन, पुलिस अधीक्षक
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इस ठगी के तहत अपराधी खुद को सीबीआई, एनआईए, साइबर सेल या स्थानीय पुलिस का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फ़ोन कॉल के माध्यम से पीड़ित से संपर्क करते हैं। उन्हें यह झूठी जानकारी दी जाती है कि उनके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता पाई गई है। अपराधी नकली पहचान पत्र, वारंट या सरकारी दस्तावेज़ भेजकर डर का माहौल बनाते हैं।
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सबसे खतरनाक बात यह है कि वे पीड़ित को डिजिटल रूप से गिरफ्तार करने की बात कहते हैं, जिसका अर्थ है कि पीड़ित को मोबाइल कैमरे के सामने लगातार ऑनलाइन रहना पड़ता है और यह कहा जाता है कि वह अब जांच पूरी होने तक निगरानी में है। इस दौरान उनसे बैंक डिटेल, पासवर्ड,ओटीपी और यूपीआई जैसी संवेदनशील जानकारी ली जाती है, जिससे वे अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई खो बैठते हैं।
साइबर फ्रॉड को कैसे पहचाने
1 अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल या धमकी भरा फोन कॉल आना।
2 कॉलर द्वारा खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी या केंद्रीय एजेंसी का सदस्य बताना।
3 पैसे ट्रांसफर करने, एप डाउनलोड करने या गोपनीय जानकारी सांझा करने का दबाव बनाना।
भारत में किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी या पूछताछ केवल वैधानिक प्रक्रिया के तहत, प्रत्यक्ष रूप से की जाती है। न ही कोई सरकारी अधिकारी वीडियो कॉल पर आपको गिरफ्तार कर सकता है, और न ही किसी भी स्थिति में पैसे की मांग कर सकता है। ऐसे किसी भी संदेहजनक कॉल पर घबराएं नहीं, सतर्कता से काम लें और तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना दें।
-सिद्धांत जैन, पुलिस अधीक्षक
