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Jind News: अंतिम सांस तक समाजसेवा, मृत्यु के बाद भी दे गए जीवन का संदेश...देहदान कर पेश की मिसाल
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12जेएनडी27: नौराता राम जिले के पहले व्यक्ति जिन्होंने अपनी देह को दान में दिया। स्रोत: परिजन
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जींद। सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों में लंबे समय तक सक्रिय रहे वरिष्ठ समाजसेवी व सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य नौराता राम सिंगला ने 82 वर्ष की उम्र में देहदान कर अनूठी मिसाल पेश की। वे जिले के पहले व्यक्ति बने जिन्होंने देहदान का संकल्प लेकर अपनी अंतिम इच्छा को भी समाजहित से जोड़ दिया। परिजनों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए हिंदू रीति-रिवाजों के बाद उनकी नश्वर देह गंगापुत्रा इंस्टीट्यूट को दे दी।
डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि उनके पिता सिंगला की 29 अप्रैल 2026 में मौत हुई थी। पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक रहे और गांव झांझ कलां से प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए। नौकरी के बाद भी समाजसेवा से उनका नाता नहीं टूटा। करीब 15 वर्षों तक उन्होंने मानव सेवा संघ में कैशियर के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा जन सेवा संस्थान की कार्यकारिणी में रहकर सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय योगदान दिया।
जीवन के अंतिम पड़ाव तक पिता के मन में मानव सेवा का भाव बना रहा। उनकी इच्छा थी कि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर किसी के काम आए और चिकित्सा शिक्षा व समाज के हित में उपयोगी साबित हो। परिवार ने उनकी इस इच्छा को पूरा कर उनके सेवा भाव को आगे बढ़ाया।उनके परिवार में पत्नी इंद्रावती, बेटा डॉ. राजीव गुप्ता, पुत्रवधू रेनू गुप्ता, बेटी मनीषा गोयल, दामाद सुनील गोयल और नाती-पोते हैं।
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वहीं नौराता राम से पहले भी कृष्णा कॉलोनी निवासी रामअवतार ने भी देह का दान लगभग दो साल पहले ऋषिकेश में किया था।
अंगदान को लेकर बढ़ रही जागरूकता
नौराता राम सिंगला का देहदान समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश बन गया है। उनकी सेवा भावना से प्रभावित होकर जिले में अन्य लोग भी अंगदान और देहदान के लिए आगे आ रहे हैं। जिले में अब तक 29 लोग नेत्रदान कर चुके हैं। अंगदान दिवस के अवसर पर डॉ. राजीव गुप्ता का कहना है कि देहदान और नेत्रदान जैसी पहल न केवल जरूरतमंदों के जीवन में रोशनी ला सकती है बल्कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
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डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि उनके पिता सिंगला की 29 अप्रैल 2026 में मौत हुई थी। पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक रहे और गांव झांझ कलां से प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए। नौकरी के बाद भी समाजसेवा से उनका नाता नहीं टूटा। करीब 15 वर्षों तक उन्होंने मानव सेवा संघ में कैशियर के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा जन सेवा संस्थान की कार्यकारिणी में रहकर सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय योगदान दिया।
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जीवन के अंतिम पड़ाव तक पिता के मन में मानव सेवा का भाव बना रहा। उनकी इच्छा थी कि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर किसी के काम आए और चिकित्सा शिक्षा व समाज के हित में उपयोगी साबित हो। परिवार ने उनकी इस इच्छा को पूरा कर उनके सेवा भाव को आगे बढ़ाया।उनके परिवार में पत्नी इंद्रावती, बेटा डॉ. राजीव गुप्ता, पुत्रवधू रेनू गुप्ता, बेटी मनीषा गोयल, दामाद सुनील गोयल और नाती-पोते हैं।
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वहीं नौराता राम से पहले भी कृष्णा कॉलोनी निवासी रामअवतार ने भी देह का दान लगभग दो साल पहले ऋषिकेश में किया था।
अंगदान को लेकर बढ़ रही जागरूकता
नौराता राम सिंगला का देहदान समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश बन गया है। उनकी सेवा भावना से प्रभावित होकर जिले में अन्य लोग भी अंगदान और देहदान के लिए आगे आ रहे हैं। जिले में अब तक 29 लोग नेत्रदान कर चुके हैं। अंगदान दिवस के अवसर पर डॉ. राजीव गुप्ता का कहना है कि देहदान और नेत्रदान जैसी पहल न केवल जरूरतमंदों के जीवन में रोशनी ला सकती है बल्कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।