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Kaithal News: खेल विभाग की आपत्ति के बावजूद पीडब्ल्यूडी ने ठेकेदार को कर दिया भुगतान
Mon, 27 Jul 2026 03:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 27 Jul 2026 03:07 AM IST
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गांव भाणा खेल स्टेडियम में छत पर उगा पौधा व छत टपकने से सीलन युक्त दीवार।
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कैथल। खेल विभाग के अधिकारियों ने पीडब्ल्यूडी को 7 खेल स्टेडियमों की मरम्मत के कार्यों के लिए दी गई एक करोड़ की राशि में गड़बड़ी का आरोप लगाया हैं। खेल विभाग के अधिकारियों के अनुसार पीडब्ल्यूडी ने लगभग पूरी राशि खर्च कर दी है, लेकिन धरातल पर दो से तीन लाख के काम ही हुए हैं।
खेल विभाग ने इस मामले में पीडब्ल्यूडी को पत्र लिख ठेकेदारों का भुगतान पहले खेल विभाग से एनओसी लेने के बाद करने के लिए पत्र भेजा था लेकिन पीडब्ल्यूडी ने इस मांग को पत्र का जवाब भेजकर खारिज कर दिया था। पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने पत्र के माध्यम से बताया था कि नियमों के अनुसार वे भुगतान नहीं रोक सकते हैं। वे क्लाइंट यानि खेल विभाग को सिर्फ हर महीने यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट दे सकते हैं, यानि कितनी राशि खर्च हो चुकी है इसकी जानकारी दे सकते हैं। यही कारण है कि खेल विभाग एक करोड़ रुपये देकर और धरातल पर काम नहीं होने के कारण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
बॉक्स
किस स्टेडियम पर कितनी राशि होनी थी खर्च...
खेल स्टेडियम राशि
इंटरनेशनल हॉकी अकादमी हाबड़ी 7 लाख 11 हजार 535
राजीव गांधी खेल स्टेडियम क्योड़क 21 लाख 10 हजार 824
राजीव गांधी खेल स्टेडियम फतेहपुर 13 लाख 75 हजार 356
राजीव गांधी खेल स्टेडियम भाणा 21 लाख 11 हजार 547
राजीव गांधी खेल स्टेडियम मलिकपुर 18 लाख 70 हजार 12
राजीव गांधी खेल स्टेडियम बात्ता 15 लाख 3 हजार 574
चौ. छोटू राम इंडोर स्टेडियम कैथल 4 लाख 92 हजार 989
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कई स्टेडियम में अधूरे हैं कार्य
सात स्टेडियम में चौ. छोटू राम इंडोर स्टेडियम में भी मरम्मत के कार्य होने थे और जिला खेल अधिकारी का कार्यालय भी यहीं हैं। इंडोर स्टेडियम के ज्यादातर पंखे खराब पड़े हैं शौचालय भी बदहाल हैं, शौचालय के गेट भी टूटा पड़ा है। जब एस्टीमेट बनाए जा रहे थे तब खेल विभाग ने इन चीजों को शामिल करवाया था, लेकिन जब धरातल पर कार्य हुए तो स्टेडियम के दोनों साइड बनी सीढि़यों के सिर्फ गेट ही लगे सके और रंग-रोगन हो पाया है। वहां कार्यरत प्रशिक्षकों के अनुसार रंग-रोगन भी बहुत ही घटिया क्वालिटी का है जो कुछ महीने में ही उतरने लगा है। विभाग ने यहां करीब 5 लाख के काम करवाएं हैं, लेकिन प्रशिक्षकों का कहना है कि यहां सिर्फ एक से डेढ़ लाख रुपये का काम हुआ है।
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अन्य 6 स्टेडियम का भी यही हाल
कैथल इंडोर स्टेडियम के अलावा जिन स्टेडियम पर मोटी राशि खर्च की गई है उनमें गांव बात्ता, भाणा और गांव क्योड़क शामिल है। यहां भी धरातल पर जो उम्मीद से कम काम हुए हैं। गांव बात्ता में तैनात प्रशिक्षक व खिलाड़ियों का कहना है कि यहां सिर्फ 2 से 3 लाख के काम हुए हैं और वो भी कईं बार शिकायतों के बाद किए गए हैं। गांव भाणा के खेल स्टेडियम की खिलाड़ी पायल, काजल, नैंसी व शिवानी का कहना है कि छत की रिपेयर और दरवाजे खिड़कियों का मुख्य काम था, लेकिन छत पर अब भी घास है और टंकी का पानी अब भी साइडों से रीस रहा है। जो दरवाजे लगाए हैं वे बंद नहीं हो रहे हैं और जाली के दरवाजे भी नहीं लगाए गए हैं। अंदर हाल में पत्थर टूटा पड़ा है और सीढि़यों की रिपेयर नहीं हुई और ट्रेक के साइड में ईंट भी खुद खिलाड़ियों ने लगाई हैं। दावा है कि पेंट भी जो किया है वो हाथ से ही उतर रहा है और कुछ महीने में ही खराब हो चुका है। यही हाल गांव क्योड़क, फतेहपुर व अन्य स्टेडियम का है।
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दो एक्सईएन के द्वारा करवाए गए हैं कार्य
एक्सईएन पीडब्ल्यूडी कैथल सुरेंद्र कुमार का कहना है कि उनके पास सिर्फ कुछ स्टेडियम थे और उनकी कुछ लाख के ही काम थे जो करवा दिए गए हैं। गड़बड़ी कहीं नहीं हुई है और नियमानुसार ही काम करवाए गए हैं। वहीं पीडब्ल्यूडी पूंडरी व गुहला के एक्सईएन वरुण कंसल का कहना है कि ज्यादातर स्टेडियम में काम पूरे हो चुके हैं और जो थोड़ा बहुत बचे हैं वो जल्द ही पूरे करवा दिए जाएंगे। विभाग को जो राशि मिली थी उसके अनुसार ही काम करवाए गए हैं।
वर्जन...
जो कार्य हुए हैं उनको लेकर बहुत शिकायतें हैं जिसके बाद विभाग को भुगतान नहीं करने को लिखा गया था, लेकिन पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि वे नियमानुसार ही भुगतान कर रहे हैं। विभाग तो यही चाहता है कि जो रुपये आए हैं वे धरातल पर खर्च हों, ताकि खिलाड़ियों को इसका लाभ मिल सके।
राजरानी, जिला खेल अधिकारी, खेल विभाग, कैथल।
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खेल विभाग ने इस मामले में पीडब्ल्यूडी को पत्र लिख ठेकेदारों का भुगतान पहले खेल विभाग से एनओसी लेने के बाद करने के लिए पत्र भेजा था लेकिन पीडब्ल्यूडी ने इस मांग को पत्र का जवाब भेजकर खारिज कर दिया था। पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने पत्र के माध्यम से बताया था कि नियमों के अनुसार वे भुगतान नहीं रोक सकते हैं। वे क्लाइंट यानि खेल विभाग को सिर्फ हर महीने यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट दे सकते हैं, यानि कितनी राशि खर्च हो चुकी है इसकी जानकारी दे सकते हैं। यही कारण है कि खेल विभाग एक करोड़ रुपये देकर और धरातल पर काम नहीं होने के कारण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
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किस स्टेडियम पर कितनी राशि होनी थी खर्च...
खेल स्टेडियम राशि
इंटरनेशनल हॉकी अकादमी हाबड़ी 7 लाख 11 हजार 535
राजीव गांधी खेल स्टेडियम क्योड़क 21 लाख 10 हजार 824
राजीव गांधी खेल स्टेडियम फतेहपुर 13 लाख 75 हजार 356
राजीव गांधी खेल स्टेडियम भाणा 21 लाख 11 हजार 547
राजीव गांधी खेल स्टेडियम मलिकपुर 18 लाख 70 हजार 12
राजीव गांधी खेल स्टेडियम बात्ता 15 लाख 3 हजार 574
चौ. छोटू राम इंडोर स्टेडियम कैथल 4 लाख 92 हजार 989
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कई स्टेडियम में अधूरे हैं कार्य
सात स्टेडियम में चौ. छोटू राम इंडोर स्टेडियम में भी मरम्मत के कार्य होने थे और जिला खेल अधिकारी का कार्यालय भी यहीं हैं। इंडोर स्टेडियम के ज्यादातर पंखे खराब पड़े हैं शौचालय भी बदहाल हैं, शौचालय के गेट भी टूटा पड़ा है। जब एस्टीमेट बनाए जा रहे थे तब खेल विभाग ने इन चीजों को शामिल करवाया था, लेकिन जब धरातल पर कार्य हुए तो स्टेडियम के दोनों साइड बनी सीढि़यों के सिर्फ गेट ही लगे सके और रंग-रोगन हो पाया है। वहां कार्यरत प्रशिक्षकों के अनुसार रंग-रोगन भी बहुत ही घटिया क्वालिटी का है जो कुछ महीने में ही उतरने लगा है। विभाग ने यहां करीब 5 लाख के काम करवाएं हैं, लेकिन प्रशिक्षकों का कहना है कि यहां सिर्फ एक से डेढ़ लाख रुपये का काम हुआ है।
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अन्य 6 स्टेडियम का भी यही हाल
कैथल इंडोर स्टेडियम के अलावा जिन स्टेडियम पर मोटी राशि खर्च की गई है उनमें गांव बात्ता, भाणा और गांव क्योड़क शामिल है। यहां भी धरातल पर जो उम्मीद से कम काम हुए हैं। गांव बात्ता में तैनात प्रशिक्षक व खिलाड़ियों का कहना है कि यहां सिर्फ 2 से 3 लाख के काम हुए हैं और वो भी कईं बार शिकायतों के बाद किए गए हैं। गांव भाणा के खेल स्टेडियम की खिलाड़ी पायल, काजल, नैंसी व शिवानी का कहना है कि छत की रिपेयर और दरवाजे खिड़कियों का मुख्य काम था, लेकिन छत पर अब भी घास है और टंकी का पानी अब भी साइडों से रीस रहा है। जो दरवाजे लगाए हैं वे बंद नहीं हो रहे हैं और जाली के दरवाजे भी नहीं लगाए गए हैं। अंदर हाल में पत्थर टूटा पड़ा है और सीढि़यों की रिपेयर नहीं हुई और ट्रेक के साइड में ईंट भी खुद खिलाड़ियों ने लगाई हैं। दावा है कि पेंट भी जो किया है वो हाथ से ही उतर रहा है और कुछ महीने में ही खराब हो चुका है। यही हाल गांव क्योड़क, फतेहपुर व अन्य स्टेडियम का है।
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दो एक्सईएन के द्वारा करवाए गए हैं कार्य
एक्सईएन पीडब्ल्यूडी कैथल सुरेंद्र कुमार का कहना है कि उनके पास सिर्फ कुछ स्टेडियम थे और उनकी कुछ लाख के ही काम थे जो करवा दिए गए हैं। गड़बड़ी कहीं नहीं हुई है और नियमानुसार ही काम करवाए गए हैं। वहीं पीडब्ल्यूडी पूंडरी व गुहला के एक्सईएन वरुण कंसल का कहना है कि ज्यादातर स्टेडियम में काम पूरे हो चुके हैं और जो थोड़ा बहुत बचे हैं वो जल्द ही पूरे करवा दिए जाएंगे। विभाग को जो राशि मिली थी उसके अनुसार ही काम करवाए गए हैं।
वर्जन...
जो कार्य हुए हैं उनको लेकर बहुत शिकायतें हैं जिसके बाद विभाग को भुगतान नहीं करने को लिखा गया था, लेकिन पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि वे नियमानुसार ही भुगतान कर रहे हैं। विभाग तो यही चाहता है कि जो रुपये आए हैं वे धरातल पर खर्च हों, ताकि खिलाड़ियों को इसका लाभ मिल सके।
राजरानी, जिला खेल अधिकारी, खेल विभाग, कैथल।

गांव भाणा खेल स्टेडियम में छत पर उगा पौधा व छत टपकने से सीलन युक्त दीवार।

गांव भाणा खेल स्टेडियम में छत पर उगा पौधा व छत टपकने से सीलन युक्त दीवार।