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Jhajjar-Bahadurgarh News: पेंशन के कागज पूरे...सिस्टम अधूरा, बुजुर्ग खाली हाथ लौटे
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फोटो 81: सुशीला देवी
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बहादुरगढ़। खंड विकास एवं पंचायत विभाग कार्यालय में बुधवार को पेंशन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए शिविर में पहुंचे अधिकतर लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। बुजुर्गों, विधवाओं और जरूरतमंदों ने आरोप लगाया कि कई महीनों से पेंशन बंद है लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।
शिविर में पहुंचे लोगों ने दस्तावेजों में गड़बड़ी, बैंक खाते से लिंकिंग और सत्यापन प्रक्रिया में देरी को लेकर शिकायतें की। शिविर में आए जगदीश कुमार, शिवकुमार शर्मा, राजेंद्र कुमार, राजरानी का कहना है कि बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे।
हालांकि विभाग की ओर से दावा किया गया कि समस्याओं का समाधान किया जा रहा है लेकिन मौके पर मौजूद अधिकांश लोग असंतुष्ट नजर आए। उन्होंने मांग की कि पेंशन जैसी महत्वपूर्ण योजना में आ रही तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं को जल्द दूर किया जाए।
सुशीला देवी
रिकॉर्ड में नाम बदला तो समाधान के बजाय पेंशन बंद
राम नगर की सुशीला देवी ने कहा कि वह 2004 से विधवा पेंशन ले रही थीं लेकिन अब 6 महीने से पेंशन बंद कर दी गई है। मेरे सभी दस्तावेजों में नाम ‘सुशीला देवी’ है लेकिन विभाग के रिकॉर्ड में केवल ‘सुशीला’ दर्ज है। इसी पेंशन से वे अपना घर का गुजारा चलाती हैं। अब परेशानी कई गुना बढ़ गई है।
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चंद्रप्रकाश
शिविर में समाधान के लिए पहुंचे बुजुर्ग, निराश लौटे
किला मोहल्ला निवासी 69 वर्षीय चंदप्रकाश ने बताया कि वे पिछले 9 साल से पेंशन ले रहे थे लेकिन 6 महीने से पेंशन बंद है। पेंशन इंडियन बैंक के खाते में आती थी लेकिन अब खाते से जुड़ी जानकारी को लेकर बार-बार दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। झज्जर में भी 6 बार चक्कर काट चुका हूं लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। शिविर में पेंशन संबंधी समस्या के समाधान के लिए पहुंचा थे लेकिन निराश होकर जाना पड़ा।
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विधा
दो साल से लगा रहीं चक्कर, नहीं बन रही पेंशन
बिहार कॉलोनी निवासी 62 वर्षीय विधा बेटे भूपेश कुमार के साथ शिविर में पेंशन बनवाने पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह पिछले दो साल से पेंशन बनवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। झज्जर चार बार जा चुके हैं। अब वोटर कार्ड ओरिजिनल मांगा जा रहा है। वह अपने ओरिजिनल दस्तावेज लेकर शिविर में आईं मगर यहां से भी बैरंग ही लौटा दिया गया। पता नहीं मेरी नई पेंशन बनेगी या नहीं।
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हालांकि विभाग की ओर से दावा किया गया कि समस्याओं का समाधान किया जा रहा है लेकिन मौके पर मौजूद अधिकांश लोग असंतुष्ट नजर आए। उन्होंने मांग की कि पेंशन जैसी महत्वपूर्ण योजना में आ रही तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं को जल्द दूर किया जाए।
सुशीला देवी
रिकॉर्ड में नाम बदला तो समाधान के बजाय पेंशन बंद
राम नगर की सुशीला देवी ने कहा कि वह 2004 से विधवा पेंशन ले रही थीं लेकिन अब 6 महीने से पेंशन बंद कर दी गई है। मेरे सभी दस्तावेजों में नाम ‘सुशीला देवी’ है लेकिन विभाग के रिकॉर्ड में केवल ‘सुशीला’ दर्ज है। इसी पेंशन से वे अपना घर का गुजारा चलाती हैं। अब परेशानी कई गुना बढ़ गई है।
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चंद्रप्रकाश
शिविर में समाधान के लिए पहुंचे बुजुर्ग, निराश लौटे
किला मोहल्ला निवासी 69 वर्षीय चंदप्रकाश ने बताया कि वे पिछले 9 साल से पेंशन ले रहे थे लेकिन 6 महीने से पेंशन बंद है। पेंशन इंडियन बैंक के खाते में आती थी लेकिन अब खाते से जुड़ी जानकारी को लेकर बार-बार दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। झज्जर में भी 6 बार चक्कर काट चुका हूं लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। शिविर में पेंशन संबंधी समस्या के समाधान के लिए पहुंचा थे लेकिन निराश होकर जाना पड़ा।
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विधा
दो साल से लगा रहीं चक्कर, नहीं बन रही पेंशन
बिहार कॉलोनी निवासी 62 वर्षीय विधा बेटे भूपेश कुमार के साथ शिविर में पेंशन बनवाने पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह पिछले दो साल से पेंशन बनवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। झज्जर चार बार जा चुके हैं। अब वोटर कार्ड ओरिजिनल मांगा जा रहा है। वह अपने ओरिजिनल दस्तावेज लेकर शिविर में आईं मगर यहां से भी बैरंग ही लौटा दिया गया। पता नहीं मेरी नई पेंशन बनेगी या नहीं।

फोटो 81: सुशीला देवी

फोटो 81: सुशीला देवी

फोटो 81: सुशीला देवी