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Hisar News: एचएयू के डॉ. राम अवतार को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
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कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज के साथ वैज्ञानिक।
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हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं तिलहन अनुभाग के भूतपूर्व अध्यक्ष डॉ. राम अवतार को सरसों फसल पर उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। वहीं सहायक वैज्ञानिक डॉ. विनोद गोयल को सरसों पर उत्कृष्ट शोध के लिए गोल्ड मेडल और तकनीकी सहायक डॉ. राजबीर को सरसों की फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन की उत्कृष्ट मौखिक प्रस्तुति के लिए द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
ये सम्मान उन्हें दिल्ली में वीरवार को आयोजित राष्ट्रीय तिलहन सम्मेलन के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से दिए गए। पुरस्कार भूतपूर्व महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने प्रदान किए। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि एचएयू के वैज्ञानिकों का शोध कार्य किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रहा है।
डॉ. राम अवतार पिछले 15-16 वर्षों से तिलहन अनुभाग में सरसों फसल पर शोध कार्य कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने पिछले 6 से 7 वर्षों में सरसों की छह नई किस्में विकसित की हैं। इनमें आरएच 725, आरएच 761, आरएच 1424, आरएच 1706 और आरएच 1975 प्रमुख हैं। इनमें आरएच 725 देश में परिवर्तन लाने वाली किस्म मानी जाती है और यह किस्म देश के 5-6 राज्यों में काफी प्रचलित है।
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि विश्वविद्यालय के सरसों वैज्ञानिकों द्वारा अब तक राई और सरसों की 25 किस्में विकसित की जा चुकी हैं। पिछले 12 वर्षों में इस टीम को सरसों में उत्कृष्ट कार्य के लिए चार बार उत्कृष्ट केंद्र अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा में सरसों की औसत पैदावार वर्ष 1972-73 में 464 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जो अब बढ़कर 2201 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। इस अवसर पर उपमहानिदेशक (फसल) डॉ. डी.के. यादव, उपमहानिदेशक (बागवानी) डॉ. संजय कुमार, सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ. संजीव कुमार गुप्ता तथा विभिन्न तिलहन संस्थानों के निदेशक और भूतपूर्व निदेशक डॉ. धीरज सिंह भी मौजूद रहे।
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ये सम्मान उन्हें दिल्ली में वीरवार को आयोजित राष्ट्रीय तिलहन सम्मेलन के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से दिए गए। पुरस्कार भूतपूर्व महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने प्रदान किए। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि एचएयू के वैज्ञानिकों का शोध कार्य किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रहा है।
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डॉ. राम अवतार पिछले 15-16 वर्षों से तिलहन अनुभाग में सरसों फसल पर शोध कार्य कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने पिछले 6 से 7 वर्षों में सरसों की छह नई किस्में विकसित की हैं। इनमें आरएच 725, आरएच 761, आरएच 1424, आरएच 1706 और आरएच 1975 प्रमुख हैं। इनमें आरएच 725 देश में परिवर्तन लाने वाली किस्म मानी जाती है और यह किस्म देश के 5-6 राज्यों में काफी प्रचलित है।
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि विश्वविद्यालय के सरसों वैज्ञानिकों द्वारा अब तक राई और सरसों की 25 किस्में विकसित की जा चुकी हैं। पिछले 12 वर्षों में इस टीम को सरसों में उत्कृष्ट कार्य के लिए चार बार उत्कृष्ट केंद्र अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा में सरसों की औसत पैदावार वर्ष 1972-73 में 464 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जो अब बढ़कर 2201 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। इस अवसर पर उपमहानिदेशक (फसल) डॉ. डी.के. यादव, उपमहानिदेशक (बागवानी) डॉ. संजय कुमार, सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ. संजीव कुमार गुप्ता तथा विभिन्न तिलहन संस्थानों के निदेशक और भूतपूर्व निदेशक डॉ. धीरज सिंह भी मौजूद रहे।