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Jind News: बगीचे में भक्ति का एहसास
Sat, 01 Aug 2026 05:30 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 01 Aug 2026 05:30 PM IST
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फोटो 1एसएफडीएम1शहर के मुख्य बाजार में भगवान की प्रतिमाओं को दिखाते हुए दुकानदार राकेश कुमार। स
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संवाद न्यूज एजेंसी
सफीदों। बाजार में बड़े आकार की भगवान की प्रतिमाओं की मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है। लोग इनका उपयोग बड़े मंदिरों, गृह-प्रवेश और फार्महाउस की सजावट के लिए कर रहे हैं। संगमरमर, पीतल और फाइबर ग्लास से बनी दो से पांच फीट या उससे अधिक ऊंची मूर्तियां अधिक पसंद की जा रही हैं।
दुकानदार राकेश कुमार ने बताया कि मंदिरों और घरों में स्थापना के लिए बड़ी मूर्तियों की विशेष मांग है। आधुनिक घरों की लॉबी और बगीचे के क्षेत्रों में भी आध्यात्मिक व शांत दिखने वाली प्रतिमाएं सजावट के रूप में रखी जा रही हैं। गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा और विश्वकर्मा पूजा जैसे त्योहारों पर बड़े पंडालों के लिए इनकी विशेष मांग रहती है।
जयपुर और मकराना के पत्थरों से बनी मूर्तियां बारीक कारीगरी के कारण सबसे लोकप्रिय हैं। पीतल और धातु की प्रतिमाएं टिकाऊ व भारी होती हैं, जो मंदिर-आकार की मूर्तियों के लिए उपयुक्त हैं। फाइबर ग्लास की मूर्तियां हल्की, मजबूत और आसानी से धोई जा सकने वाली होती हैं, जो आधुनिक चलन में हैं।
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राकेश कुमार के पास 100 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की भगवान की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। ग्राहक अपनी पसंद और बजट के अनुसार प्रतिमाएं चुन सकते हैं। जो प्रतिमाएं दुकान पर उपलब्ध नहीं होतीं, उनके लिए ग्राहक ऑर्डर भी दे सकते हैं। इससे ग्राहकों को अपनी मनपसंद प्रतिमा प्राप्त करने की सुविधा मिलती है।
इंसेट
उपहार और घरों की सजावट
राकेश कुमार ने बताया कि लोग भगवान की प्रतिमाओं का उपयोग उपहार देने के लिए भी करते हैं। शादी-विवाह, जन्मदिन और अन्य खुशी के अवसरों पर लोग प्रतिमाएं पैक कराकर संबंधित व्यक्ति को उपहार देते हैं। घरों को सजाने के लिए भी ग्राहक विभिन्न प्रकार की प्रतिमाएं खरीदते हैं। ये प्रतिमाएं घरों में आध्यात्मिक माहौल बनाने में सहायक होती हैं।
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सफीदों। बाजार में बड़े आकार की भगवान की प्रतिमाओं की मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है। लोग इनका उपयोग बड़े मंदिरों, गृह-प्रवेश और फार्महाउस की सजावट के लिए कर रहे हैं। संगमरमर, पीतल और फाइबर ग्लास से बनी दो से पांच फीट या उससे अधिक ऊंची मूर्तियां अधिक पसंद की जा रही हैं।
दुकानदार राकेश कुमार ने बताया कि मंदिरों और घरों में स्थापना के लिए बड़ी मूर्तियों की विशेष मांग है। आधुनिक घरों की लॉबी और बगीचे के क्षेत्रों में भी आध्यात्मिक व शांत दिखने वाली प्रतिमाएं सजावट के रूप में रखी जा रही हैं। गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा और विश्वकर्मा पूजा जैसे त्योहारों पर बड़े पंडालों के लिए इनकी विशेष मांग रहती है।
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जयपुर और मकराना के पत्थरों से बनी मूर्तियां बारीक कारीगरी के कारण सबसे लोकप्रिय हैं। पीतल और धातु की प्रतिमाएं टिकाऊ व भारी होती हैं, जो मंदिर-आकार की मूर्तियों के लिए उपयुक्त हैं। फाइबर ग्लास की मूर्तियां हल्की, मजबूत और आसानी से धोई जा सकने वाली होती हैं, जो आधुनिक चलन में हैं।
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राकेश कुमार के पास 100 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की भगवान की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। ग्राहक अपनी पसंद और बजट के अनुसार प्रतिमाएं चुन सकते हैं। जो प्रतिमाएं दुकान पर उपलब्ध नहीं होतीं, उनके लिए ग्राहक ऑर्डर भी दे सकते हैं। इससे ग्राहकों को अपनी मनपसंद प्रतिमा प्राप्त करने की सुविधा मिलती है।
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उपहार और घरों की सजावट
राकेश कुमार ने बताया कि लोग भगवान की प्रतिमाओं का उपयोग उपहार देने के लिए भी करते हैं। शादी-विवाह, जन्मदिन और अन्य खुशी के अवसरों पर लोग प्रतिमाएं पैक कराकर संबंधित व्यक्ति को उपहार देते हैं। घरों को सजाने के लिए भी ग्राहक विभिन्न प्रकार की प्रतिमाएं खरीदते हैं। ये प्रतिमाएं घरों में आध्यात्मिक माहौल बनाने में सहायक होती हैं।