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Kaithal News: चैत्र पूर्णिमा कल, पूजन-दान से अक्षय पुण्य का महत्व
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 01 Apr 2026 01:48 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। चैत्र पूर्णिमा का पावन व्रत कल जिलेभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान से व्रत, पूजन और दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसको लेकर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।
रुद्री मंदिर के पुजारी मुनींद्र मिश्रा ने बताया कि चैत्र पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल स्नान कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विधिवत पूजन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दिन व्रत रखने से मन की शुद्धि होती है और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। उन्होंने दान के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि अन्न, जल, वस्त्र, गुड़, चावल, फल तथा जरूरतमंदों को धन का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। विशेष रूप से गरीबों की सहायता करने से कई गुना फल प्राप्त होता है।
हनुमान वाटिका के पुजारी पंडित विशाल ने व्रत के दौरान आहार संबंधी नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि व्रत में सात्विक भोजन का ही सेवन करना चाहिए। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन तथा सूखे मेवे उपयुक्त माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि व्रत के दौरान साधारण नमक के स्थान पर सेंधा नमक का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि व्रत के दौरान अनाज, मांसाहार, लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए तथा मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहने का प्रयास करना चाहिए।
उनके अनुसार, व्रत केवल भोजन त्याग नहीं, बल्कि आत्मसंयम और भक्ति का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, तुलसी दल, फल व मिठाई अर्पित करना शुभ माना जाता है, जबकि माता लक्ष्मी को खीर, कमल पुष्प और सफेद मिठाई अर्पित करने की परंपरा है। संध्या समय चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व बताया गया है, जिससे मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
ऐसी मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन किया गया दान-पुण्य अक्षय फल प्रदान करता है और व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।
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कैथल। चैत्र पूर्णिमा का पावन व्रत कल जिलेभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान से व्रत, पूजन और दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसको लेकर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।
रुद्री मंदिर के पुजारी मुनींद्र मिश्रा ने बताया कि चैत्र पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल स्नान कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विधिवत पूजन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दिन व्रत रखने से मन की शुद्धि होती है और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। उन्होंने दान के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि अन्न, जल, वस्त्र, गुड़, चावल, फल तथा जरूरतमंदों को धन का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। विशेष रूप से गरीबों की सहायता करने से कई गुना फल प्राप्त होता है।
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हनुमान वाटिका के पुजारी पंडित विशाल ने व्रत के दौरान आहार संबंधी नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि व्रत में सात्विक भोजन का ही सेवन करना चाहिए। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन तथा सूखे मेवे उपयुक्त माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि व्रत के दौरान साधारण नमक के स्थान पर सेंधा नमक का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि व्रत के दौरान अनाज, मांसाहार, लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए तथा मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहने का प्रयास करना चाहिए।
उनके अनुसार, व्रत केवल भोजन त्याग नहीं, बल्कि आत्मसंयम और भक्ति का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, तुलसी दल, फल व मिठाई अर्पित करना शुभ माना जाता है, जबकि माता लक्ष्मी को खीर, कमल पुष्प और सफेद मिठाई अर्पित करने की परंपरा है। संध्या समय चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व बताया गया है, जिससे मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
ऐसी मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन किया गया दान-पुण्य अक्षय फल प्रदान करता है और व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।