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Kaithal News: किसान की बेटी लासू ने मुक्केबाजी के दम पर हासिल की रेलवे में नौकरी
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मुक्केबाज लासू यादव
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कैथल। जिले की युवा मुक्केबाज लासू यादव ने खेल, शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में संतुलन बनाकर प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली लासू ने कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर मुक्केबाजी में पहचान बनाई और अब भारतीय रेल में ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (टीटीई) के रूप में सेवाएं दे रही हैं। खिलाड़ी का कहना है कि उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतकर भारत का नाम रोशन करना है। उनके पिता रमेश कुमार किसान हैं। साधारण परिवार में वह पली-बढ़ीं है। 12 वर्ष की आयु में मुक्केबाजी की शुरुआत की। लगातार मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने खेल में अपनी अलग पहचान बनाई। वर्तमान में वह 21 वर्ष की हैं और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमए अंग्रेजी अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं।
खिलाड़ी ने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ लासू छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भारतीय रेल में टीटीई के पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि नौकरी, शिक्षा और खेल तीनों जिम्मेदारियों को एक साथ निभाना आसान नहीं है लेकिन उन्होंने समय प्रबंधन और अनुशासित दिनचर्या के बल पर इस चुनौती को सफलतापूर्वक स्वीकार किया है। लासू का प्रशिक्षण कैथल के आरकेएसडी कॉलेज बॉक्सिंग अकादमी में हुआ है। अब भी वह अपनी तकनीक, फिटनेस और रिंग रणनीति को लगातार निखार रही हैं। उनकी दिनचर्या में प्रतिदिन सुबह तीन घंटे और शाम तीन घंटे का अभ्यास शामिल है जिसमें फिटनेस ट्रेनिंग, स्पैरिंग और तकनीकी अभ्यास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
खेलो इंडिया यूथ गेम्स में जीत चुकीं स्वर्ण पदक
लासू यादव ने बताया कि वह खेलो इंडिया यूथ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। यूथ महिला विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप (स्पेन) में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए क्वार्टर फाइनल तक सफर तय कर चुकी हैं। राष्ट्रीय स्तर (जूनियर नेशनल) पर रजत पदक भी जीत चुकी हैं। लासू बताती हैं कि शुरुआत में कई तरह की चुनौतियां सामने आईं लेकिन परिवार और कोचों के सहयोग ने उनका आत्मविश्वास बनाए रखा। एक महिला खिलाड़ी होने के नाते सामाजिक बाधाओं का भी सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। उनका कहना है कि खेल केवल शारीरिक मजबूती ही नहीं देता, बल्कि मानसिक आत्मविश्वास और अनुशासन भी सिखाता है।
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खिलाड़ी ने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ लासू छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भारतीय रेल में टीटीई के पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि नौकरी, शिक्षा और खेल तीनों जिम्मेदारियों को एक साथ निभाना आसान नहीं है लेकिन उन्होंने समय प्रबंधन और अनुशासित दिनचर्या के बल पर इस चुनौती को सफलतापूर्वक स्वीकार किया है। लासू का प्रशिक्षण कैथल के आरकेएसडी कॉलेज बॉक्सिंग अकादमी में हुआ है। अब भी वह अपनी तकनीक, फिटनेस और रिंग रणनीति को लगातार निखार रही हैं। उनकी दिनचर्या में प्रतिदिन सुबह तीन घंटे और शाम तीन घंटे का अभ्यास शामिल है जिसमें फिटनेस ट्रेनिंग, स्पैरिंग और तकनीकी अभ्यास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
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खेलो इंडिया यूथ गेम्स में जीत चुकीं स्वर्ण पदक
लासू यादव ने बताया कि वह खेलो इंडिया यूथ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। यूथ महिला विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप (स्पेन) में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए क्वार्टर फाइनल तक सफर तय कर चुकी हैं। राष्ट्रीय स्तर (जूनियर नेशनल) पर रजत पदक भी जीत चुकी हैं। लासू बताती हैं कि शुरुआत में कई तरह की चुनौतियां सामने आईं लेकिन परिवार और कोचों के सहयोग ने उनका आत्मविश्वास बनाए रखा। एक महिला खिलाड़ी होने के नाते सामाजिक बाधाओं का भी सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। उनका कहना है कि खेल केवल शारीरिक मजबूती ही नहीं देता, बल्कि मानसिक आत्मविश्वास और अनुशासन भी सिखाता है।

मुक्केबाज लासू यादव
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