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Jind News: अहिरका में महिला किसानों को प्राकृतिक खेती का दिया प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 08 Mar 2026 02:07 AM IST
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07जेएनडी06: प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण शिविर के समापन पर खेल व शिक्षा में नाम कमाने वाले लड
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जींद। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में अहिरका गांव में प्राकृतिक खेती विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण महिला किसानों को दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें प्राकृतिक खेती की तकनीक, सिद्धांत और इसके लाभों के बारे में जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम में हमेटी के निदेशक डॉ. कर्म चंद ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। डॉ. कर्मचंद ने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसानों की खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।
उन्होंने कहा कि फसलों में रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से खाद्यान्न जहरीले होते जा रहे हैं जिसके कारण मनुष्यों और पशुओं में कैंसर, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं। इससे बचने के लिए किसानों, विशेषकर महिला किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए आगे आना चाहिए।
कृषि विज्ञान केंद्र पांडू पिंडारा की सहायक वैज्ञानिक डॉ. प्रीति मलिक ने महिला किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, पोषण वाटिका, जैविक आदानों के उपयोग तथा महिला सशक्तिकरण के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी। डॉ. प्रीति मलिक ने परिवार की जरूरतों के लिए पोषण वाटिका बनाकर प्राकृतिक तरीके से फल और सब्जियों का उत्पादन करने पर जोर दिया।
इस अवसर पर गांव की तीन लड़कियों वंशिका, पूजा और निशा को खेल और शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा दो महिला किसानों को भी सम्मानित किया गया।
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कार्यक्रम में हमेटी के निदेशक डॉ. कर्म चंद ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। डॉ. कर्मचंद ने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसानों की खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।
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उन्होंने कहा कि फसलों में रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से खाद्यान्न जहरीले होते जा रहे हैं जिसके कारण मनुष्यों और पशुओं में कैंसर, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं। इससे बचने के लिए किसानों, विशेषकर महिला किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए आगे आना चाहिए।
कृषि विज्ञान केंद्र पांडू पिंडारा की सहायक वैज्ञानिक डॉ. प्रीति मलिक ने महिला किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, पोषण वाटिका, जैविक आदानों के उपयोग तथा महिला सशक्तिकरण के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी। डॉ. प्रीति मलिक ने परिवार की जरूरतों के लिए पोषण वाटिका बनाकर प्राकृतिक तरीके से फल और सब्जियों का उत्पादन करने पर जोर दिया।
इस अवसर पर गांव की तीन लड़कियों वंशिका, पूजा और निशा को खेल और शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा दो महिला किसानों को भी सम्मानित किया गया।