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Kaithal News: सीजन में पहली बार पारा 44 डिग्री के पार
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 19 May 2026 01:16 AM IST
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तपती दोपहर में मुंह पर परना बांध कर गर्मी से बचाव का प्रयास करते युवक। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में गर्मी ने अब अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मई माह में सूरज की तपिश और गर्म हवाओं के असर से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस सीजन में पहली बार अधिकतम तापमान 44.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। हालात ऐसे हैं कि अब सुबह के समय ही तेज गर्मी लोगों को परेशान करने लगी है।
मौसम में आए बदलाव के कारण अब केवल दोपहर ही नहीं, बल्कि सुबह और रातें भी झुलसाने लगी हैं। सुबह सूरज निकलते ही धूप की तीव्रता इतनी बढ़ जाती है कि घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। दिन चढ़ने के साथ ही तपिश और बढ़ जाती है। वहीं, न्यूनतम तापमान भी बढ़कर 29 डिग्री
सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे रात के समय भी राहत नहीं मिल रही। ढलती शाम के बाद कमरों और दीवारों से निकल रही उमस भरी गर्मी लोगों की बेचैनी बढ़ा रही है।
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18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही लू : मौसम विशेषज्ञ डॉ. रमेश चंद्र के अनुसार, वर्तमान में लगभग 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। हवा की यह गति सामान्य से अधिक है, जिससे वातावरण की नमी कम हो गई है। तेज हवाएं अब सामान्य हवा न रहकर लू के गर्म थपेड़ों में बदल चुकी हैं। दोपहर के समय बाहर निकलने वाले लोगों को गर्म हवाएं सीधे शरीर पर महसूस हो रही हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ गया है।
बाजारों और जनजीवन पर असर : 44 डिग्री तापमान और तेज लू के चलते दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा नजर आने लगा है। प्रमुख बाजारों में दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ग्राहकों की आवाजाही काफी कम हो गई है। लोग जरूरी काम होने पर ही चेहरे को ढककर घरों से बाहर निकल रहे हैं। गन्ने का रस, नींबू पानी और लस्सी जैसी ठंडी पेय पदार्थों की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई है। दूसरी ओर, एसी और कूलर के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली की मांग बढ़ रही है।
अस्पताल में बढ़े उल्टी-दस्त के मरीज
लगातार बढ़ती गर्मी और लू का असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। नागरिक अस्पताल में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है। सामान्य वार्ड से लेकर आपातकालीन वार्ड तक मरीजों की भीड़ देखी जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार, बीते एक सप्ताह में ऐसे मरीजों की संख्या में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
ये बरतें सावधानियां : डॉ. जितेंद्र गिल ने लोगों को गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस, छाछ और नारियल पानी पीने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें। हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें तथा खाली पेट घर से बाहर न निकलें। बाहर जाने से पहले कुछ खाकर और पर्याप्त पानी पीकर ही निकलें।
पशुओं का विशेष ध्यान रखें पशुपालक
पशु चिकित्सक डॉ. सुरेंद्र ने बताया कि पशुधन को लू के प्रकोप से बचाने के लिए पशुपालकों को उन्हें छाया वाले स्थान जैसे पेड़, शेड या छतवाली संरचनाओं में रखें ताकि वे धूप से बच सकें। पशु आवास की छतों को पुआल या टाट आदि से ढक दें या इंसुलिन लगाएं, ताकि बाड़े में गर्मी कम हो। पशु आवास में पंखे, स्प्रिंकलर या फगर का उपयोग करें ताकि हवा का संचार और ठंडक बनी रहे। खिड़कियां और दरवाजे खोलकर रखें और उन पर गीले बोरे लटकाएं ताकि प्राकृतिक ठंडक मिल सके। इसके अलावा पशुओं को ताज़ा और साफ पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराएं। धातु की बजाय प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तन का उपयोग करें, ताकि पानी ठंडा रहे।
सुबह आठ बजे के बाद से ही चलने लगती है लू
तेज धूप की तपिश का हाल यह है कि सुबह आठ बजे के बाद से ही लू चलने लगती है। भीषण गर्मी के चलते दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा नजर आता है। घर के बुजुर्ग बच्चों को सलाह दे रहे हैं कि तेज धूप में दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें।
कैथल। जिले में गर्मी ने अब अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मई माह में सूरज की तपिश और गर्म हवाओं के असर से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस सीजन में पहली बार अधिकतम तापमान 44.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। हालात ऐसे हैं कि अब सुबह के समय ही तेज गर्मी लोगों को परेशान करने लगी है।
मौसम में आए बदलाव के कारण अब केवल दोपहर ही नहीं, बल्कि सुबह और रातें भी झुलसाने लगी हैं। सुबह सूरज निकलते ही धूप की तीव्रता इतनी बढ़ जाती है कि घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। दिन चढ़ने के साथ ही तपिश और बढ़ जाती है। वहीं, न्यूनतम तापमान भी बढ़कर 29 डिग्री
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सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे रात के समय भी राहत नहीं मिल रही। ढलती शाम के बाद कमरों और दीवारों से निकल रही उमस भरी गर्मी लोगों की बेचैनी बढ़ा रही है।
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18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही लू : मौसम विशेषज्ञ डॉ. रमेश चंद्र के अनुसार, वर्तमान में लगभग 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। हवा की यह गति सामान्य से अधिक है, जिससे वातावरण की नमी कम हो गई है। तेज हवाएं अब सामान्य हवा न रहकर लू के गर्म थपेड़ों में बदल चुकी हैं। दोपहर के समय बाहर निकलने वाले लोगों को गर्म हवाएं सीधे शरीर पर महसूस हो रही हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ गया है।
बाजारों और जनजीवन पर असर : 44 डिग्री तापमान और तेज लू के चलते दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा नजर आने लगा है। प्रमुख बाजारों में दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ग्राहकों की आवाजाही काफी कम हो गई है। लोग जरूरी काम होने पर ही चेहरे को ढककर घरों से बाहर निकल रहे हैं। गन्ने का रस, नींबू पानी और लस्सी जैसी ठंडी पेय पदार्थों की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई है। दूसरी ओर, एसी और कूलर के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली की मांग बढ़ रही है।
अस्पताल में बढ़े उल्टी-दस्त के मरीज
लगातार बढ़ती गर्मी और लू का असर अब लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। नागरिक अस्पताल में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है। सामान्य वार्ड से लेकर आपातकालीन वार्ड तक मरीजों की भीड़ देखी जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार, बीते एक सप्ताह में ऐसे मरीजों की संख्या में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
ये बरतें सावधानियां : डॉ. जितेंद्र गिल ने लोगों को गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस, छाछ और नारियल पानी पीने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें। हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें तथा खाली पेट घर से बाहर न निकलें। बाहर जाने से पहले कुछ खाकर और पर्याप्त पानी पीकर ही निकलें।
पशुओं का विशेष ध्यान रखें पशुपालक
पशु चिकित्सक डॉ. सुरेंद्र ने बताया कि पशुधन को लू के प्रकोप से बचाने के लिए पशुपालकों को उन्हें छाया वाले स्थान जैसे पेड़, शेड या छतवाली संरचनाओं में रखें ताकि वे धूप से बच सकें। पशु आवास की छतों को पुआल या टाट आदि से ढक दें या इंसुलिन लगाएं, ताकि बाड़े में गर्मी कम हो। पशु आवास में पंखे, स्प्रिंकलर या फगर का उपयोग करें ताकि हवा का संचार और ठंडक बनी रहे। खिड़कियां और दरवाजे खोलकर रखें और उन पर गीले बोरे लटकाएं ताकि प्राकृतिक ठंडक मिल सके। इसके अलावा पशुओं को ताज़ा और साफ पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराएं। धातु की बजाय प्लास्टिक या मिट्टी के बर्तन का उपयोग करें, ताकि पानी ठंडा रहे।
सुबह आठ बजे के बाद से ही चलने लगती है लू
तेज धूप की तपिश का हाल यह है कि सुबह आठ बजे के बाद से ही लू चलने लगती है। भीषण गर्मी के चलते दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा नजर आता है। घर के बुजुर्ग बच्चों को सलाह दे रहे हैं कि तेज धूप में दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें।