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स्मार्ट पुस्तकालयों के लिए सहयोगात्मक बुद्धिमत्ता जरूरी : प्रो. इंद्र मणी
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एचएयू में आयोजित दो दिवसीय कॉन्क्लेव में मुख्य अतिथि प्रो. इन्द्र मणी पुस्तिका का विमोचन करते
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हिसार। स्मार्ट पुस्तकालयों के निर्माण में सहयोगात्मक बुद्धिमत्ता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान डिजिटल युग में पुस्तकालय केवल सूचना के भंडार नहीं रहे, बल्कि वे ज्ञान सृजन, नवाचार और सहयोग के केंद्र के रूप में विकसित हो चुके हैं। यह विचार वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ, परभणी (महाराष्ट्र) के कुलपति प्रो. इंद्र मणी ने व्यक्त किए।
प्रो. इंद्र मणी वीरवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के नेहरू पुस्तकालय द्वारा एसोसिएशन ऑफ सीनियर लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन प्रोफेशनल्स (एएसएलआईपी) के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय एएसएलआईपी कॉन्क्लेव-2025 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कॉन्क्लेव का विषय “कोलैब्रेटिव इंटेलिजेंस: बिल्डिंग स्मार्टर लाइब्रेरीज टुगेदर” रखा गया है।
उन्होंने कहा कि विद्या का स्वरूप बदल गया है। भारतीय दृष्टि से विद्या वही है जो विनम्रता सिखाए। यदि व्यक्ति में विनम्रता नहीं है तो वह विद्वान तो हो सकता है, लेकिन विद्यावान नहीं। मनुष्य की पहचान उसके कार्यों से होती है, नाम से नहीं। व्यक्ति के पास तीन प्रकार की सामर्थ्य होती है—विद्या, धन और ताकत। विद्या का उपयोग ज्ञान बांटने, धन का उपयोग दान के लिए और ताकत का उपयोग अच्छे कार्यों में होना चाहिए।
कॉन्क्लेव में एएसएलआईपी के अध्यक्ष डॉ. आरपी कुमार, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के पूर्व उपनिदेशक एवं मुख्य वक्ता डॉ. सुखदेव सिंह तथा एएसएलआईपी के सचिव डॉ. राज कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस कॉन्क्लेव में देशभर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों व संस्थानों से लगभग 200 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जिनमें पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के विशेषज्ञ, विद्यार्थी, शोधार्थी तथा आईटी व उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हैं।
एएसएलआईपी अध्यक्ष डॉ. आरपी कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में पुस्तकालय समाज की बौद्धिक रीढ़ हैं। वे केवल सूचना प्रदान नहीं करते, बल्कि ज्ञान निर्माण, आलोचनात्मक सोच और सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। समय के साथ पुस्तकालयों का स्वरूप बदला है, लेकिन उनका महत्व और उद्देश्य और अधिक बढ़ा है। इस अवसर पर पूर्व पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. बलवान सिंह, कुलसचिव, विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, वैज्ञानिक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
पुस्तकालय सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर दिया जोर
मुख्य वक्ता डॉ. सुखदेव सिंह ने प्रिंट मीडिया, डिजिटल मीडिया, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ह्यूमन इंटेलिजेंस के संदर्भ में पुस्तकालयों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. राज कुमार ने आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पुस्तकालय सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर अपने विचार रखे। उद्घाटन सत्र में कॉन्फ्रेंस प्रोसिडिंग, कॉन्फ्रेंस स्मारिका और एएसएलआईपी कैलेंडर का भी विमोचन किया गया। हकृवि के पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. राजीव के. पटेरिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। डॉ. सीमा परमार ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा, जबकि मंच संचालन डॉ. कनिका रानी ने किया।
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प्रो. इंद्र मणी वीरवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के नेहरू पुस्तकालय द्वारा एसोसिएशन ऑफ सीनियर लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन प्रोफेशनल्स (एएसएलआईपी) के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय एएसएलआईपी कॉन्क्लेव-2025 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कॉन्क्लेव का विषय “कोलैब्रेटिव इंटेलिजेंस: बिल्डिंग स्मार्टर लाइब्रेरीज टुगेदर” रखा गया है।
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उन्होंने कहा कि विद्या का स्वरूप बदल गया है। भारतीय दृष्टि से विद्या वही है जो विनम्रता सिखाए। यदि व्यक्ति में विनम्रता नहीं है तो वह विद्वान तो हो सकता है, लेकिन विद्यावान नहीं। मनुष्य की पहचान उसके कार्यों से होती है, नाम से नहीं। व्यक्ति के पास तीन प्रकार की सामर्थ्य होती है—विद्या, धन और ताकत। विद्या का उपयोग ज्ञान बांटने, धन का उपयोग दान के लिए और ताकत का उपयोग अच्छे कार्यों में होना चाहिए।
कॉन्क्लेव में एएसएलआईपी के अध्यक्ष डॉ. आरपी कुमार, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के पूर्व उपनिदेशक एवं मुख्य वक्ता डॉ. सुखदेव सिंह तथा एएसएलआईपी के सचिव डॉ. राज कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस कॉन्क्लेव में देशभर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों व संस्थानों से लगभग 200 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जिनमें पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के विशेषज्ञ, विद्यार्थी, शोधार्थी तथा आईटी व उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हैं।
एएसएलआईपी अध्यक्ष डॉ. आरपी कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में पुस्तकालय समाज की बौद्धिक रीढ़ हैं। वे केवल सूचना प्रदान नहीं करते, बल्कि ज्ञान निर्माण, आलोचनात्मक सोच और सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। समय के साथ पुस्तकालयों का स्वरूप बदला है, लेकिन उनका महत्व और उद्देश्य और अधिक बढ़ा है। इस अवसर पर पूर्व पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. बलवान सिंह, कुलसचिव, विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, वैज्ञानिक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
पुस्तकालय सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर दिया जोर
मुख्य वक्ता डॉ. सुखदेव सिंह ने प्रिंट मीडिया, डिजिटल मीडिया, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ह्यूमन इंटेलिजेंस के संदर्भ में पुस्तकालयों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. राज कुमार ने आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पुस्तकालय सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर अपने विचार रखे। उद्घाटन सत्र में कॉन्फ्रेंस प्रोसिडिंग, कॉन्फ्रेंस स्मारिका और एएसएलआईपी कैलेंडर का भी विमोचन किया गया। हकृवि के पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. राजीव के. पटेरिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। डॉ. सीमा परमार ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा, जबकि मंच संचालन डॉ. कनिका रानी ने किया।