जींद। रूपगढ़ गांव स्थित गुरु गोरखनाथ मंदिर में नाथ परंपरा के अनुरूप धुना चेतन का अनुष्ठान डॉ. योगी अनूप नाथ की ओर से विधिवत रूप से संपन्न कराया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत, महंत उपस्थित रहे। धुना चेतन अनुष्ठान के उपरांत मंदिर परिसर में भंडारे का भी आयोजन किया गया।
डॉ. योगी अनूप नाथ ने नाथ परंपरा के वैज्ञानिक, योगिक एवं जीवनोपयोगी पक्ष पर कहा कि नाथ संप्रदाय केवल आस्था या परंपरा तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक पूर्ण वैज्ञानिक जीवन-दर्शन है। इसमें शरीर, प्राण, मन और चेतना के संतुलन को सर्वोच्च महत्व दिया गया है।
धुना चेतन मात्र अग्नि साधना नहीं है बल्कि यह वातावरण को शुद्ध करने, नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने और साधक की चेतना को जाग्रत करने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। धुना की निरंतर जलती अग्नि मानव जीवन में जागरूकता, तप, अनुशासन और आत्मसंयम का प्रतीक मानी जाती है।
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