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तीन दशक बीत जाने के बाद भी संकल्प अधूरा : डॉ. विजय
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 23 Feb 2026 12:07 AM IST
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जींद। सीआरएसयू में एनएसएस और सोशल आउटरीच सेल की ओर से जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र के सहयोग से संकल्प दिवस पर व्याख्यान किया गया। इसकी अध्यक्षता एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नवीन लडवाल ने की। इसमें मुख्य वक्ता के तौर पर डॉ. विजय कुमार ने शिरकत की।
डॉ. विजय कुमार ने बताया कि 22 फरवरी 1994 को तत्कालीन केंद्र सरकार ने संसद में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव में यह स्पष्ट किया गया था कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है और उसे हर हाल में वापस लिया जाएगा। उन्होंने अफसोस जताया कि तीन दशक बीत जाने के बाद भी यह संकल्प अभी अधूरा है।
उन्होंने गिलगित-बाल्टिस्तान में मौजूद 1480 सोने की खदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां सोने की मात्रा दक्षिण अफ्रीका की खदानों से भी अधिक है। यदि यह क्षेत्र भारत के पास होता, तो देश की आर्थिक शक्ति विश्व पटल पर और भी सुदृढ़ होती। कार्यक्रम में न केवल पाकिस्तान बल्कि चीन के अवैध कब्जे वाले लद्दाख क्षेत्र पर भी चर्चा की गई।
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डॉ. विजय कुमार ने बताया कि 22 फरवरी 1994 को तत्कालीन केंद्र सरकार ने संसद में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव में यह स्पष्ट किया गया था कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है और उसे हर हाल में वापस लिया जाएगा। उन्होंने अफसोस जताया कि तीन दशक बीत जाने के बाद भी यह संकल्प अभी अधूरा है।
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उन्होंने गिलगित-बाल्टिस्तान में मौजूद 1480 सोने की खदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां सोने की मात्रा दक्षिण अफ्रीका की खदानों से भी अधिक है। यदि यह क्षेत्र भारत के पास होता, तो देश की आर्थिक शक्ति विश्व पटल पर और भी सुदृढ़ होती। कार्यक्रम में न केवल पाकिस्तान बल्कि चीन के अवैध कब्जे वाले लद्दाख क्षेत्र पर भी चर्चा की गई।