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Jhajjar-Bahadurgarh News: ईंट भट्ठा उद्योग पर महंगाई की मार, दोगुना हुआ कोयले का भाव
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फोटो नंबर-52 : ईंट भट्ठा पर कोयले की पिसाई करते श्रमिक। संवाद
- फोटो : Archive
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बादली। ईंट भट्ठा उद्योग महंगाई की मार झेल रहा है। आठ माह से बंद भट्ठों पर पहली मार्च से ईटों की पकाई शुरू हुई तो संभावना जताई जा रही थी कि ईंटों के भाव में गिरावट होगी लेकिन कोयल का भाव अचानक बढ़ने से ईंटों के भाव में गिरावट नहीं हुई है। कोयले की कीमत 16 हजार से बढ़कर 23 हजार रुपये प्रति टन तक हो गई जिसका सीधा असर ईंट की उत्पादन लागत पर पड़ा है। मई माह में जहां ईटों के दामों में गिरावट होनी थी वहीं ईंटों के दाम में काफी उछाल आया है।
अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध से कोयले की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया। कोयले के दाम में एक साथ छह रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी हो गई।कोयले के भाव बढ़ने का असर कुल लागत और उत्पादन पर है। ऐसे में फिलहाल ईंटों के दामों में गिरावट की संभावना नहीं है। फरवरी माह में जहां ईंट 6200 रुपए प्रति हजार थी, वहीं नई ईंट निकलने के बाद भी भाव 7500 रुपए प्रति हजार पहुंच गया है।
जीएसटी पर दी जाए छूट
कोयले के दाम पढ़ने पर चिंता प्रकट करते हुए जिला भट्ठा एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मांग की है कि सरकार द्वारा ईंट भट्टों को लेकर बनाए गए सख्त नियम भी इस उद्योग के लिए रुकावट साबित हो रहे हैं। क्षेत्र में लगभग 205 से 225 भट्टे चल रहे हैं। सालाना करीब 80 लाख ईंटों का उत्पादन प्रति ईंट भट्ठा होता है। भट्ठा संचालक अजय, दीपक और प्रवीन का कहना है कि सरकार को भट्टा उद्योग के लिए जीएसटी व कोयले के दामों में अतिरिक्त छूट देनी चाहिए।
अमेरिका और इंडोनेशिया के कोयले के बढ़े दाम
भारत का कोयला अधिक राख वाला और कम गुणवत्ता का होता है। अमेरिका और इंडोनेशिया से आने वाला कोयला ज्यादा कैलोरीफिक वेल्यू वाला होता है। बाहरी राज्यों से मंगवाया जाने वाला कोयला अन्य जगहों के मुकाबले सस्ता पड़ता है। कोयले की कीमत पिछले एक सप्ताह में चार हजार रुपए प्रति टन बढ़ी है।
रामानंद, कोयला व्यापारी।
फोटो नंबर-52 : ईंट भट्ठा पर कोयले की पिसाई करते श्रमिक। संवाद
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कोयले के दाम पढ़ने पर चिंता प्रकट करते हुए जिला भट्ठा एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मांग की है कि सरकार द्वारा ईंट भट्टों को लेकर बनाए गए सख्त नियम भी इस उद्योग के लिए रुकावट साबित हो रहे हैं। क्षेत्र में लगभग 205 से 225 भट्टे चल रहे हैं। सालाना करीब 80 लाख ईंटों का उत्पादन प्रति ईंट भट्ठा होता है। भट्ठा संचालक अजय, दीपक और प्रवीन का कहना है कि सरकार को भट्टा उद्योग के लिए जीएसटी व कोयले के दामों में अतिरिक्त छूट देनी चाहिए।
अमेरिका और इंडोनेशिया के कोयले के बढ़े दाम
भारत का कोयला अधिक राख वाला और कम गुणवत्ता का होता है। अमेरिका और इंडोनेशिया से आने वाला कोयला ज्यादा कैलोरीफिक वेल्यू वाला होता है। बाहरी राज्यों से मंगवाया जाने वाला कोयला अन्य जगहों के मुकाबले सस्ता पड़ता है। कोयले की कीमत पिछले एक सप्ताह में चार हजार रुपए प्रति टन बढ़ी है।
रामानंद, कोयला व्यापारी।
फोटो नंबर-52 : ईंट भट्ठा पर कोयले की पिसाई करते श्रमिक। संवाद