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Kaithal News: दो दिन से रजिस्ट्री ठप होने से 80 करोड़ रुपये का राजस्व अटका
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 03 Apr 2026 02:01 AM IST
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कैथल। जिले में नए कलेक्टर रेट लागू होने के बाद प्रॉपर्टी बाजार पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। साइट पर नए रेट अपलोड होने के बावजूद लगातार दूसरे दिन भी तहसीलों में रजिस्ट्रियों का काम पूरी तरह ठप रहा, जिससे राजस्व विभाग को करीब 80 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
कैथल तहसील में जहां सामान्य दिनों में रोजाना 30 से अधिक रजिस्ट्री होती थीं, वहीं पिछले दो दिनों में एक भी रजिस्ट्री नहीं हो पाई।
प्रॉपर्टी डीलरों का कहना है कि अचानक रेट बढ़ने से लोगों का बजट बिगड़ गया है और वे फिलहाल स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, रजिस्ट्रियों के बंद रहने से दो दिनों में करीब 80 करोड़ रुपये का संभावित राजस्व सरकार को नहीं मिल पाया है।
अधिकारियों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है। वहीं, तहसील परिसर में भी सन्नाटा पसरा रहा। प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों ने मांग की है कि सरकार रेट बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करे या कुछ समय के लिए राहत दे, ताकि बाजार में फिर से रौनक लौट सके। संवाद
नए कलेक्टर रेट सरकार की नीति के तहत लागू किए गए हैं। तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री के टोकन लगाए जा रहे हैं। कर्मचारी भी रजिस्ट्री काउंटर पर ड्यूटी दे रहे हैं। उनकी ओर से किसी भी तरह की परेशानी नहीं है। लोग अपने बजट के हिसाब से रजिस्ट्री के लिए आएंगे।
- रविंद्र, तहसीलदार
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कैथल तहसील में जहां सामान्य दिनों में रोजाना 30 से अधिक रजिस्ट्री होती थीं, वहीं पिछले दो दिनों में एक भी रजिस्ट्री नहीं हो पाई।
प्रॉपर्टी डीलरों का कहना है कि अचानक रेट बढ़ने से लोगों का बजट बिगड़ गया है और वे फिलहाल स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, रजिस्ट्रियों के बंद रहने से दो दिनों में करीब 80 करोड़ रुपये का संभावित राजस्व सरकार को नहीं मिल पाया है।
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अधिकारियों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है। वहीं, तहसील परिसर में भी सन्नाटा पसरा रहा। प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों ने मांग की है कि सरकार रेट बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करे या कुछ समय के लिए राहत दे, ताकि बाजार में फिर से रौनक लौट सके। संवाद
नए कलेक्टर रेट सरकार की नीति के तहत लागू किए गए हैं। तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री के टोकन लगाए जा रहे हैं। कर्मचारी भी रजिस्ट्री काउंटर पर ड्यूटी दे रहे हैं। उनकी ओर से किसी भी तरह की परेशानी नहीं है। लोग अपने बजट के हिसाब से रजिस्ट्री के लिए आएंगे।
- रविंद्र, तहसीलदार