हरियाणवी दम: कॉमनवेल्थ गेम्स में मुक्कों से कर दी सोने की बारिश, अंकुश की मां बोलीं-गोलू नै कती घी सा घाल दिया
भिवानी के गांव धनाना की बेटी साक्षी चौधरी की राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में जीत के साथ ही गांव में जश्न का माहौल हो गया। साक्षी ने 51 किलोग्राम भार वर्ग में इंग्लैंड की रूबी वाइट को 5-0 से हराया। पिता मनोज कुमार ने बताया कि जीत के साथ ही रिश्तेदारों और पड़ोसियों की ओर से बधाइयां आनी शुरू हो गईं।
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राष्ट्रमंडल खेलों में शनिवार को हरियाणा की बेटियों ने सोने की बारिश कर दी। जैस्मिन लंबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रीति पंवार, प्रिया घनघस और सचिन सिवाच, हिसार के अंकुश पंघाल ने एकतरफा मुकाबलों में अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। खिलाडि़यों की इस उपलब्धि से उनके गांव सहित जिलेभर में खुशी का माहौल छा गया। घरों में कहीं मिठाइयां बंटने लगीं तो कहीं लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाना शुरू कर दिया। कोच अनिल टेकराम ने बताया कि यह पहला मौका है जब भिवानी के खिलाड़ियों ने राष्ट्रमंडल खेलों में एक साथ पांच गोल्ड मेडल जीते हैं।
जैस्मिन की मां बोलीं - बेटी ने कर दिया नाम रोशन
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भिवानी की बेटी जैस्मिन लंबोरिया ने शनिवार को स्वर्ण पदक जीतकर गांव और देश का नाम रोशन कर दिया। बेटी की जीत से घर में खुशियों का माहौल हो गया। जैस्मिन के माता-पिता को बधाई देने वालों का तांता लग गया। उन्होंने सभी का मुंह मीठा करवाया। पिता जयवीर सिंह ने कहा कि जैस्मिन वर्ष 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों के बाद से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है। ग्लासगो में भी उसने शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया। मां जोगिंद्र कौर ने कहा कि बेटी ने स्वर्ण पदक जीतकर नाम रोशन कर दिया। उसके घर पहुंचने पर शानदार स्वागत किया जाएगा।
प्रीति ने 14 वर्ष की उम्र से खेलना शुरू किया, कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा
भिवानी के गांव बड़ेसरा की बेटी प्रीति पंवार ने फाइनल मुकाबला जीतकर देश की झोली में स्वर्ण पदक डाल दिया। जीत के बाद प्रीति के पिता सोमवीर और चाचा विनोद पंवार ने कहा कि उन्हें बेटी से यही उम्मीद थी। उसने अपनी खेल प्रतिभा से हम सभी को गौरवान्वित कर दिया है। इससे बड़ी खुशी की बात हमारे लिए क्या हो सकती है। प्रीति जब 14 वर्ष की थी, तब चाचा विनोद ने उसकी प्रतिभा को पहचाना और प्रशिक्षण देना शुरू किया। इसके बाद प्रीति ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मुक्केबाजी के कड़े प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रीति पढ़ाई में भी हमेशा अव्वल रही है।
साक्षी की जीत के बाद धनाना में छा गया खुशी का माहौल
भिवानी के गांव धनाना की बेटी साक्षी चौधरी की राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में जीत के साथ ही गांव में जश्न का माहौल हो गया। साक्षी ने 51 किलोग्राम भार वर्ग में इंग्लैंड की रूबी वाइट को 5-0 से हराया। पिता मनोज कुमार ने बताया कि जीत के साथ ही रिश्तेदारों और पड़ोसियों की ओर से बधाइयां आनी शुरू हो गईं। बड़ी खुशी होती है, जब बेटियां कुछ अच्छा करती हैं। मुझे आज भी याद है कि साक्षी ने ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज विजेंद्र सिंह से प्रेरणा लेकर मुक्केबाजी शुरू की थी। पूरी उम्मीद है कि बेटी का ओलंपिक पदक जीतने का सपना भी पूरा होगा।
प्रिया ने राष्ट्रमंडल खेलों में पहला स्वर्ण जीतकर बढ़ाया मान
भारतीय रेलवे की होनहार मुक्केबाज प्रिया घनघस ने राष्ट्रमंडल खेलों में देश की झोली में स्वर्ण पदक डाला। प्रिया ने दबाव के बावजूद संयम बनाए रखा और अंतिम क्षणों में सटीक पंच लगाकर निर्णायकों का विश्वास जीता। इसी के साथ प्रिया ने अपने करियर का पहला राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक हासिल कर लिया। कोच नवीन शर्मा ने बताया कि प्रिया ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। पिता महेंद्र ने कहा कि बेटी ने स्वर्ण पदक जीतकर पूरे गांव का नाम रोशन कर दिया है। गांव आने पर भव्य स्वागत किया जाएगा।
सचिन की बहन ने कहा- भाई ने राखी गिफ्ट दिया
भिवानी के एकमात्र पुरुष मुक्केबाज सचिन सिवाच ने पहला चरण गंवाने के बाद जबरदस्त वापसी की और अगले दोनों राउंड में आक्रामक खेल दिखाकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। जीत के बाद सचिन की छोटी बहन नेहा ने कहा कि भाई ने राखी गिफ्ट के रूप में स्वर्ण पदक दिया है। इससे बड़ी खुशी की बात क्या हो सकती है। भाई का घर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया जाएगा। सचिन की माता सुमन व पिता अनिल सिवाच ने कहा कि उसे बचपन से ही मुक्केबाजी का शौक था। आज उसने अपने प्रदर्शन से सबको खुश कर दिया है।
अंकुश ने पहली बार में ही जीता गोल्ड
हिसार के भेरिया निवासी अंकुश पंघाल के स्वर्ण पदक जीतने के बाद पिता सुरेश ने कहा कि बेटे ने आज देश का नाम ऊंचा कर दिया। मैं बता नहीं सकता कि कितना खुश हूं। बेटा वादा करके गया था कि पापा गोल्ड लेकर ही आऊंगा और इसे निभा दिया। अंकुश के सभी मैच हम घर पर टीवी पर देख रहे थे। पूरी उम्मीद थी कि वह गोल्ड जीतकर लौटेगा। गांव लौटने पर उसका भव्य स्वागत किया जाएगा। बेटे ने पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लिया और गोल्ड जीतकर गांव का नाम रोशन कर दिया।
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में सोरखी के लाल के शानदार प्रदर्शन पर गांव में मनाया गया जश्न
हांसी के नरेंद्र बेरवाल को सिल्वर मेडलहांसी के गांव सोरखी के बॉक्सर नरेंद्र बेरवाल ने फाइनल में कड़ा संघर्ष किया पर उन्हें चांदी से ही संतोष करना पड़ा। प्रतियोगिता की शुरुआत से ही बेहतर प्रदर्शन कर रहे नरेंद्र के सिल्वर मेडल जीतने पर परिवार और गांव में खुशी का माहौल छा गया। पिता जगदीश बेरवाल ने कहा कि बेटे के प्रदर्शन पर हमें गर्व है। उसने बेहतरीन प्रदर्शन किया। हम जरा भी निराश नहीं है। बेटे ने वर्ष 2012 में यूथ विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। इसके बाद कई प्रतियोगिताओं में पदक जीते। वर्तमान में वह सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत है।