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Kaithal News: किसानों की राह मुश्किल, मंडी में सड़क का निर्माण अटका
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 20 Mar 2026 01:00 AM IST
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मंडी में नगर परिषद की उखड़ी सड़क पर पड़ा रोडा। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मंडी में इस बार भी किसानों के लिए राह आसान नजर नहीं आ रही। करीब 85 लाख रुपये की लागत से बनने वाली मुख्य सड़क पिछले आठ माह से अधूरी पड़ी है। नगर परिषद ने निर्माण कार्य शुरू तो किया, लेकिन सड़क पर रोड़ा (पत्थर) डालने के बाद एजेंसी का भुगतान अटक गया और काम बीच में ही रुक गया।
स्थिति यह है कि महीनों बाद भी सड़क पर केवल पत्थर बिछे हुए हैं, जिससे किसानों की ट्रालियां पलटने का खतरा बना रहता है। गत सीजन में भी इसी खराब सड़क के कारण कई हादसे टलते-टलते बचे थे। मंडी में एफसीआई का गोदाम होने से ट्रकों की आवाजाही लगातार रहती है, लेकिन जर्जर सड़क ने पूरी व्यवस्था को प्रभावित कर रखा है।
नगर परिषद की धीमी कार्यप्रणाली और भुगतान संबंधी देरी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। स्ट्रीट लाइट के खंभे से लाइटें गायब होने के साथ सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है।
भाकियू (चढूनी) के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने कहा कि किसान अपनी फसल लेकर मंडी में आते हैं, लेकिन यहां उनकी जान और माल दोनों जोखिम में हैं। प्रशासन ने पत्थर डालकर सड़क अधूरी छोड़ दी है, जिस पर ट्रैक्टर चलाना किसी चुनौती से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि लाइट और सफाई की भी कोई व्यवस्था नहीं है। जिला प्रशासन
को जल्द से जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त करनी चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
पीने के पानी का भी अभाव : प्रधान कृष्ण मित्तल
मंडी एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने बताया कि सड़क ही नहीं, अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी बेहद खराब है। पीने के पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। सड़क किनारे स्ट्रीट लाइट के पोल तो लगे हैं, लेकिन अधिकांश लाइटें गायब हैं। शाम होते ही पूरी सड़क अंधेरे में डूब जाती है, जिससे चोरी और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि यही मुख्य मार्ग है, जहां से किसान मंडी में प्रवेश कर गेट पास लेते हैं। वहीं सफाई व्यवस्था भी बदहाल है-चारों ओर गंदगी के ढेर लगे हैं और दुर्गंध के कारण बैठना मुश्किल हो गया है।
एजेंसी के साथ भुगतान पर समस्या थी, जिसे अब सुलझा लिया गया है। एजेंसी को राशि जारी कर दी गई है और इसी सप्ताह से कार्य दोबारा शुरू कर दिया जाएगा। -कपिल शर्मा, जिला नगर आयुक्त
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कैथल। मंडी में इस बार भी किसानों के लिए राह आसान नजर नहीं आ रही। करीब 85 लाख रुपये की लागत से बनने वाली मुख्य सड़क पिछले आठ माह से अधूरी पड़ी है। नगर परिषद ने निर्माण कार्य शुरू तो किया, लेकिन सड़क पर रोड़ा (पत्थर) डालने के बाद एजेंसी का भुगतान अटक गया और काम बीच में ही रुक गया।
स्थिति यह है कि महीनों बाद भी सड़क पर केवल पत्थर बिछे हुए हैं, जिससे किसानों की ट्रालियां पलटने का खतरा बना रहता है। गत सीजन में भी इसी खराब सड़क के कारण कई हादसे टलते-टलते बचे थे। मंडी में एफसीआई का गोदाम होने से ट्रकों की आवाजाही लगातार रहती है, लेकिन जर्जर सड़क ने पूरी व्यवस्था को प्रभावित कर रखा है।
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नगर परिषद की धीमी कार्यप्रणाली और भुगतान संबंधी देरी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। स्ट्रीट लाइट के खंभे से लाइटें गायब होने के साथ सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है।
भाकियू (चढूनी) के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने कहा कि किसान अपनी फसल लेकर मंडी में आते हैं, लेकिन यहां उनकी जान और माल दोनों जोखिम में हैं। प्रशासन ने पत्थर डालकर सड़क अधूरी छोड़ दी है, जिस पर ट्रैक्टर चलाना किसी चुनौती से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि लाइट और सफाई की भी कोई व्यवस्था नहीं है। जिला प्रशासन
को जल्द से जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त करनी चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
पीने के पानी का भी अभाव : प्रधान कृष्ण मित्तल
मंडी एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने बताया कि सड़क ही नहीं, अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी बेहद खराब है। पीने के पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। सड़क किनारे स्ट्रीट लाइट के पोल तो लगे हैं, लेकिन अधिकांश लाइटें गायब हैं। शाम होते ही पूरी सड़क अंधेरे में डूब जाती है, जिससे चोरी और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि यही मुख्य मार्ग है, जहां से किसान मंडी में प्रवेश कर गेट पास लेते हैं। वहीं सफाई व्यवस्था भी बदहाल है-चारों ओर गंदगी के ढेर लगे हैं और दुर्गंध के कारण बैठना मुश्किल हो गया है।
एजेंसी के साथ भुगतान पर समस्या थी, जिसे अब सुलझा लिया गया है। एजेंसी को राशि जारी कर दी गई है और इसी सप्ताह से कार्य दोबारा शुरू कर दिया जाएगा। -कपिल शर्मा, जिला नगर आयुक्त