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Jind News: दृढ़ इच्छाशक्ति को बनाया चोट का मरहम, अब सिखा रहीं योग

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 22 Mar 2026 01:23 AM IST
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Turning strong willpower into a balm for her injuries, she is now teaching yoga.
21jjrp12- बिरड निवासी डाक्टर पूजा आर्या।
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साल्हावास। क्षेत्र के गांव बिरड की डॉ. पूजा आर्या ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प के सहारे चोट का मरहम बना लिया और अब दिव्यांगों को निशुल्क योग सिखा रही हैं। पूजा वर्ष 2014 में पांचवीं मंजिल से गिर गई थीं। उनके सिर में गंभीर चोटें लगीं और रीढ़ की हड्डी तक टूट गई।
हादसे के बाद वे एक महीने तक कोमा में रहीं। याददाश्त भी लगभग चली गई थी। मन में सवाल था कि वे अब कैसे अपना जीवन जी पाएंगी।फिर डॉ. पूजा ने अनुलोम-विलोम और कपालभाति से शुरुआत की। जो हाथ चम्मच भी नहीं पकड़ पाते थे अब धीरे-धीरे खाना खाने लगीं। भाई सूर्य प्रकाश ने हर कदम पर उनका साथ दिया। माता-पिता की सेवा और प्रार्थनाएं उनका संबल बनीं।
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उन्होंने फिर बैठना सीखा, व्हीलचेयर चलाना सीखा और पतंजलि विश्वविद्यालय से पढ़ाई दोबारा शुरू की। भाई एमए साइकोलॉजी से लेकर पीएचडी तक की यात्रा में योग उनका सहारा बने।


डॉ. पूजा आर्या बताती हैं कि उन्होंने एक पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसमें योग, ध्यान और आयुर्वेद के माध्यम से दिव्यांगों के मानसिक स्वास्थ्य पर काम किया जा रहा है।




डॉ. पूजा चार विषयों में नेट जेआरएफ उत्तीर्ण
डॉ. पूजा आर्या बताती हैं कि उन्होंने प्रथम प्रयास में ही चार विषय में यूजीसी नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण कर यह साबित कर दिया कि व्यक्ति शरीर से नहीं बल्कि मन से दिव्यांग होता है। उन्होंने यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा दर्शनशास्त्र विषय में प्रथम प्रयास में ही उत्तीर्ण की है। इससे पहले वे मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और योग में प्रथम प्रयास में ही यह परीक्षा उत्तीर्ण कर चुकी हैं। जी-20 और एस-20 सम्मेलनों में उन्होंने व्हीलचेयर योग पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी।

व्हीलचेयर पर दे रही योगा की प्रस्तुति
डॉ. पूजा आर्या बताती हैं कि उन्होंने जी-20 और एस-20 सम्मेलनों में व्हीलचेयर योग पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी जिसे वैश्विक स्तर पर सराहा गया। उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग के लिए योग गुरु स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण और स्वामी चेतनश्वरानंद महाराज की आभार व्यक्त करते हुए बताया कि जीवन को उच्च उद्देश्य से जीने की प्रेरणा प्राप्त की। डॉ. पूजा की सफलता के पीछे उनकी मां सुशीला, पिता ओमप्रकाश का विशेष योगदान रहा है। उन्होंने अपने बच्चों को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उन्हें हर परिस्थिति में आत्मनिर्भर बनने का सशक्त आधार प्रदान किया। आज जब उनकी बेटी देशभर में अपनी सफलता का परचम लहरा रही है।
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