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Hisar News: सांसों पर धुआं... भूजल स्तर बढ़ने से वाटर टैंक का पानी दूषित, हवा में घुली राख

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jun 2026 01:01 AM IST
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Smoke on the breath... Water in the tank contaminated due to rising groundwater levels, ashes floating in the air
खेदड़ थर्मल पावर प्लांट। 
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हिसार। गांव खेदड़ में पेयजल किल्लत गहराती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्य पेयजल लाइनों में जगह-जगह लीकेज होने के कारण घरों में गंदा और दूषित पानी सप्लाई हो रहा है। गांव की ढाणियों में अब तक पेयजल लाइन ही नहीं बिछाई गई है जिसके चलते वहां रहने वाले लोग मोल का पानी खरीदने को मजबूर हैं।

गांव में दो जलघर हैं। पहला वर्ष 1999 में बना था और दूसरा 2013 में। वर्तमान में गांव का भूजल स्तर ऊपर आ गया है जिसका खारा और दूषित पानी पुराने जलघर के टैंकों में रिसकर मिल जाता है। इस वजह से टैंकों का पानी पीने लायक नहीं रहा।
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पंचायत के अनुसार महाग्राम योजना के तहत गांव के लिए 33 करोड़ रुपये का बजट मंजूर हो चुका है। इसके तहत जल्द ही गांव में नया पेयजल और सीवर सिस्टम विकसित किया जाएगा।
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उड़ती राख और धुआं से हैं परेशान
ग्रामीणों के अनुसार थर्मल प्लांट से निकलने वाली राख व धुएं से वह काफी परेशान है। यह राख उड़कर उनके घरों में आती है। अगर कपड़े बाहर सुखाते हैं तो उन पर राख आ जाती है। इसके अलावा प्लांट के टैंक में रिसाव के कारण करीब 150 एकड़ जमीन पर पानी भरा रहता है। पानी भरने से इस जमीन पर बिजाई भी नहीं हो पाती। गांव में टीबी व कैंसर के भी काफी मरीज है। इसका कारण भी यह थर्मल प्लांट ही है।
सफाई व्यवस्था ठप : आबादी के लिहाज से कर्मचारी कम
गांव की सफाई व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। आबादी के लिहाज से खेदड़ में कम से कम 15 सफाई कर्मचारियों की जरूरत है लेकिन वर्तमान में केवल 6 कर्मचारी ही तैनात हैं। स्टाफ की इस भारी कमी के कारण गलियों में गंदगी का अंबार लगा रहता है। इसके अलावा ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी रोष है कि गांव के एक भी जोहड़ (तालाब) को सरकार की अमृत सरोवर योजना में शामिल नहीं किया गया जिससे तालाबों के सुंदरीकरण का कार्य अटका हुआ है।
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गांव में गंदे पेयजल आपूर्ति की काफी समस्या है। ढाणियों में लोगों को नहरी पेयजल ही उपलब्ध नहीं होता। ऐसे में ग्रामीणों को खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है। - कपिल, युवा
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थर्मल प्लांट के फायदे के साथ-साथ नुकसान भी है। प्लांट से निकलने वाली राख व धुआं ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना है। इस कारण से ग्रामीण विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो गए हैं। - साहू, युवा
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गांव में सफाई कर्मचारियों की कमी है। इससे गांव की सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। पंचायत व सरकार को चाहिए वे गांव की आबादी के लिहाज से और सफाई कर्मचारियों को नियुक्त करे। - कपिल, खिलाड़ी
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गांव के जोहड़ गंदगी से अटे हुए हैं। इन जोहड़ों का सुंदरीकरण करवाया जाए। इनमें से गंदे पानी निकलवाकर साफ पानी भरवाया जाए ताकि ये जोहड़ गांव की शान बन सकें। - सिंदर, गृहिणी
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गांव को महाग्राम योजना में शामिल किया गया है। इसके तहत टेंडर लगाकर पेजयल बिछाने वाले का कार्य जल्द से जल्द शुरू करवाया जाए ताकि पेयजल समस्या का समाधान हो सके। - सोनू शर्मा, युवा
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गांव में आबादी के लिहाज से सफाई कर्मचारियों की कमी है। 4 कर्मचारी सरकार और दो कर्मचारी पंचायत के हैं। हालांकि आबादी को देखते 15 कर्मचारियों की जरूरत है। - शमशेर सिंह, सरपंच प्रतिनिधि, खेदड़।
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पहले कॉलम का एंट्रो
- जिले के गांव खेदड़ में पेयजल, सफाई और पर्यावरण संबंधी समस्याएं ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। मुख्य पेयजल पाइपलाइनों में लीकेज और जलघरों में भूजल के रिसाव से दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है जबकि ढाणियों के लोगों को आज भी खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है। दूसरी ओर थर्मल प्लांट से निकलने वाली राख, धुआं और रिसाव का पानी ग्रामीणों की सेहत व कृषि भूमि पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। गांव में सफाई कर्मचारियों की कमी से स्वच्छता व्यवस्था भी प्रभावित है। हालांकि महाग्राम योजना के तहत 33 करोड़ रुपये मंजूर होने से ग्रामीणों को पेयजल और सीवर व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी है लेकिन लोग अब इन योजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं।
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