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प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को देता है नई दिशा : डॉ. मीनू सिंह
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फोटो 2 नरवाना। अपना संबोधन देती छात्रा। स्रोत संस्थान।
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नरवाना। केएम राजकीय महाविद्यालय, नरवाना के हिंदी विभाग एवं भारतेंदु परिषद के संयुक्त तत्वावधान में महान कथाकार और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मीनू सिंह ने की।
डॉ. मीनू सिंह ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज का वास्तविक प्रतिबिंब प्रस्तुत करता है। उनकी रचनाओं में सामाजिक समानता, मानवीय संवेदनाएं, नैतिक मूल्यों और ग्रामीण जीवन का सजीव चित्रण मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रेमचंद के साहित्य का अध्ययन कर उससे जीवन में प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. जगबीर दूहन ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य में ग्रामीण समाज की पीड़ा, संघर्ष और संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। उन्होंने किसान, मजदूर, महिला चेतना, दलित विमर्श, दहेज प्रथा और बेमेल विवाह जैसे विषयों को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाकर समाज को नई दिशा देने का कार्य किया।
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संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने भी प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता पर विचार रखे। बीए द्वितीय वर्ष की अंबिका, एमए हिंदी द्वितीय वर्ष की ऋतु, बीएससी द्वितीय वर्ष की दिव्या और स्नेहा ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन एमए हिंदी द्वितीय वर्ष की छात्रा रागिनी ने किया।
उपप्राचार्य मेजर सुरेंद्र कुमार ने हिंदी विभाग की साहित्यिक गतिविधियों की सराहना की। इस अवसर पर प्रो. कविता, शुभम सिंह, सुमन, रोहतास सहित अन्य प्राध्यापक मौजूद रहे। अंत में प्रो. सुल्तान सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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डॉ. मीनू सिंह ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज का वास्तविक प्रतिबिंब प्रस्तुत करता है। उनकी रचनाओं में सामाजिक समानता, मानवीय संवेदनाएं, नैतिक मूल्यों और ग्रामीण जीवन का सजीव चित्रण मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रेमचंद के साहित्य का अध्ययन कर उससे जीवन में प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
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हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. जगबीर दूहन ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य में ग्रामीण समाज की पीड़ा, संघर्ष और संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। उन्होंने किसान, मजदूर, महिला चेतना, दलित विमर्श, दहेज प्रथा और बेमेल विवाह जैसे विषयों को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाकर समाज को नई दिशा देने का कार्य किया।
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संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने भी प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता पर विचार रखे। बीए द्वितीय वर्ष की अंबिका, एमए हिंदी द्वितीय वर्ष की ऋतु, बीएससी द्वितीय वर्ष की दिव्या और स्नेहा ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन एमए हिंदी द्वितीय वर्ष की छात्रा रागिनी ने किया।
उपप्राचार्य मेजर सुरेंद्र कुमार ने हिंदी विभाग की साहित्यिक गतिविधियों की सराहना की। इस अवसर पर प्रो. कविता, शुभम सिंह, सुमन, रोहतास सहित अन्य प्राध्यापक मौजूद रहे। अंत में प्रो. सुल्तान सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।