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Jhajjar-Bahadurgarh News: मेहनत, हौसले और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी रागिनी
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 06 Apr 2026 03:50 AM IST
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05jjrp06- डीघल निवासी रागिनी को सम्मानित करते पीएनबी के ग्रामीण स्वरोजगार केंद्र के निदेशक उमेश
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झज्जर। हर बड़ी सफलता की शुरुआत एक छोटे कदम से होती है। इस बात को मध्यप्रदेश के जबलपुर हाल गांव डीघल निवासी रागिनी ने सच कर दिखाया है। एक साधारण परिवार से संबंध रखने वाली रागिनी 10वीं पास हैं लेकिन हौसले और मेहनत ने उनको एक सफल उद्यमी बना दिया है।
शुरुआत में रागिनी के पास एक सिलाई मशीन थी। सीमित संसाधनों और साधारण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने अपने काम को बढ़ाया। आज उनके पास 8 आधुनिक सिलाई मशीनें हैं। इनमें इंटरलॉक, पिको जैसी सभी प्रकार की मशीनें शामिल हैं।
रागिनी अपने ग्राहकों की मांग के अनुसार सूट, सलवार, लहंगा, पैंट और अन्य कई प्रकार के वस्त्र तैयार करती हैं। उनके काम की गुणवत्ता और विश्वास ने उन्हें गांव और आसपास के क्षेत्रों में एक पहचान दिलाई है। अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए रागिनी ने लगभग एक से 1.5 लाख रुपये का निवेश किया।
इसमें उन्होंने स्वयं सहायता समूह गौरी शंकर से 75 हजार रुपये का लोन लेकर अपने काम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। पिछले 5 वर्षों से लगातार मेहनत करते हुए आज वह महीने के 35 से 40 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी सफलता के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा योगदान है।
उनके पति गांव में किराना दुकान चलाते हैं उन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया। परिवार के सहयोग और विश्वास ने रागिनी के आत्मविश्वास को और मजबूत किया। रागिनी न केवल खुद आत्मनिर्भर बनी हैं बल्कि आसपास की महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं, जिससे अन्य महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं।
रागिनी की इस उपलब्धि पर पीएनबी के ग्रामीण स्वरोजगार केंद्र के निदेशक उमेश भूकर गोरिया एवं पूरी टीम ने उन्हें सम्मानित करते हुए मोमेंटो भेंट किया।
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शुरुआत में रागिनी के पास एक सिलाई मशीन थी। सीमित संसाधनों और साधारण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने अपने काम को बढ़ाया। आज उनके पास 8 आधुनिक सिलाई मशीनें हैं। इनमें इंटरलॉक, पिको जैसी सभी प्रकार की मशीनें शामिल हैं।
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रागिनी अपने ग्राहकों की मांग के अनुसार सूट, सलवार, लहंगा, पैंट और अन्य कई प्रकार के वस्त्र तैयार करती हैं। उनके काम की गुणवत्ता और विश्वास ने उन्हें गांव और आसपास के क्षेत्रों में एक पहचान दिलाई है। अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए रागिनी ने लगभग एक से 1.5 लाख रुपये का निवेश किया।
इसमें उन्होंने स्वयं सहायता समूह गौरी शंकर से 75 हजार रुपये का लोन लेकर अपने काम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। पिछले 5 वर्षों से लगातार मेहनत करते हुए आज वह महीने के 35 से 40 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी सफलता के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा योगदान है।
उनके पति गांव में किराना दुकान चलाते हैं उन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया। परिवार के सहयोग और विश्वास ने रागिनी के आत्मविश्वास को और मजबूत किया। रागिनी न केवल खुद आत्मनिर्भर बनी हैं बल्कि आसपास की महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं, जिससे अन्य महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं।
रागिनी की इस उपलब्धि पर पीएनबी के ग्रामीण स्वरोजगार केंद्र के निदेशक उमेश भूकर गोरिया एवं पूरी टीम ने उन्हें सम्मानित करते हुए मोमेंटो भेंट किया।