पश्चिमी विक्षोभ का असर: हरियाणा में बारिश और ओलावृष्टि से मौसम हुआ ठंडा; किसानों की बढ़ी चिंता
हरियाणा के विभिन्न जिलों में मंगलवार को बारिश और ओलावृष्टि हुई जिससे गेहूं और सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा है। फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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हरियाणा में मंगलवार दोपहर को अचानक मौसम खराब होने के बाद पश्चिमी जिलों समेत रोहतक, रेवाड़ी, झज्जर में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है। मौसम विभाग की ओर से आगामी एक सप्ताह तक मौसम में बदलाव व तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी की आशंका जताई जा रही है।
सरसों और गेहूं की फसल को पहुंचा नुकसान
बारिश और ओलावृष्टि से सरसों और गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं, रेवाड़ी में मंडी में रखी हुई सरसों की फसल भीगी है। फतेहाबाद और सिरसा में ओलावृष्टि से किसानों की हजारों एकड़ गेहूं और सरसों की फसल बर्बाद हो गई। भिवानी और महेंद्रगढ़ जिले में भी बारिश से फसलों को नुकसान हुआ है।
अभी पश्चिमी विक्षोभ का रहेगा असर
प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ का आंशिक असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि पश्चिमी मौसम प्रणाली कमजोर पड़ गई है। इसका आंशिक प्रभाव बरकरार है। इस वजह से मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पश्चिमी और उत्तरी राजस्थान व आसपास के क्षेत्र के ऊपर एक परिसंचरण तंत्र बना हुआ है जिसकी वजह से संपूर्ण इलाके में बादलों की आवाजाही देखने को मिली।
अप्रैल के पहले सप्ताह में भी खराब रहेगा मौसम
मौसम विभाग ने एक और दो अप्रैल को एक दो स्थानों पर छिटपुट बूंदाबांदी तथा ज्यादातर स्थानों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की संभावना जताई है। वहीं, 3 अप्रैल को एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। तीन से 5 अप्रैल तक प्रदेश के कई भागों में आंधी बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। 7 अप्रैल को एक और विक्षोभ सक्रिय होने से फिर से मौसम में बदलाव की संभावना बन रही है।