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Jind News: राष्ट्रपति अवॉर्डी सुनीता के आंगन में लगे औषधीय व फूलदार पौधे
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02जेएनडी02: राष्ट्रपति अवार्डी सुनीता मलिक घर में सजाई बगिया की देखभाल करते हुए। संवाद
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जींद। प्रकृति से प्रेम केवल शब्दों में नहीं बल्कि जीवनशैली में उतारने का सशक्त उदाहरण हैं राष्ट्रपति अवार्डी एवं शिक्षाविद सुनीता मलिक। 35 वर्षों से वह प्रकृति से गहरे भावनात्मक रिश्ते में बंधी हुई हैं। मलिक का घर केवल निवास स्थान नहीं, बल्कि एक सजीव औषधीय और फूलदार उद्यान बन चुका है, जहां हर गमला जीवन, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
सुनीता मलिक ने बगिया में लगभग 80 प्रकार के औषधीय व फूलदार पौधों को बड़े ही स्नेह से संजोया है। तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, अश्वगंधा, नीम, लेमनग्रास, पुदीना, ब्राह्मी जैसे औषधीय पौधे जहां प्राकृतिक चिकित्सा का आधार हैं। वहीं गुलाब, गेंदा, चमेली, मोगरा, गुड़हल, सदाबहार जैसे फूलदार पौधे मन को शांति और प्रसन्नता प्रदान करते हैं।
प्रकृति से सुनीता मलिक का प्रेम इतना गहरा है कि वह अपने दिन की शुरुआत बगिया में समय बिताकर ही करती हैं। हर सुबह पौधों के बीच बिताया गया समय उन्हें नई ऊर्जा देता है। सुनीता बताती हैं कि पौधों की देखभाल करना उनके लिए आत्मिक सुकून का सबसे बड़ा स्रोत है।
सुनीता मलिक का प्रकृति प्रेम केवल घर तक सीमित नहीं रहा। सुनीता सिंधवी खेड़ा गांव स्कूल में प्राचार्य पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने विद्यालय परिसर को भी फूलदार व औषधीय पौधों से सजा रखा है। छात्रों को पेड़-पौधों के महत्व, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक जीवनशैली से जोड़ा है। उनका मानना है कि प्रकृति से जुड़ाव बच्चों के चरित्र निर्माण और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।
औषधीय पौधें घर में लगाने के लिए लोगों को रहीं प्रेरित
सुनीता सामाजिक संस्थाओं से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण के लिए भी कार्य कर रही हैं। लोगों को औषधीय पौधों के लाभ समझाना, उन्हें घर में लगाने के लिए प्रेरित करना और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूक करना उनके जीवन का हिस्सा बन चुका है। वह बताती हैं कि तुलसी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। एलोवेरा त्वचा व पाचन के लिए लाभकारी है। गिलोय शरीर को रोगमुक्त रखने में सहायक है। वहीं फूलदार पौधे मानसिक तनाव को कम कर सकारात्मकता बढ़ाते हैं।
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सुनीता मलिक ने बगिया में लगभग 80 प्रकार के औषधीय व फूलदार पौधों को बड़े ही स्नेह से संजोया है। तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, अश्वगंधा, नीम, लेमनग्रास, पुदीना, ब्राह्मी जैसे औषधीय पौधे जहां प्राकृतिक चिकित्सा का आधार हैं। वहीं गुलाब, गेंदा, चमेली, मोगरा, गुड़हल, सदाबहार जैसे फूलदार पौधे मन को शांति और प्रसन्नता प्रदान करते हैं।
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प्रकृति से सुनीता मलिक का प्रेम इतना गहरा है कि वह अपने दिन की शुरुआत बगिया में समय बिताकर ही करती हैं। हर सुबह पौधों के बीच बिताया गया समय उन्हें नई ऊर्जा देता है। सुनीता बताती हैं कि पौधों की देखभाल करना उनके लिए आत्मिक सुकून का सबसे बड़ा स्रोत है।
सुनीता मलिक का प्रकृति प्रेम केवल घर तक सीमित नहीं रहा। सुनीता सिंधवी खेड़ा गांव स्कूल में प्राचार्य पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने विद्यालय परिसर को भी फूलदार व औषधीय पौधों से सजा रखा है। छात्रों को पेड़-पौधों के महत्व, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक जीवनशैली से जोड़ा है। उनका मानना है कि प्रकृति से जुड़ाव बच्चों के चरित्र निर्माण और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।
औषधीय पौधें घर में लगाने के लिए लोगों को रहीं प्रेरित
सुनीता सामाजिक संस्थाओं से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण के लिए भी कार्य कर रही हैं। लोगों को औषधीय पौधों के लाभ समझाना, उन्हें घर में लगाने के लिए प्रेरित करना और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूक करना उनके जीवन का हिस्सा बन चुका है। वह बताती हैं कि तुलसी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। एलोवेरा त्वचा व पाचन के लिए लाभकारी है। गिलोय शरीर को रोगमुक्त रखने में सहायक है। वहीं फूलदार पौधे मानसिक तनाव को कम कर सकारात्मकता बढ़ाते हैं।
