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उद्योगों पर संकट: पैकेजिंग उद्योग की 400 इकाईयां बंद होने की कगार पर, 20 प्रतिशत श्रमिकों ने छोड़ा शहर
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फोटो-61: बहादुरगढ़ में सिर पर सामान लादकर अपने गंतव्य की ओर जाता श्रमिक परिवार। संवाद
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इकाईयों ने आधा किया उत्पादन, पिछले 15 दिनों से उत्पादन लगातार हो रहा प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। उद्योग इन दिनों दोहरे संकट से जूझ रहा है। एक ओर एलपीजी गैस की सप्लाई नहीं हो रही है वहीं दूसरी तरफ पीएनजी के बढ़े हुए दामों ने उद्योगों की लागत बढ़ा दी है जिससे पैकेजिंग उद्योग की 500 में से 400 इकाईयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। कई फैक्ट्रियों में उत्पादन करीब आधा ही रह गया है और पिछले 15 दिनों से उत्पादन लगातार प्रभावित हो रहा है।
इसके अलावा शहर से करीब 20 प्रतिशत श्रमिक पलायन भी कर चुके हैं। गैस संकट का असर औद्योगिक श्रमिकों पर भी साफ दिख रहा है। होली के दौरान अपने घर गए श्रमिक लौटे नहीं हैं। जो आए हैं वो भी घर लौट रहे हैं। अनुमान के मुताबिक करीब 20 प्रतिशत श्रमिक पलायन कर चुके हैं। इससे भी उद्योगों में उत्पादन प्रभावित हुआ है।
वहीं छोटे गैस सिलिंडर न मिलने से दुकानों पर काम करने वाले श्रमिकों को काम नहीं मिल रहा था। इसके चलते वह भी पलायन कर गए। उद्योगों में उत्पादन घटने से ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पा रहे जिससे व्यापारिक नुकसान लगातार बढ़ रहा है। उद्यमियों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति और कीमतों को लेकर समाधान नहीं निकला तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ये बोले उद्यमी...
मेरी फैक्टरी में करीब आठ ब्रांच हैं। हर ब्रांच से पांच से छह श्रमिक चले गए हैं। करीब 20 प्रतिशत श्रमिक वापस लौट गए हैं। जो श्रमिक होली पर घर गए थे वो भी नहीं आए हैं। इससे उत्पादन आधा रह गया है। मशीनों को बंद करना पड़ रहा है।
-- -- पवन जैन, फुटवियर उद्यमी
लगभग 500 उद्योग पैकेजिंग यानि कॉरुगेटेड बॉक्स निर्माण से जुड़े हैं। इनमें से 400 से अधिक इकाईयां अपने उत्पादन के लिए व्यापारिक एलपीजी पर निर्भर हैं और गैस की अनुपलब्धता के कारण इन इकाइयों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है तथा कई इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
-- -- सुरेंद्र वशिष्ठ, पैकेजिंग उद्यमी एवं सचिव, कन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज।
एलपीजी सिलिंडर नहीं मिल पा रहे जबकि पीएनजी की कीमतें अधिक होने के कारण उसका उपयोग महंगा पड़ रहा है। ऐसे में छोटे और मध्यम उद्योगों के सामने संचालन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। पीएनजी के रेट कम करने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है। स्थानीय स्तर पर एसडीएम से भी इस संबंध में हस्तक्षेप की मांग की जा चुकी है।
-- -नरेंद्र छिकारा, वरिष्ठ उप प्रधान, बहादुरगढ़ चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। उद्योग इन दिनों दोहरे संकट से जूझ रहा है। एक ओर एलपीजी गैस की सप्लाई नहीं हो रही है वहीं दूसरी तरफ पीएनजी के बढ़े हुए दामों ने उद्योगों की लागत बढ़ा दी है जिससे पैकेजिंग उद्योग की 500 में से 400 इकाईयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। कई फैक्ट्रियों में उत्पादन करीब आधा ही रह गया है और पिछले 15 दिनों से उत्पादन लगातार प्रभावित हो रहा है।
इसके अलावा शहर से करीब 20 प्रतिशत श्रमिक पलायन भी कर चुके हैं। गैस संकट का असर औद्योगिक श्रमिकों पर भी साफ दिख रहा है। होली के दौरान अपने घर गए श्रमिक लौटे नहीं हैं। जो आए हैं वो भी घर लौट रहे हैं। अनुमान के मुताबिक करीब 20 प्रतिशत श्रमिक पलायन कर चुके हैं। इससे भी उद्योगों में उत्पादन प्रभावित हुआ है।
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वहीं छोटे गैस सिलिंडर न मिलने से दुकानों पर काम करने वाले श्रमिकों को काम नहीं मिल रहा था। इसके चलते वह भी पलायन कर गए। उद्योगों में उत्पादन घटने से ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पा रहे जिससे व्यापारिक नुकसान लगातार बढ़ रहा है। उद्यमियों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति और कीमतों को लेकर समाधान नहीं निकला तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ये बोले उद्यमी...
मेरी फैक्टरी में करीब आठ ब्रांच हैं। हर ब्रांच से पांच से छह श्रमिक चले गए हैं। करीब 20 प्रतिशत श्रमिक वापस लौट गए हैं। जो श्रमिक होली पर घर गए थे वो भी नहीं आए हैं। इससे उत्पादन आधा रह गया है। मशीनों को बंद करना पड़ रहा है।
लगभग 500 उद्योग पैकेजिंग यानि कॉरुगेटेड बॉक्स निर्माण से जुड़े हैं। इनमें से 400 से अधिक इकाईयां अपने उत्पादन के लिए व्यापारिक एलपीजी पर निर्भर हैं और गैस की अनुपलब्धता के कारण इन इकाइयों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है तथा कई इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
एलपीजी सिलिंडर नहीं मिल पा रहे जबकि पीएनजी की कीमतें अधिक होने के कारण उसका उपयोग महंगा पड़ रहा है। ऐसे में छोटे और मध्यम उद्योगों के सामने संचालन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। पीएनजी के रेट कम करने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है। स्थानीय स्तर पर एसडीएम से भी इस संबंध में हस्तक्षेप की मांग की जा चुकी है।

फोटो-61: बहादुरगढ़ में सिर पर सामान लादकर अपने गंतव्य की ओर जाता श्रमिक परिवार। संवाद