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Hisar News: संस्थानों की चमक के बीच उपेक्षा की कसक
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बालसमंद राजकीय कॉलेज
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बालसमंद। उच्च शैक्षणिक संस्थानों की मौजूदगी के कारण बालसमंद की पूरे जिले में पहचान है। इस गौरवमयी पहचान के पीछे कड़वी हकीकत यह भी है कि यहां की शिक्षा व्यवस्था बदहाली का दंश झेल रही है। शिक्षकों का टोटा, आधारभूत सुविधाओं का अभाव और कॉलेज भवन निर्माण की सुस्त रफ्तार विकास के दावों को झुठला रही है। संस्थानों की चमक के बीच उपेक्षा की कसक झेल रहे विद्यार्थियों का भविष्य सुधार के उजाले की बाट जोह रहा है।
कहने को तो गांव में चार राजकीय प्राथमिक विद्यालय, एक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, एक पीएम श्री सीनियर सेकेंडरी स्कूल, एक राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), चौधरी भजनलाल राजकीय महाविद्यालय, मान्यता प्राप्त कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र, कई निजी शिक्षण संस्थान व विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए पुस्तकालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूलों में सफाईकर्मी, चौकीदार व अन्य सहायक कर्मचारियों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल और वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से कई बार कॉलेज भवन निर्माण की मांग की जा चुकी है लेकिन अब तक धरातल पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
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डेपुटेशन से बढ़ रही शिक्षकों की कमी :
गांव के सरकारी स्कूलों से लगातार शिक्षकों का डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) अन्य स्थानों पर किया जा रहा है। कई विषयों के शिक्षक उपलब्ध न हाेने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। पीएम श्री स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने के इच्छुक कई विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। नई इमारत में अब तक फर्श का कार्य पूरा नहीं होने से भवन का पूरा लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा।
आठ साल बाद भी कॉलेज का अपना भवन नहीं :
बालसमंद में 5 जुलाई 2018 को चौधरी भजनलाल राजकीय महाविद्यालय की शुरुआत हुई थी। शुरुआत से ही कॉलेज की कक्षाएं गांव के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में संचालित हो रही हैं। आठ वर्ष बीतने के बावजूद कॉलेज का भवन नहीं बन सका।। कॉलेज से बीकॉम कोर्स बंद हो चुका है। भवन और अन्य सुविधाओं की कमी से हर वर्ष विद्यार्थियों की संख्या घट रही है।
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यह बोले ग्रामीण
पीएम श्री स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ना चाहने वाले कई विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल रहा। सरकार को पारदर्शी प्रवेश व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि हर योग्य विद्यार्थी को अवसर मिल सके।
- पवन जांगड़ा
गांव के सरकारी स्कूलों से लगातार शिक्षकों को डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर भेजा जा रहा है। इससे कई विषयों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है। सरकार को पहले रिक्त पद भरकर स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध करवाने चाहिए।
-राकेश
गर्मी के दिनों में कई सरकारी स्कूलों में बिजली और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं रहती। बच्चों को पढ़ाई के साथ मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ता है। इन समस्याओं का जल्द समाधान होना चाहिए।
-- विकास बेनीवाल
स्कूलों में सफाईकर्मी, चौकीदार और अन्य कर्मचारियों के पद लंबे समय से खाली हैं। इससे स्कूलों की साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है। रिक्त पदों के लिए जल्द नियुक्ति की जाए।
- विक्रम कासनियां
सरकार ने कॉलेज भवन के लिए करोड़ों रुपये की घोषणा और शिलान्यास तो कर दिया लेकिन सात माह बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ। विद्यार्थियों को जल्द अपना स्थायी कॉलेज परिसर मिलना चाहिए।
-- संदीप शर्मा
कॉलेज का अपना भवन नहीं होने से प्राथमिक पाठशाला में पढ़ाई करनी पड़ रही है। खेल मैदान, प्रयोगशाला और अन्य सुविधाओं के अभाव का असर पढ़ाई पर पड़ रहा है। सरकार को जल्द भवन बनवाना चाहिए।
-- संदीप सक्करवाल
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कहने को तो गांव में चार राजकीय प्राथमिक विद्यालय, एक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, एक पीएम श्री सीनियर सेकेंडरी स्कूल, एक राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), चौधरी भजनलाल राजकीय महाविद्यालय, मान्यता प्राप्त कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र, कई निजी शिक्षण संस्थान व विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए पुस्तकालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि स्कूलों में सफाईकर्मी, चौकीदार व अन्य सहायक कर्मचारियों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल और वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से कई बार कॉलेज भवन निर्माण की मांग की जा चुकी है लेकिन अब तक धरातल पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
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डेपुटेशन से बढ़ रही शिक्षकों की कमी :
गांव के सरकारी स्कूलों से लगातार शिक्षकों का डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) अन्य स्थानों पर किया जा रहा है। कई विषयों के शिक्षक उपलब्ध न हाेने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। पीएम श्री स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने के इच्छुक कई विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। नई इमारत में अब तक फर्श का कार्य पूरा नहीं होने से भवन का पूरा लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा।
आठ साल बाद भी कॉलेज का अपना भवन नहीं :
बालसमंद में 5 जुलाई 2018 को चौधरी भजनलाल राजकीय महाविद्यालय की शुरुआत हुई थी। शुरुआत से ही कॉलेज की कक्षाएं गांव के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में संचालित हो रही हैं। आठ वर्ष बीतने के बावजूद कॉलेज का भवन नहीं बन सका।। कॉलेज से बीकॉम कोर्स बंद हो चुका है। भवन और अन्य सुविधाओं की कमी से हर वर्ष विद्यार्थियों की संख्या घट रही है।
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यह बोले ग्रामीण
पीएम श्री स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ना चाहने वाले कई विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल रहा। सरकार को पारदर्शी प्रवेश व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि हर योग्य विद्यार्थी को अवसर मिल सके।
- पवन जांगड़ा
गांव के सरकारी स्कूलों से लगातार शिक्षकों को डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर भेजा जा रहा है। इससे कई विषयों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है। सरकार को पहले रिक्त पद भरकर स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध करवाने चाहिए।
-राकेश
गर्मी के दिनों में कई सरकारी स्कूलों में बिजली और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं रहती। बच्चों को पढ़ाई के साथ मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ता है। इन समस्याओं का जल्द समाधान होना चाहिए।
स्कूलों में सफाईकर्मी, चौकीदार और अन्य कर्मचारियों के पद लंबे समय से खाली हैं। इससे स्कूलों की साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है। रिक्त पदों के लिए जल्द नियुक्ति की जाए।
- विक्रम कासनियां
सरकार ने कॉलेज भवन के लिए करोड़ों रुपये की घोषणा और शिलान्यास तो कर दिया लेकिन सात माह बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ। विद्यार्थियों को जल्द अपना स्थायी कॉलेज परिसर मिलना चाहिए।
कॉलेज का अपना भवन नहीं होने से प्राथमिक पाठशाला में पढ़ाई करनी पड़ रही है। खेल मैदान, प्रयोगशाला और अन्य सुविधाओं के अभाव का असर पढ़ाई पर पड़ रहा है। सरकार को जल्द भवन बनवाना चाहिए।