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Jind News: हत्या के प्रयास के मामले में अदालत ने आरोपी को किया बरी
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रेवाड़ी। हत्या के प्रयास के एक मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लोकेश गुप्ता की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में धारूहेड़ा निवासी आरोपी हंसराज को बरी कर दिया।
मामले के अनुसार 23 फरवरी 2022 को शिकायतकर्ता मोनू उर्फ मनीष ने बताया था कि वह धारूहेड़ा में एक नाई की दुकान के बाहर खड़ा था तभी मंजीत और उसका दोस्त बाइक पर वहां पहुंचे। इसी दौरान अंडे का ठेला लगाने वाला हंसराज वहां आया और मंजीत पर चाकू से कई वार कर दिए।
घायल मंजीत को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने उसकी चोटों को जानलेवा बताया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसी दिन एफआईआर दर्ज कर हंसराज को गिरफ्तार कर लिया था। जांच पूरी होने के बाद अदालत में चालान पेश किया गया और हंसराज के खिलाफ आरोप तय किए गए।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 12 गवाह पेश किए हालांकि सुनवाई के दौरान सभी मुख्य गवाहों ने पहले दिए गए बयानों से पीछे हट गए और अदालत में कोई ठोस बयान नहीं दिया गया। गवाहों ने स्पष्ट कहा कि हंसराज ने मंजीत पर हमला नहीं किया।
19 मार्च को दिए अपने फैसले में अदालत ने अपने स्पष्ट किया कि साक्ष्य के आधार पर दोष सिद्ध करने के लिए सबूतों की मजबूत और पूरी कड़ी होना आवश्यक है जो इस मामले में नहीं बन पाई। डॉक्टर की गवाही में भी हमलावर या हथियार का उल्लेख नहीं था जबकि बरामद चाकू पर कोई ठोस निशान या खून नहीं मिला।
साथ ही मुख्य गवाहों ने आरोपी के खिलाफ बयान देने से इनकार कर दिया। इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा और संदेह का लाभ देते हुए आरोपी हंसराज को बरी कर दिया।
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मामले के अनुसार 23 फरवरी 2022 को शिकायतकर्ता मोनू उर्फ मनीष ने बताया था कि वह धारूहेड़ा में एक नाई की दुकान के बाहर खड़ा था तभी मंजीत और उसका दोस्त बाइक पर वहां पहुंचे। इसी दौरान अंडे का ठेला लगाने वाला हंसराज वहां आया और मंजीत पर चाकू से कई वार कर दिए।
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घायल मंजीत को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने उसकी चोटों को जानलेवा बताया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसी दिन एफआईआर दर्ज कर हंसराज को गिरफ्तार कर लिया था। जांच पूरी होने के बाद अदालत में चालान पेश किया गया और हंसराज के खिलाफ आरोप तय किए गए।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 12 गवाह पेश किए हालांकि सुनवाई के दौरान सभी मुख्य गवाहों ने पहले दिए गए बयानों से पीछे हट गए और अदालत में कोई ठोस बयान नहीं दिया गया। गवाहों ने स्पष्ट कहा कि हंसराज ने मंजीत पर हमला नहीं किया।
19 मार्च को दिए अपने फैसले में अदालत ने अपने स्पष्ट किया कि साक्ष्य के आधार पर दोष सिद्ध करने के लिए सबूतों की मजबूत और पूरी कड़ी होना आवश्यक है जो इस मामले में नहीं बन पाई। डॉक्टर की गवाही में भी हमलावर या हथियार का उल्लेख नहीं था जबकि बरामद चाकू पर कोई ठोस निशान या खून नहीं मिला।
साथ ही मुख्य गवाहों ने आरोपी के खिलाफ बयान देने से इनकार कर दिया। इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा और संदेह का लाभ देते हुए आरोपी हंसराज को बरी कर दिया।