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Jhajjar-Bahadurgarh News: यूजीसी एक्ट 2026 के विरोध में भाजपा नेत्री ने दिया इस्तीफा
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फोटो-63: मनीषा शर्मा। फोटो स्वयं
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बहादुरगढ़। यूजीसी एक्ट 2026 को संविधान के अनुच्छेद 14 के विरुद्ध बताते हुए भारतीय जनता पार्टी की नेत्री व गांव खरहर की पंचायत सदस्य मनीषा शर्मा ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह इस्तीफा भाजपा जिला अध्यक्ष को पत्र भेजकर दिया है।
पत्र में मनीषा शर्मा ने कहा है कि यूजीसी एक्ट 2026 शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर की भावना को कमजोर करता है और इससे सामाजिक व शैक्षणिक असमानता बढ़ने की आशंका है। संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार की गारंटी देता है, लेकिन यह कानून उस मूल भावना के खिलाफ है।
मनीषा शर्मा लंबे समय से भाजपा से जुड़ी रही हैं। वे बूथ अध्यक्ष, छारा मंडल की मंडल सचिव हैं। साथ ही छारा मंडल महिला मोर्चा की अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुकी हैं।
मनीषा शर्मा ने कहा कि उनका यह निर्णय किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं बल्कि संविधान और शिक्षा के व्यापक हित में लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए जो सभी वर्गों के छात्रों को समान अवसर प्रदान करे।
ये है यूजीसी एक्ट 2026
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026 लागू कर दिए हैं। यह रेगुलेशन 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रभावी हो गया है।
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पत्र में मनीषा शर्मा ने कहा है कि यूजीसी एक्ट 2026 शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर की भावना को कमजोर करता है और इससे सामाजिक व शैक्षणिक असमानता बढ़ने की आशंका है। संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार की गारंटी देता है, लेकिन यह कानून उस मूल भावना के खिलाफ है।
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मनीषा शर्मा लंबे समय से भाजपा से जुड़ी रही हैं। वे बूथ अध्यक्ष, छारा मंडल की मंडल सचिव हैं। साथ ही छारा मंडल महिला मोर्चा की अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुकी हैं।
मनीषा शर्मा ने कहा कि उनका यह निर्णय किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं बल्कि संविधान और शिक्षा के व्यापक हित में लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए जो सभी वर्गों के छात्रों को समान अवसर प्रदान करे।
ये है यूजीसी एक्ट 2026
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026 लागू कर दिए हैं। यह रेगुलेशन 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रभावी हो गया है।
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