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मातृ दिवस विशेष : मां की प्रेरणा और विश्वास ने दिलाई सफलता
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 04 May 2026 03:59 AM IST
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मां के साथ बॉक्सर रजनी। स्वयं
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कैथल। खेल के मैदान में मुक्के भले ही खिलाड़ी लगाते हैं, लेकिन उनकी ताकत मां की प्रेरणा और विश्वास से आती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुके कैथल के मुक्केबाजों ने जीवन में मां का योगदान बेहद अहम रहा है। उन्होंने बताया कि कठिन दौर, हार और निराशा के समय मां ही वह सहारा बनी, जिसने उन्हें टूटने नहीं दिया और आगे बढ़ने का हौसला दिया। सभी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक अपने नाम कर चुके हैं। इनकी सफलता के पीछे कड़ी मेहनत के साथ उनकी माताओं का त्याग, विश्वास, प्रेरणा और आशीर्वाद सबसे बड़ी ताकत रही है।
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मैं पांच वर्षों से मुक्केबाजी की प्रतियोगिताओं में भाग ले रही हूं। अब तक कई पदक जीत चुकी हूं जिनमें स्वर्ण पदक भी शामिल हैं। वर्ष 2023 में जब मैं पहली बार इंदौर में राष्ट्रीय स्तर की मुक्केबाजी प्रतियोगिता में कैथल से चुनी गई, लेकिन वहां हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद मैंने मुक्केबाजी छोड़ देने का फैसला लिया, लेकिन मेरी मां ने मुझे समझाया कि हार जीत तो खेल का हिस्सा है, मन छोटा मत कर। उनकी इस बात से मुझे और बेहतर करने की प्रेरणा मिली और पदक भी जीता। यह सब मां के भरोसे और हौसले की वजह है।
जन्नत, मुक्केबाज, निवासी कुलतारण
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लड़की होने के कारण कई बार लोगों ने कहा कि मुक्केबाजी का खेल मेरे लिए नहीं है, लेकिन मां ने हमेशा मेरा साथ दिया। उन्होंने कभी मुझे घर में नहीं रोका और न ही पढ़ाई छोड़ने दी। जब मन उदास होता था, तो मां ही मुझे संभालती थीं। उनकी प्रेरणा से ही मैं वापसी कर पाई और स्वर्ण पदक जीत सकी। मेरे लिए मां ही मेरी सबसे बड़ी कोच हैं।
रजनी, बाक्सर निवासी कुलतारण
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मुक्केबाजी की स्पर्धाओं में भाग लेने के दाैरान शुरुआती दिनों में आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की चुनौतियां थीं। मां ने हर मुश्किल में मेरा साथ दिया। जब हार मिलती थी तो वही मुझे हिम्मत देती थीं और कहती थीं कि एक दिन तुम जरूर जीतोगे। उनकी मेहनत और त्याग को देखकर ही मैंने कभी हार नहीं मानी और आज मैंने आज जो सफलता पाई है उसके पीछे मेरी मां का हाथ है। मेरी हर जीत मां को समर्पित है।
- दीक्षांत, बाक्सर निवासी जसवंती
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मां ने हमेशा अनुशासन और मेहनत का महत्व सिखाया। जब मैं चोटिल हुआ और खेल छोड़ने का मन किया, तब मां ने मुझे संभाला और फिर से जीत की तरफ कदम बढ़ाने के लिए एक और कोशिश करने के लिए कहा। उन्होंने मुझे सिखाया कि असफलता अंत नहीं होती। जिस दिन मेरी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता होती है तो वो केवल मेरी ही नहीं बल्कि मेरी मां के विश्वास की भी परीक्षा की घड़ी होती है। जब तक प्रतियोगिता खत्म नहीं होती और मेरे जीत की खबर उन्हें नहीं मिल जाती है वह ईश्वर से प्रार्थना करती रहती है।
- आशीष ढांडा, बाक्सर निवासी कुलतारण
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जन्नत, मुक्केबाज, निवासी कुलतारण
लड़की होने के कारण कई बार लोगों ने कहा कि मुक्केबाजी का खेल मेरे लिए नहीं है, लेकिन मां ने हमेशा मेरा साथ दिया। उन्होंने कभी मुझे घर में नहीं रोका और न ही पढ़ाई छोड़ने दी। जब मन उदास होता था, तो मां ही मुझे संभालती थीं। उनकी प्रेरणा से ही मैं वापसी कर पाई और स्वर्ण पदक जीत सकी। मेरे लिए मां ही मेरी सबसे बड़ी कोच हैं।
रजनी, बाक्सर निवासी कुलतारण
मुक्केबाजी की स्पर्धाओं में भाग लेने के दाैरान शुरुआती दिनों में आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की चुनौतियां थीं। मां ने हर मुश्किल में मेरा साथ दिया। जब हार मिलती थी तो वही मुझे हिम्मत देती थीं और कहती थीं कि एक दिन तुम जरूर जीतोगे। उनकी मेहनत और त्याग को देखकर ही मैंने कभी हार नहीं मानी और आज मैंने आज जो सफलता पाई है उसके पीछे मेरी मां का हाथ है। मेरी हर जीत मां को समर्पित है।
- दीक्षांत, बाक्सर निवासी जसवंती
मां ने हमेशा अनुशासन और मेहनत का महत्व सिखाया। जब मैं चोटिल हुआ और खेल छोड़ने का मन किया, तब मां ने मुझे संभाला और फिर से जीत की तरफ कदम बढ़ाने के लिए एक और कोशिश करने के लिए कहा। उन्होंने मुझे सिखाया कि असफलता अंत नहीं होती। जिस दिन मेरी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता होती है तो वो केवल मेरी ही नहीं बल्कि मेरी मां के विश्वास की भी परीक्षा की घड़ी होती है। जब तक प्रतियोगिता खत्म नहीं होती और मेरे जीत की खबर उन्हें नहीं मिल जाती है वह ईश्वर से प्रार्थना करती रहती है।
- आशीष ढांडा, बाक्सर निवासी कुलतारण

मां के साथ बॉक्सर रजनी। स्वयं

मां के साथ बॉक्सर रजनी। स्वयं

मां के साथ बॉक्सर रजनी। स्वयं
