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Hisar News: डीएसटी के विद्यार्थियों को हर माह मिलेंगे दो हजार प्रोत्साहन राशि, आईटीआई में तकनीकी शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की पहल
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Mon, 15 Jun 2026 01:03 AM IST
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हिसार। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में तकनीकी शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग (डीएसटी) कोर्स के तहत अब विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि उन्हें उद्योगों में जाकर आधुनिक मशीनों पर काम करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। डीएसटी के विद्यार्थियों को हर माह मिलेंगे दो हजार रुपये प्रोत्साहन राशि भी मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कुशल बनाना और उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार डीएसटी कोर्स को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसकी अवधि बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान में एक वर्ष की अवधि वाले इस कोर्स को बढ़ाकर करीब डेढ़ वर्ष किया जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को शुरुआती छह माह संस्थान में तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा जबकि इसके बाद 9 से 12 माह तक विभिन्न उद्योगों में प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव मिलेगा और वे आधुनिक तकनीकों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
नोडल अधिकारी राजबीर ने कहा कि उद्योगों में प्रशिक्षण से विद्यार्थियों की कार्यक्षमता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ेंगे। साथ ही उन्हें रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप कौशल विकसित करने में सहायता मिलेगी। यही कारण है कि सरकार आईटीआई और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दे रही है।
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विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। डीएसटी कोर्स में दाखिला लेने वाली छात्रों को हर माह दो हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। इस कदम से अधिक से अधिक विद्यार्थी तकनीकी शिक्षा की ओर आकर्षित होंगी और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।
इसके अलावा आईटीआई में छात्रों के लिए विशेष सहायता काउंटर भी स्थापित किए गए हैं। इन काउंटरों पर विभिन्न ट्रेडों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, रोजगार संभावनाओं और प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। छात्रों को प्रवेश संबंधी सहायता और मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है ताकि वे बिना किसी परेशानी के तकनीकी पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकें।
तकनीकी प्रशिक्षण और उद्योगों के साथ सीधा जुड़ाव युवाओं के भविष्य को नई दिशा देगा। डीएसटी मॉडल के माध्यम से प्रशिक्षित विद्यार्थी न केवल आधुनिक मशीनों के संचालन में दक्ष होंगे बल्कि कोर्स पूरा होने के बाद उनके लिए रोजगार प्राप्त करना भी अपेक्षाकृत आसान होगा। इससे प्रदेश में कुशल मानव संसाधन तैयार होगा और औद्योगिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।
तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार डीएसटी कोर्स को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसकी अवधि बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान में एक वर्ष की अवधि वाले इस कोर्स को बढ़ाकर करीब डेढ़ वर्ष किया जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को शुरुआती छह माह संस्थान में तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा जबकि इसके बाद 9 से 12 माह तक विभिन्न उद्योगों में प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव मिलेगा और वे आधुनिक तकनीकों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
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नोडल अधिकारी राजबीर ने कहा कि उद्योगों में प्रशिक्षण से विद्यार्थियों की कार्यक्षमता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ेंगे। साथ ही उन्हें रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप कौशल विकसित करने में सहायता मिलेगी। यही कारण है कि सरकार आईटीआई और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दे रही है।
विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। डीएसटी कोर्स में दाखिला लेने वाली छात्रों को हर माह दो हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। इस कदम से अधिक से अधिक विद्यार्थी तकनीकी शिक्षा की ओर आकर्षित होंगी और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।
इसके अलावा आईटीआई में छात्रों के लिए विशेष सहायता काउंटर भी स्थापित किए गए हैं। इन काउंटरों पर विभिन्न ट्रेडों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, रोजगार संभावनाओं और प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। छात्रों को प्रवेश संबंधी सहायता और मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है ताकि वे बिना किसी परेशानी के तकनीकी पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकें।
तकनीकी प्रशिक्षण और उद्योगों के साथ सीधा जुड़ाव युवाओं के भविष्य को नई दिशा देगा। डीएसटी मॉडल के माध्यम से प्रशिक्षित विद्यार्थी न केवल आधुनिक मशीनों के संचालन में दक्ष होंगे बल्कि कोर्स पूरा होने के बाद उनके लिए रोजगार प्राप्त करना भी अपेक्षाकृत आसान होगा। इससे प्रदेश में कुशल मानव संसाधन तैयार होगा और औद्योगिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।