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Jind News: किसानों को कीट नियंत्रण की आधुनिक तकनीक बताई
Tue, 14 Jul 2026 07:41 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 14 Jul 2026 07:41 PM IST
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फोटो 14जेएनडी19-नरमा की फसल में बीमारियों की जांच करती कृषि वैज्ञानिकों की टीम। स्रोत प्रशासन
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जींद। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के क्षेत्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन केंद्र, फरीदाबाद और जिला कृषि विभाग, जींद की संयुक्त टीम ने जिले में कपास और धान की नर्सरी का सर्वेक्षण किया। इस दौरान किसानों को कीट एवं रोगों की रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई।
क्षेत्रीय निदेशक वंदना पांडेय के निर्देशन में यह सर्वेक्षण हुआ। सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी ईश्वर दत्त और कृषि निरीक्षक अंकित शर्मा भी टीम में थे। अधिकारियों ने किसानों को धान की बुवाई से पहले बीज उपचार की सलाह दी। इससे ड्वार्फ रोग तथा अन्य कीट-बीमारियों से बचाव होगा। यांत्रिक एवं जैविक कीट नियंत्रण उपायों को अपनाने पर भी जोर दिया गया।
कपास की फसल में 40-45 दिन बाद प्रति एकड़ चार फेरोमोन ट्रैप लगाने को कहा गया। रस चूसने वाले कीटों की निगरानी के लिए पीले और नीले स्टिकी ट्रैप भी सुझाए गए। इससे कीटों की समय पर पहचान कर केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड से अनुमोदित दवाओं का उपयोग हो सकेगा।
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टीम ने किसानों को राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली मोबाइल एप के उपयोग की जानकारी दी। इस एप से किसान फसल में लगने वाले कीटों और रोगों की पहचान कर तत्काल समाधान पा सकेंगे। इससे अनावश्यक रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से भी बचा जा सकेगा। सर्वेक्षण के दौरान खेतों में फेरोमोन ट्रैप का प्रदर्शन भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण में कपास और धान की फसलों में कीट एवं बीमारियों का प्रकोप आर्थिक हानि स्तर से कम मिला है।
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क्षेत्रीय निदेशक वंदना पांडेय के निर्देशन में यह सर्वेक्षण हुआ। सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी ईश्वर दत्त और कृषि निरीक्षक अंकित शर्मा भी टीम में थे। अधिकारियों ने किसानों को धान की बुवाई से पहले बीज उपचार की सलाह दी। इससे ड्वार्फ रोग तथा अन्य कीट-बीमारियों से बचाव होगा। यांत्रिक एवं जैविक कीट नियंत्रण उपायों को अपनाने पर भी जोर दिया गया।
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कपास की फसल में 40-45 दिन बाद प्रति एकड़ चार फेरोमोन ट्रैप लगाने को कहा गया। रस चूसने वाले कीटों की निगरानी के लिए पीले और नीले स्टिकी ट्रैप भी सुझाए गए। इससे कीटों की समय पर पहचान कर केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड से अनुमोदित दवाओं का उपयोग हो सकेगा।
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टीम ने किसानों को राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली मोबाइल एप के उपयोग की जानकारी दी। इस एप से किसान फसल में लगने वाले कीटों और रोगों की पहचान कर तत्काल समाधान पा सकेंगे। इससे अनावश्यक रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से भी बचा जा सकेगा। सर्वेक्षण के दौरान खेतों में फेरोमोन ट्रैप का प्रदर्शन भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण में कपास और धान की फसलों में कीट एवं बीमारियों का प्रकोप आर्थिक हानि स्तर से कम मिला है।