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Jind News: मिड डे मील वर्कर को दूसरे स्कूल में मिलेगा मौका
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 11 Jan 2026 12:43 AM IST
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जींद। राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण हटाई गईं मिड डे मील कुक-कम-हेल्पर को अब राहत मिल सकती है। मौलिक शिक्षा हरियाणा के महानिदेशक ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों के अनुसार यदि किसी राजकीय स्कूल में छात्र संख्या कम होने के चलते मिड डे मील वर्कर को हटाया गया है और उसी गांव के किसी अन्य राजकीय स्कूल में यह पद रिक्त है, तो संबंधित वर्कर को वहां समायोजित किया जा सकेगा। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि मिड डे मील कुक-कम-हेल्पर से बच्चों के लिए भोजन तैयार करने के अलावा कोई अन्य कार्य नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष में दो बार उनका निशुल्क मेडिकल चेकअप करवाने का भी निर्णय लिया गया है, जिसकी अनुपालना सभी जिलों में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिले के राजकीय स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को दोपहर के समय मिड डे मील उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के तहत बच्चों को मिलैट पराठा, सोया खिचड़ी, मीठा दलिया, दाल-चावल, रोटी-दाल, पुलाव, कड़ी-पकोड़ा, गुड़-रोटी, दही, सफेद चना सहित पौष्टिक व्यंजन परोसे जाते हैं। इन भोजन को तैयार करने की जिम्मेदारी मिड डे मील वर्कर कुक-कम-हेल्पर की होती है। कई राजकीय स्कूलों में छात्र संख्या घटने के कारण बच्चों को नजदीकी स्कूलों में समायोजित कर दिया जाता है, जिससे वहां कार्यरत मिड डे मील वर्कर को हटाना पड़ता है। अब नए निर्देशों से ऐसे कर्मचारियों को उसी गांव के दूसरे स्कूल में काम मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
बॉक्स
पहली से आठवीं कक्षा में 63 हजार से अधिक विद्यार्थी
जिले में पहली से आठवीं कक्षा तक 63 हजार से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें बाल वाटिका के 4670, पहली कक्षा के 5644, दूसरी के 5094, तीसरी के 5085, चौथी के 7289, पांचवीं के 8421, छठी के 8886, सातवीं के 9107 और आठवीं कक्षा के 9557 विद्यार्थी शामिल हैं, जिन्हें प्रतिदिन मिड डे मील योजना का लाभ मिल रहा है।
वर्जन
राजकीय स्कूल में छात्र संख्या कम होने पर मिड डे मील वर्कर कम हेल्पर को हटा दिया गया है तो उसे उसी गांव के दूसरे स्कूल में पद खाली है तो उसे समायोजित किया जा सकता है। मिड डे मील वर्कर कम हेल्पर पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए राजकीय स्कूलों में दोपहर का खाना बनाती है।
-- जगबीर ढांडा, खंड शिक्षा अधिकारी।
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निर्देशों के अनुसार यदि किसी राजकीय स्कूल में छात्र संख्या कम होने के चलते मिड डे मील वर्कर को हटाया गया है और उसी गांव के किसी अन्य राजकीय स्कूल में यह पद रिक्त है, तो संबंधित वर्कर को वहां समायोजित किया जा सकेगा। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि मिड डे मील कुक-कम-हेल्पर से बच्चों के लिए भोजन तैयार करने के अलावा कोई अन्य कार्य नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष में दो बार उनका निशुल्क मेडिकल चेकअप करवाने का भी निर्णय लिया गया है, जिसकी अनुपालना सभी जिलों में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिले के राजकीय स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को दोपहर के समय मिड डे मील उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के तहत बच्चों को मिलैट पराठा, सोया खिचड़ी, मीठा दलिया, दाल-चावल, रोटी-दाल, पुलाव, कड़ी-पकोड़ा, गुड़-रोटी, दही, सफेद चना सहित पौष्टिक व्यंजन परोसे जाते हैं। इन भोजन को तैयार करने की जिम्मेदारी मिड डे मील वर्कर कुक-कम-हेल्पर की होती है। कई राजकीय स्कूलों में छात्र संख्या घटने के कारण बच्चों को नजदीकी स्कूलों में समायोजित कर दिया जाता है, जिससे वहां कार्यरत मिड डे मील वर्कर को हटाना पड़ता है। अब नए निर्देशों से ऐसे कर्मचारियों को उसी गांव के दूसरे स्कूल में काम मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
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पहली से आठवीं कक्षा में 63 हजार से अधिक विद्यार्थी
जिले में पहली से आठवीं कक्षा तक 63 हजार से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें बाल वाटिका के 4670, पहली कक्षा के 5644, दूसरी के 5094, तीसरी के 5085, चौथी के 7289, पांचवीं के 8421, छठी के 8886, सातवीं के 9107 और आठवीं कक्षा के 9557 विद्यार्थी शामिल हैं, जिन्हें प्रतिदिन मिड डे मील योजना का लाभ मिल रहा है।
वर्जन
राजकीय स्कूल में छात्र संख्या कम होने पर मिड डे मील वर्कर कम हेल्पर को हटा दिया गया है तो उसे उसी गांव के दूसरे स्कूल में पद खाली है तो उसे समायोजित किया जा सकता है। मिड डे मील वर्कर कम हेल्पर पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए राजकीय स्कूलों में दोपहर का खाना बनाती है।