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Kaithal News: प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण पर प्रशासन सख्त
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 03 Apr 2026 01:54 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। उपायुक्त अपराजिता ने कहा कि सरकार द्वारा ज्ञान भारतम् मिशन के तहत प्राचीन, ऐतिहासिक, धार्मिक एवं अन्य प्रकार की पांडुलिपियों और अभिलेखागारों का व्यापक सर्वे करवाया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य देश की प्राचीन पांडुलिपि विरासत का संरक्षण और सुव्यवस्थित दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करना है।
उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि किसी के पास प्राचीन पांडुलिपियां या अभिलेख उपलब्ध हैं, तो इसकी सूचना प्रशासन को दें, ताकि उन्हें संरक्षित किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वे कार्य को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए।
डीसी अपराजिता राज्य स्तर पर मुख्य सचिव द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक के बाद जिला अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि प्राचीन ऐतिहासिक एवं धार्मिक अभिलेख पुरातत्व की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इनके माध्यम से उस समय की सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों की सटीक जानकारी प्राप्त होती है। इससे इतिहास को तथ्यात्मक रूप से समझने में भी सहायता मिलती है।
उन्होंने जिले में संचालित पुस्तकालयों, विश्वविद्यालयों, संस्कृत पाठशालाओं तथा अन्य संबंधित संस्थानों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस विषय में जागरूकता बढ़ाएं और लोगों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं। साथ ही, पुरातन वस्तुओं के संरक्षण में कार्यरत संगठनों के प्रतिनिधियों से भी समन्वय स्थापित करें।
डीसी ने कहा कि फील्ड सर्वे, भौतिक सत्यापन और जियो टैगिंग का कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाए, ताकि डाटा की प्रमाणिकता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के पास ऐसे अभिलेख हैं, वे उन्हीं के पास सुरक्षित रहेंगे।
सरकार केवल उनका रिकॉर्ड तैयार करेगी और संरक्षण में सहयोग प्रदान करेगी। यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपने अभिलेख प्रशासन को सौंपना चाहता है, तो उन्हें पुरातत्व विभाग द्वारा सुरक्षित रखा जाएगा। इस अवसर पर जिला उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. मनोज भाम्भू और महिला एवं बाल विकास अधिकारी गुरजीत कौर भी उपस्थित रहे।
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कैथल। उपायुक्त अपराजिता ने कहा कि सरकार द्वारा ज्ञान भारतम् मिशन के तहत प्राचीन, ऐतिहासिक, धार्मिक एवं अन्य प्रकार की पांडुलिपियों और अभिलेखागारों का व्यापक सर्वे करवाया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य देश की प्राचीन पांडुलिपि विरासत का संरक्षण और सुव्यवस्थित दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करना है।
उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि किसी के पास प्राचीन पांडुलिपियां या अभिलेख उपलब्ध हैं, तो इसकी सूचना प्रशासन को दें, ताकि उन्हें संरक्षित किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वे कार्य को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए।
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डीसी अपराजिता राज्य स्तर पर मुख्य सचिव द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक के बाद जिला अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि प्राचीन ऐतिहासिक एवं धार्मिक अभिलेख पुरातत्व की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इनके माध्यम से उस समय की सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों की सटीक जानकारी प्राप्त होती है। इससे इतिहास को तथ्यात्मक रूप से समझने में भी सहायता मिलती है।
उन्होंने जिले में संचालित पुस्तकालयों, विश्वविद्यालयों, संस्कृत पाठशालाओं तथा अन्य संबंधित संस्थानों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस विषय में जागरूकता बढ़ाएं और लोगों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं। साथ ही, पुरातन वस्तुओं के संरक्षण में कार्यरत संगठनों के प्रतिनिधियों से भी समन्वय स्थापित करें।
डीसी ने कहा कि फील्ड सर्वे, भौतिक सत्यापन और जियो टैगिंग का कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाए, ताकि डाटा की प्रमाणिकता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के पास ऐसे अभिलेख हैं, वे उन्हीं के पास सुरक्षित रहेंगे।
सरकार केवल उनका रिकॉर्ड तैयार करेगी और संरक्षण में सहयोग प्रदान करेगी। यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपने अभिलेख प्रशासन को सौंपना चाहता है, तो उन्हें पुरातत्व विभाग द्वारा सुरक्षित रखा जाएगा। इस अवसर पर जिला उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. मनोज भाम्भू और महिला एवं बाल विकास अधिकारी गुरजीत कौर भी उपस्थित रहे।