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Kaithal News: मोबाइल का अधिक प्रयोग बन रहा तनाव का कारण
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 04 May 2026 03:57 AM IST
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कैथल। मोबाइल का अधिक प्रयोग और नींद की कमी युवाओं में तनाव का कारण बन रही है। इससे जिले में मानसिक रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना 30 से अधिक मरीज मनोरोग से जुड़ी समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें घबराहट, बेचैनी, तनाव और अवसाद जैसे लक्षण प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं।
चिंताजनक बात यह है कि अब केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा वर्ग भी तेजी से इस समस्या की चपेट में आ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार आधुनिक जीवनशैली, बढ़ता काम का दबाव और सामाजिक बदलाव इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं। समय पर उपचार न मिलने की स्थिति में ये समस्याएं गंभीर मानसिक बीमारियों का रूप ले सकती हैं।
डॉ. विनय कुमार ने बताया कि नींद की कमी: देर रात तक मोबाइल और स्क्रीन के इस्तेमाल से नींद पूरी नहीं हो पा रही, जिससे मानसिक संतुलन प्रभावित होता है। इसके अलावा असंतुलित खान-पान, जंक फूड और अनियमित भोजन की आदत शरीर और दिमाग दोनों पर नकारात्मक असर डाल रही है। शारीरिक गतिविधि में कमी से तनाव और चिंता बढ़ रही है।काम और पढ़ाई के दबाव से युवाओं में तनाव तेजी से बढ़ रहा है।
इसके अलावा परिवार और समाज से कम जुड़ाव भी युवाओं के अकेलेपन को बढ़ा रहा है। डॉ. विनय कुमार ने बताया कि मानसिक रोग भी अन्य बीमारियों की तरह ही सामान्य हैं और इनका इलाज संभव है।
जागरूकता और सही समय पर उपचार से स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है। समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। संवाद
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चिंताजनक बात यह है कि अब केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा वर्ग भी तेजी से इस समस्या की चपेट में आ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार आधुनिक जीवनशैली, बढ़ता काम का दबाव और सामाजिक बदलाव इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं। समय पर उपचार न मिलने की स्थिति में ये समस्याएं गंभीर मानसिक बीमारियों का रूप ले सकती हैं।
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डॉ. विनय कुमार ने बताया कि नींद की कमी: देर रात तक मोबाइल और स्क्रीन के इस्तेमाल से नींद पूरी नहीं हो पा रही, जिससे मानसिक संतुलन प्रभावित होता है। इसके अलावा असंतुलित खान-पान, जंक फूड और अनियमित भोजन की आदत शरीर और दिमाग दोनों पर नकारात्मक असर डाल रही है। शारीरिक गतिविधि में कमी से तनाव और चिंता बढ़ रही है।काम और पढ़ाई के दबाव से युवाओं में तनाव तेजी से बढ़ रहा है।
इसके अलावा परिवार और समाज से कम जुड़ाव भी युवाओं के अकेलेपन को बढ़ा रहा है। डॉ. विनय कुमार ने बताया कि मानसिक रोग भी अन्य बीमारियों की तरह ही सामान्य हैं और इनका इलाज संभव है।
जागरूकता और सही समय पर उपचार से स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है। समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। संवाद
