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Jind News: अतुल्य भारत की गूंज...120 कलाकारों ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग
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17जेएनडी24: कार्यक्रम में विजेता को प्रमाण पत्र देते हुए आयोजक। संवाद
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जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय अतुल्य भारत फोक डांस फेस्टिवल के दूसरे दिन देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिला। 16 से 18 मार्च तक चलने वाले उत्सव में कलाकारों ने अपनी पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड के चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर रहे। धर्मवीर मिर्जापुर ने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भारत की अनेकता में एकता का जीवंत प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि भारत की विशाल सांस्कृतिक धरोहर, जिसमें हजारों साल पुरानी सभ्यता और अनगिनत लोक कलाएं शामिल हैं, हमें वैश्विक स्तर पर अद्वितीय बनाती हैं। ऐसे मंचों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी विरासत को संरक्षित करने की प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. कृष्ण कुमार ने कहा कि एनसीडीसी प्रयागराज की ओर से आयोजित यह उत्सव विश्वविद्यालय में हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मेजबान के तौर पर सभी मेहमान कलाकारों के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। इस फेस्टिवल ने यह सिद्ध कर दिया कि वेशभूषा और भाषा भले ही भिन्न हों लेकिन हमारी सांस्कृतिक आत्मा एक है।
कार्यक्रम में दिखी उत्तराखंड के शांत पहाड़ों की धुन
कार्यक्रम के दूसरे दिन 120 कलाकारों ने आठ शानदार प्रस्तुतियां दीं। उत्तराखंड के शांत पहाड़ों की धुन, नागालैंड की साहसिक परंपराएं, राजस्थान की रंगीली संस्कृति, मध्य प्रदेश के जनजातीय नृत्य और पंजाब के जोशीले भांगड़े ने दर्शकों को अपनी सीटों से उठने पर मजबूर कर दिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और रंग-बिरंगे परिधानों ने पूरे माहौल को उत्सव के रंगों में सराबोर कर दिया।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड के चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर रहे। धर्मवीर मिर्जापुर ने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भारत की अनेकता में एकता का जीवंत प्रमाण है।
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उन्होंने कहा कि भारत की विशाल सांस्कृतिक धरोहर, जिसमें हजारों साल पुरानी सभ्यता और अनगिनत लोक कलाएं शामिल हैं, हमें वैश्विक स्तर पर अद्वितीय बनाती हैं। ऐसे मंचों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी विरासत को संरक्षित करने की प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. कृष्ण कुमार ने कहा कि एनसीडीसी प्रयागराज की ओर से आयोजित यह उत्सव विश्वविद्यालय में हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मेजबान के तौर पर सभी मेहमान कलाकारों के लिए उत्कृष्ट व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। इस फेस्टिवल ने यह सिद्ध कर दिया कि वेशभूषा और भाषा भले ही भिन्न हों लेकिन हमारी सांस्कृतिक आत्मा एक है।
कार्यक्रम में दिखी उत्तराखंड के शांत पहाड़ों की धुन
कार्यक्रम के दूसरे दिन 120 कलाकारों ने आठ शानदार प्रस्तुतियां दीं। उत्तराखंड के शांत पहाड़ों की धुन, नागालैंड की साहसिक परंपराएं, राजस्थान की रंगीली संस्कृति, मध्य प्रदेश के जनजातीय नृत्य और पंजाब के जोशीले भांगड़े ने दर्शकों को अपनी सीटों से उठने पर मजबूर कर दिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और रंग-बिरंगे परिधानों ने पूरे माहौल को उत्सव के रंगों में सराबोर कर दिया।

17जेएनडी24: कार्यक्रम में विजेता को प्रमाण पत्र देते हुए आयोजक। संवाद

17जेएनडी24: कार्यक्रम में विजेता को प्रमाण पत्र देते हुए आयोजक। संवाद