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Hisar News: बीमारी का साया...चिड़ौद ही नहीं 40 गांवों के लोग पी रहे जहरीला पानी
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हिसार। नलवा विधानसभा क्षेत्र के गांव चिड़ौद के ही नहीं आसपास के करीब 40 गांवों के लोग खराब गुणवत्ता का पानी पी रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण उन्हें जहरीला पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
चिड़ौद गांव के निवासी तो पानी के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव की बात करते हुए यहां तक दावा कर रहे हैं कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। हालांकि, पानी की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भूजल और जलघर से सप्लाई होने वाला पानी कितना दूषित और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सामाजिक कार्यकर्ता अनिल मान ने बताया कि न केवल चिड़ौद, बल्कि नलवा विधानसभा क्षेत्र के लगभग 40 गांवों में पानी की गुणवत्ता बेहद खराब है। शनिवार को स्याहड़वा गांव स्थित जलघर की टंकी में मृत मछलियां मिलीं, जिससे पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों ने बताया कि लंबे समय से पानी में बदबू आ रही है और घरों तक गंदा पानी पहुंच रहा है।
अनिल मान ने प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पानी की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए। पानी टंकियों की सफाई कराई जाए और पूरे जल घर की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की पहली जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
हर घर में कोई न कोई बीमार
नलवा विधानसभा क्षेत्र का गांव चिड़ौद जहरीले पानी की समस्या से जूझ रहा है। भूजल इतना दूषित है कि लगभग हर घर में कोई न कोई बीमार है। ग्रामीणों का दावा है कि लोग पानी से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने अफसरों से लेकर नेताओं तक से गुहार लगाई लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। अमर उजाला की टीम शनिवार को गांव में पहुंची था और लोगों की समस्याओं को जाना। लोगों ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि उन्हें साफ पानी चाहिए।
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एसडीओ और जेई के साथ पिछले हफ्ते चिड़ौद गांव का दौरा किया था। इस दौरान वहां से पानी के सैंपल लिए जिन्हें जांच के लिए लैब में भेजा गया है। एक-दो दिन में रिपोर्ट आएगी। इसके बाद ही वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा।
- सोहन लाल एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग
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चिड़ौद गांव के निवासी तो पानी के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव की बात करते हुए यहां तक दावा कर रहे हैं कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। हालांकि, पानी की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भूजल और जलघर से सप्लाई होने वाला पानी कितना दूषित और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सामाजिक कार्यकर्ता अनिल मान ने बताया कि न केवल चिड़ौद, बल्कि नलवा विधानसभा क्षेत्र के लगभग 40 गांवों में पानी की गुणवत्ता बेहद खराब है। शनिवार को स्याहड़वा गांव स्थित जलघर की टंकी में मृत मछलियां मिलीं, जिससे पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों ने बताया कि लंबे समय से पानी में बदबू आ रही है और घरों तक गंदा पानी पहुंच रहा है।
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अनिल मान ने प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पानी की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए। पानी टंकियों की सफाई कराई जाए और पूरे जल घर की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की पहली जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
हर घर में कोई न कोई बीमार
नलवा विधानसभा क्षेत्र का गांव चिड़ौद जहरीले पानी की समस्या से जूझ रहा है। भूजल इतना दूषित है कि लगभग हर घर में कोई न कोई बीमार है। ग्रामीणों का दावा है कि लोग पानी से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने अफसरों से लेकर नेताओं तक से गुहार लगाई लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। अमर उजाला की टीम शनिवार को गांव में पहुंची था और लोगों की समस्याओं को जाना। लोगों ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि उन्हें साफ पानी चाहिए।
एसडीओ और जेई के साथ पिछले हफ्ते चिड़ौद गांव का दौरा किया था। इस दौरान वहां से पानी के सैंपल लिए जिन्हें जांच के लिए लैब में भेजा गया है। एक-दो दिन में रिपोर्ट आएगी। इसके बाद ही वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा।
- सोहन लाल एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग