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Jhajjar-Bahadurgarh News: व्हीलचेयर पर जज्बा, सुखचैन ने जैवलिन थ्रो में जीता सोना
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-फोटो 84 : स्वर्ण पदक विजेता पैरा एथलीट सुखचैन कोच सुनील फोगाट के साथ। स्रोत परिजन
- फोटो : samvad
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बहादुरगढ़। हौंसले अगर बुलंद हों तो हालात भी रास्ता नहीं रोक पाते। इसका जीता-जागता उदाहरण बने हैं गांव गोयला कलां के पैरा एथलीट सुखचैन धनखड़ जिन्होंने 10 साल से व्हीलचेयर पर रहने के बावजूद जैवलिन थ्रो में सोना जीतकर नाम रोशन किया है। उनकी जीत पर गांव गोयला कलां में खुशी का माहौल है।
भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में आयोजित 24वीं नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सुखचैन धनखड़ ने एफ-55 कैटेगरी में 31.18 मीटर का थ्रो कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता में 12 राज्यों के खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की।
सुखचैन की कहानी संघर्ष और जज्बे से भरी है। वर्ष 2016 में एक सड़क हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई जिसके बाद उनके पैर काम करना बंद कर गए। तब से वे व्हीलचेयर पर हैं। छोटे भाईयों सुरेंद्र और सन्नी के सहयोग और परिवार के हौंसले ने उन्हें खेलों की ओर आगे बढ़ाया।
एक भाई उनके साथ ही रहता है और उन्हें स्टेडियम में अभ्यास कराने के लिए लाने व ले जाने में सहयोग करता रहता है। पिछले चार वर्षों से वे दिल्ली के राजीव गांधी स्टेडियम में कोच सुनील फोगाट की देखरेख में कड़ा अभ्यास कर रहे हैं।
उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि हाल ही में दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स में भी उन्होंने जैवलिन थ्रो में स्वर्ण और डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीता था।
एशियन चैंपियनशिप की तैयारी में जुटे
किसान पिता तेजवीर सिंह का सपना है कि उनका बेटा देश के लिए और पदक जीते। इससे पहले हुए नेशनल गेम्स में भी सुखचैन ने 4 पदक जीते हैं। सुखचैन अब अक्तूबर में जापान में होने वाली एशियन चैंपियनशिप की तैयारी में जुटे हैं। मां लक्ष्मी, पिता तेजवीर सिंह, चाचा धनराज समेत परिवार के अन्य सदस्यों व खेल प्रशंसकों ने सुखचैन की इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए बधाई दी।
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भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में आयोजित 24वीं नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सुखचैन धनखड़ ने एफ-55 कैटेगरी में 31.18 मीटर का थ्रो कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता में 12 राज्यों के खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की।
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सुखचैन की कहानी संघर्ष और जज्बे से भरी है। वर्ष 2016 में एक सड़क हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई जिसके बाद उनके पैर काम करना बंद कर गए। तब से वे व्हीलचेयर पर हैं। छोटे भाईयों सुरेंद्र और सन्नी के सहयोग और परिवार के हौंसले ने उन्हें खेलों की ओर आगे बढ़ाया।
एक भाई उनके साथ ही रहता है और उन्हें स्टेडियम में अभ्यास कराने के लिए लाने व ले जाने में सहयोग करता रहता है। पिछले चार वर्षों से वे दिल्ली के राजीव गांधी स्टेडियम में कोच सुनील फोगाट की देखरेख में कड़ा अभ्यास कर रहे हैं।
उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि हाल ही में दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स में भी उन्होंने जैवलिन थ्रो में स्वर्ण और डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीता था।
एशियन चैंपियनशिप की तैयारी में जुटे
किसान पिता तेजवीर सिंह का सपना है कि उनका बेटा देश के लिए और पदक जीते। इससे पहले हुए नेशनल गेम्स में भी सुखचैन ने 4 पदक जीते हैं। सुखचैन अब अक्तूबर में जापान में होने वाली एशियन चैंपियनशिप की तैयारी में जुटे हैं। मां लक्ष्मी, पिता तेजवीर सिंह, चाचा धनराज समेत परिवार के अन्य सदस्यों व खेल प्रशंसकों ने सुखचैन की इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए बधाई दी।