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Jhajjar-Bahadurgarh News: दिहाड़ी 600 और गैस मिल रही 350 रुपये किलो, कैसे चले घर
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 06 Apr 2026 04:22 AM IST
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-फोटो 89 : बबलू कुमार
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बहादुरगढ़। दैनिक दिहाड़ी 600 रुपये हैं और गैस 350 रुपये प्रति किलो मिल रही है। ऐसे में मजदूरों के लिए पेट भरने के साथ-साथ घर चलाने में समस्या खड़ी हो गई है। यदि हालत सामान्य नहीं हुए तो मजबूरन ये घर लौटने को मजबूर हैं।
जिला प्रशासन दावे कर रहा है कि गैस की कमी नहीं है। लेकिन हजारों दिहाड़ीदार मजदूरों को पेट भरना मुश्किल हो गया है। कालाबाजारी रुकने, कॉमर्शियल सिलिंडर न मिलने के कारण छोटे सिलिंडरों में गैस महंगी मिल रही है। गैस भी इतनी महंगी कि आधे से अधिक दिन की दिहाड़ी इसमें खर्च हो रही है।
मजदूरों का कहना है कि राशन-पानी, कमरे का किराया, बच्चों का खर्च यदि जोड़े तो एक दिन भी नहीं रुक सकते। गांव में काम पर जाते हैं तो वहां से एक-दो समय की लकड़ी लाकर अपना गुजारा कर लेते हैं। लेकिन यह कब तक चलेगा।
बोला दर्द
सोमवार को एक किलो गैस 350 रुपये में भरवाई है जबकि दिनभर की दिहाड़ी मात्र 600 रुपये है। ऐसे में घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। दिनभर मेहनत करके जो कमाते हैं उसमें से अगर आधा गैस में ही चला जाए तो परिवार कैसे पालें।
- बबलू प्रसाद, छोटूराम नगर
गैस के बढ़ते दामों से परेशान हैं। 350 रुपये में गैस भरवाकर घर लेकर जाना पड़ता है जो बेहद महंगा है। इतनी महंगी गैस हम बार-बार नहीं भरवा सकते। ऐसे में जल्द ही अपने घर को लौट जाएंगे।
- रामनिवास, हरि नगर कॉलोनी, लाइनपार
रेलवे रोड पर लेबर चौक पर काम की तलाश में खड़े रहते हैं। कई बार काम नहीं मिलता और अब तो गैस सिलिंडर भी नहीं मिलता। मांडोठी गांव में काम के लिए गए थे। गैस की अनुपलब्धता के कारण लकड़ी लाकर खाना बनाना पड़ा। आज भी लकड़ी लेकर आया हूं, इसी से काम चलाएंगे।
- धनंजय कुमार, छोटूराम नगर
प्रशासन से राहत की मांग
मजदूर संतोष, गोविंद व सुरेश का कहना है कि गैस की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में कमी ने उनके दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई परिवार अब फिर से चूल्हे और लकड़ी पर लौटने लगे हैं। लोगों ने प्रशासन से गैस की कीमतों को नियंत्रित करने और सिलिंडर की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
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जिला प्रशासन दावे कर रहा है कि गैस की कमी नहीं है। लेकिन हजारों दिहाड़ीदार मजदूरों को पेट भरना मुश्किल हो गया है। कालाबाजारी रुकने, कॉमर्शियल सिलिंडर न मिलने के कारण छोटे सिलिंडरों में गैस महंगी मिल रही है। गैस भी इतनी महंगी कि आधे से अधिक दिन की दिहाड़ी इसमें खर्च हो रही है।
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मजदूरों का कहना है कि राशन-पानी, कमरे का किराया, बच्चों का खर्च यदि जोड़े तो एक दिन भी नहीं रुक सकते। गांव में काम पर जाते हैं तो वहां से एक-दो समय की लकड़ी लाकर अपना गुजारा कर लेते हैं। लेकिन यह कब तक चलेगा।
बोला दर्द
सोमवार को एक किलो गैस 350 रुपये में भरवाई है जबकि दिनभर की दिहाड़ी मात्र 600 रुपये है। ऐसे में घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। दिनभर मेहनत करके जो कमाते हैं उसमें से अगर आधा गैस में ही चला जाए तो परिवार कैसे पालें।
- बबलू प्रसाद, छोटूराम नगर
गैस के बढ़ते दामों से परेशान हैं। 350 रुपये में गैस भरवाकर घर लेकर जाना पड़ता है जो बेहद महंगा है। इतनी महंगी गैस हम बार-बार नहीं भरवा सकते। ऐसे में जल्द ही अपने घर को लौट जाएंगे।
- रामनिवास, हरि नगर कॉलोनी, लाइनपार
रेलवे रोड पर लेबर चौक पर काम की तलाश में खड़े रहते हैं। कई बार काम नहीं मिलता और अब तो गैस सिलिंडर भी नहीं मिलता। मांडोठी गांव में काम के लिए गए थे। गैस की अनुपलब्धता के कारण लकड़ी लाकर खाना बनाना पड़ा। आज भी लकड़ी लेकर आया हूं, इसी से काम चलाएंगे।
- धनंजय कुमार, छोटूराम नगर
प्रशासन से राहत की मांग
मजदूर संतोष, गोविंद व सुरेश का कहना है कि गैस की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में कमी ने उनके दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई परिवार अब फिर से चूल्हे और लकड़ी पर लौटने लगे हैं। लोगों ने प्रशासन से गैस की कीमतों को नियंत्रित करने और सिलिंडर की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

-फोटो 89 : बबलू कुमार

-फोटो 89 : बबलू कुमार

-फोटो 89 : बबलू कुमार

-फोटो 89 : बबलू कुमार