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Fatehabad News: बेटे का दर्द देखा तो बनाई रक्तदान संस्था

संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sun, 14 Jun 2026 12:52 AM IST
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Witnessed son's pain, so founded a blood donation organization
खुशी नई उम्मीद संस्था को सम्मानित करते हुए
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फतेहाबाद। रक्त की कमी से किसी की जान न जाएं उसे नया जीवन मिल सके। इसी सोच के साथ जिले की खुशी नई उम्मीद संस्था हर साल 10 से 12 रक्तदान शिविर लगवा रही है। संस्था के साथ अनेकों लोग जुड़े हुए हैं जो कि एक संदेश पर रक्तदान करने के लिए पहुंच जाते है। इस नेक कार्य के लिए संस्था को राज्यपाल भी सम्मानित कर चुके हैं।

संस्था के अध्यक्ष गोपाल बंसल का कहना है कि वह और उनके सदस्य इमरजेंसी में हमेशा तैयार रहते हैं। उनके बेटे को गंभीर बीमारी है इसके चलते उसे रक्त की बहुत जरूरत पड़ती थी। तभी मन में विचार आया कि ऐसे कई लोग होंगे जो गंभीर बीमारी में रक्त की कमी से जूझते होंगे। इसके बाद उन्होंने खुशी नई उम्मीद संस्था की शुरुआत की और रक्तदान शिविर लगाने शुरू किए। कई शिविरों में तो 200 से 250 यूनिट तक ब्लड एकत्रित हुआ है।
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राजकुमार मेहता खुद के और बेटी के जन्मदिन पर कर रहे रक्तदान
जगजीवनपुरा मोहल्ला निवासी और आधार कार्ड केंद्र संचालक राजकुमार मेहता अपने जन्मदिन को रक्तदान करके यादगार बनाते हैं। राजू मेहता अब तक 40 बार रक्तदान कर चुके है। खुद के जन्मदिन के अलावा बेटी के जन्मदिन पर भी रक्तदान करने के लिए ब्लड बैंक में पहुंच जाते हैं। राजू कहते है कि अगर इमरजेंसी में किसी को रक्त चाहिए होता है तो उसके लिए भी वह तैयार रहते हैं। रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है।
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डेरे की दिखाई राह पर चल रहे मनोज, 65 से ज्यादा बार कर चुके हैं रक्तदान
शहर के संन्यास आश्रम रोड निवासी और पार्षद प्रतिनिधि मनोज नारंग 65 से ज्यादा बार रक्तदान कर चुके हैं। मनोज इमरजेंसी में रक्तदान के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। मनोज बताते हैं कि वह डेरा सच्चा सौदा से जुड़े है और वहां पर रक्तदान को महादान बताया जाता है। डेरे से प्रेरणा लेकर वे लगातार रक्तदान कर रहे हैं। उनकी पत्नी पार्षद किरण नारंग भी रक्तदान के लिए हमेशा आगे रहती हैं।
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महिलाएं भी रक्तदान करने में पीछे नहीं
गांव मानावाली निवासी कविता ढाका ने बेटी के जन्मदिन पर रक्तदान की शुरुआत की है। कविता का कहना है कि वह दो बार रक्तदान कर चुकी है। अमूमन देखा है कि महिलाएं अक्सर रक्तदान करने से कतराती हैं लेकिन उसने बेटी के जन्मदिन पर रक्तदान करने की ठानी है। रक्तदान प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को करना चाहिए क्योंकि ये किसी की जान बचा सकता है।
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महिलाएं भी रक्तदान के लिए आएं आगे : आशा वर्मा

नागरिक अस्पताल की नर्सिंग ऑफिसर आशा वर्मा का कहना है कि वह विशेष अवसर पर रक्तदान जरूर करती हैं। रक्त जरूरतमंद की जिंदगी बचा सकता है। कई लोगों में ये भ्रम होता है कि रक्त से शरीर में कमजोरी आ जाएगी जबकि ऐसा नहीं होता है। बल्कि रक्तदान करने से शरीर स्वस्थ रहता है।
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सोनिया कसवां कर चुकी 10 बार रक्तदान
गांव मानावाली निवासी सोनिया कसवां अब तक 10 बार रक्तदान कर चुकी हैं। सोनिया का कहना है कि रक्तदान करने से अंदर से खुशी मिलती है। वह एक शिक्षिका है और उन्हें रक्त की अहमियत अच्छे से पता है इसलिए हर स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान जरूर करना चाहिए।
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रक्त की कमी से जूझ रहा ब्लड बैंक
नागरिक अस्पताल में ब्लड बैंक है लेकिन यहां पर फिलहाल काफी कमी चल रही है। ब्लड बैंक में इन दिनों डोनर कम पहुंच रहे है। वजह यह है कि गर्मी के कारण रक्तदान शिविरों में भी कमी आई है। ब्लड बैंक की 12 जून की रिपोर्ट के मुताबिक ए पॉजिटिव 6 यूनिट, ए निगेटिव शून्य, बी पॉजिटिव शून्य, बी निगेटिव शून्य, ओ पॉजिटिव 4 यूनिट, ओ निगेटिव 3, एबी पॉजिटिव 3, एबी निगेटिव एक यूनिट ब्लड स्टॉक में था।
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