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Jind News: बारिश के बाद खरबूजे की फसल पर झुलसा व मुरझा रोग, किसानों की बढ़ी चिंता
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12जेएनडी05,06: खरबूजे की फसल में आने वाली बीमारियों के बाद पत्ते व तने पर बने निशान। स्रोत : कि
- फोटो : संघ के बैठक में मौजूद शहर के गणमान्य नागरिक। स्रोत संगठन
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जींद। हाल ही में हुई बारिश और बूंदाबांदी के बाद बढ़ी नमी और तापमान में गिरावट से खरबूजे की फसल बीमारी की चपेट में आ गई। खेतों में फफूंद जनित रोग तेजी से फैल रहे हैं जिससे 85 एकड़ से अधिक क्षेत्र में खड़ी फसल खतरे में है।
लौन, उझाना, मखंड, आसन, बीबीपुर और हैबतपुर गांव के किसानों अनिल मास्टर, प्रवेश व राकेश मंखड ने बताया कि खरबूजे की फसल में अल्टरनेरिया ब्लाइट (पत्ती झुलसा) और फ्यूजेरियम विल्ट (मुरझा रोग) तेजी से फैल रहे हैं। यदि इस बीमारी पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में 30 से 60 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।
बारिश से खेतों में नमी बढ़ गई है जबकि 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान फफूंद के विकास के लिए अनुकूल होता है। पत्तियों पर लंबे समय तक ओस और पानी ठहरने से संक्रमण तेजी से फैलता है। पत्ती झुलसा रोग की शुरुआत छोटे भूरे धब्बों से होती है जो धीरे-धीरे बड़े होकर पत्तियों को सुखा देते हैं और पूरी बेल को प्रभावित कर सकते हैं।
धब्बों के चारों ओर पीला घेरा बनता है और पत्तियां सूखने लगती हैं। गंभीर स्थिति में पूरी बेल प्रभावित हो जाती है। घनी बुवाई, संक्रमित अवशेष और ऊपर से सिंचाई इसके प्रमुख कारण हैं।
पौधों की जड़ों को प्रभावित करता है जनित रोग
वहीं फ्यूजेरियम विल्ट मिट्टी जनित रोग है जो पौधों की जड़ों और आंतरिक नलिकाओं को प्रभावित करता है। संक्रमित पौधे अचानक मुरझा जाते हैं। पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और अंत में पौधा सूख जाता है।
वर्जन
किसान खेतों की नियमित निगरानी करें और जलभराव न होने दें। उचित निकासी की व्यवस्था करें। फसल के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखें ताकि हवा का संचार बना रहे। संक्रमित पौधों को तुरंत हटाकर नष्ट करें। पत्ती झुलसा की रोकथाम के लिए मैनकोजेब या क्लोरोथालोनिल और मुरझा रोग के नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम या मेटालैक्सिल का प्रयोग करें।-बिनीत यादव, जिला बागवानी अधिकारी।
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लौन, उझाना, मखंड, आसन, बीबीपुर और हैबतपुर गांव के किसानों अनिल मास्टर, प्रवेश व राकेश मंखड ने बताया कि खरबूजे की फसल में अल्टरनेरिया ब्लाइट (पत्ती झुलसा) और फ्यूजेरियम विल्ट (मुरझा रोग) तेजी से फैल रहे हैं। यदि इस बीमारी पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में 30 से 60 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।
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बारिश से खेतों में नमी बढ़ गई है जबकि 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान फफूंद के विकास के लिए अनुकूल होता है। पत्तियों पर लंबे समय तक ओस और पानी ठहरने से संक्रमण तेजी से फैलता है। पत्ती झुलसा रोग की शुरुआत छोटे भूरे धब्बों से होती है जो धीरे-धीरे बड़े होकर पत्तियों को सुखा देते हैं और पूरी बेल को प्रभावित कर सकते हैं।
धब्बों के चारों ओर पीला घेरा बनता है और पत्तियां सूखने लगती हैं। गंभीर स्थिति में पूरी बेल प्रभावित हो जाती है। घनी बुवाई, संक्रमित अवशेष और ऊपर से सिंचाई इसके प्रमुख कारण हैं।
पौधों की जड़ों को प्रभावित करता है जनित रोग
वहीं फ्यूजेरियम विल्ट मिट्टी जनित रोग है जो पौधों की जड़ों और आंतरिक नलिकाओं को प्रभावित करता है। संक्रमित पौधे अचानक मुरझा जाते हैं। पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और अंत में पौधा सूख जाता है।
वर्जन
किसान खेतों की नियमित निगरानी करें और जलभराव न होने दें। उचित निकासी की व्यवस्था करें। फसल के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखें ताकि हवा का संचार बना रहे। संक्रमित पौधों को तुरंत हटाकर नष्ट करें। पत्ती झुलसा की रोकथाम के लिए मैनकोजेब या क्लोरोथालोनिल और मुरझा रोग के नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम या मेटालैक्सिल का प्रयोग करें।-बिनीत यादव, जिला बागवानी अधिकारी।

12जेएनडी05,06: खरबूजे की फसल में आने वाली बीमारियों के बाद पत्ते व तने पर बने निशान। स्रोत : कि- फोटो : संघ के बैठक में मौजूद शहर के गणमान्य नागरिक। स्रोत संगठन