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Kaithal News: बिद्क्यार झील में छोड़ी जाएंगी गंबूजिया मछलियां
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 26 Mar 2026 01:59 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके तहत शहर की बिद्क्यार झील में सैकड़ों गंबूजिया मछलियां छोड़ी जाएंगी, जो मच्छरों के लार्वा को खाकर उनकी संख्या को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार डेंगू और मलेरिया के फैलने का मुख्य कारण मच्छरों की तेजी से बढ़ती संख्या है। ऐसे में गंबूजिया मछलियों का उपयोग एक प्रभावी जैविक उपाय के रूप में किया जा रहा है। ये मछलियां जल स्रोतों में मौजूद मच्छरों के लार्वा को खाकर उनके प्रजनन चक्र को बाधित करती हैं, जिससे मच्छरों की संख्या में कमी आती है। वर्तमान में नौ गंबूजिया मछली हैचरियां संचालित हैं, जहां इनका उत्पादन किया जाता है। इन हैचरियों से मछलियों को तालाबों, झीलों और अन्य स्थायी जल स्रोतों में छोड़ा जाता है। हर साल मानसून से पहले करीब 500 स्थायी जल स्रोतों में इन मछलियों को डाला जाता है, ताकि बारिश में मच्छरों के बढ़ते खतरे को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. नीरज मंगला ने बताया कि विभाग पूरी तरह सतर्क है और हर स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि केवल दवाइयों के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मच्छरों के स्रोत को खत्म करना सबसे जरूरी है। गंबूजिया मछलियां इस दिशा में एक कारगर और सुरक्षित उपाय हैं, जो तेजी से लार्वा को नष्ट करती हैं।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लोगों को जागरूक भी करेंगी कि वे घरों और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, पुराने टायर, पानी की टंकियां और छतों पर रखे बर्तन मच्छरों के पनपने के स्थानों को नियमित रूप से साफ करना जरूरी है।
मलेरिया मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, जो आमतौर पर रात के समय सक्रिय रहता है। वहीं डेंगू मादा एडीज एजिप्टाई मच्छर के कारण होता है, जो दिन के समय काटता है और साफ पानी में पनपता है। दोनों ही बीमारियों से बचाव के लिए साफ-सफाई और पानी का ठहराव रोकना बेहद आवश्यक है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मलेरिया के लक्षणों में ठंड लगना, तेज बुखार, सिरदर्द और उल्टी शामिल हैं, जबकि डेंगू में तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, शरीर पर चकत्ते और प्लेटलेट्स में गिरावट जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवानी चाहिए, जहां इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है।
गंबूजिया मछली की खासियत यह है कि एक व्यस्क मछली रोजाना 100 से 300 मच्छर लार्वा खा सकती है। यह मछली साफ और खारे दोनों प्रकार के पानी में जीवित रह सकती है और कम देखभाल में भी तेजी से बढ़ती है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि गंबूजिया मछलियों का यह प्रयोग डेंगू और मलेरिया नियंत्रण में महत्वपूर्ण साबित होगा। -डॉ. नीरज मंगला, डिप्टी सिविल सर्जन
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कैथल। डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके तहत शहर की बिद्क्यार झील में सैकड़ों गंबूजिया मछलियां छोड़ी जाएंगी, जो मच्छरों के लार्वा को खाकर उनकी संख्या को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार डेंगू और मलेरिया के फैलने का मुख्य कारण मच्छरों की तेजी से बढ़ती संख्या है। ऐसे में गंबूजिया मछलियों का उपयोग एक प्रभावी जैविक उपाय के रूप में किया जा रहा है। ये मछलियां जल स्रोतों में मौजूद मच्छरों के लार्वा को खाकर उनके प्रजनन चक्र को बाधित करती हैं, जिससे मच्छरों की संख्या में कमी आती है। वर्तमान में नौ गंबूजिया मछली हैचरियां संचालित हैं, जहां इनका उत्पादन किया जाता है। इन हैचरियों से मछलियों को तालाबों, झीलों और अन्य स्थायी जल स्रोतों में छोड़ा जाता है। हर साल मानसून से पहले करीब 500 स्थायी जल स्रोतों में इन मछलियों को डाला जाता है, ताकि बारिश में मच्छरों के बढ़ते खतरे को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
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डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. नीरज मंगला ने बताया कि विभाग पूरी तरह सतर्क है और हर स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि केवल दवाइयों के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मच्छरों के स्रोत को खत्म करना सबसे जरूरी है। गंबूजिया मछलियां इस दिशा में एक कारगर और सुरक्षित उपाय हैं, जो तेजी से लार्वा को नष्ट करती हैं।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लोगों को जागरूक भी करेंगी कि वे घरों और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, पुराने टायर, पानी की टंकियां और छतों पर रखे बर्तन मच्छरों के पनपने के स्थानों को नियमित रूप से साफ करना जरूरी है।
मलेरिया मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, जो आमतौर पर रात के समय सक्रिय रहता है। वहीं डेंगू मादा एडीज एजिप्टाई मच्छर के कारण होता है, जो दिन के समय काटता है और साफ पानी में पनपता है। दोनों ही बीमारियों से बचाव के लिए साफ-सफाई और पानी का ठहराव रोकना बेहद आवश्यक है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मलेरिया के लक्षणों में ठंड लगना, तेज बुखार, सिरदर्द और उल्टी शामिल हैं, जबकि डेंगू में तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, शरीर पर चकत्ते और प्लेटलेट्स में गिरावट जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवानी चाहिए, जहां इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है।
गंबूजिया मछली की खासियत यह है कि एक व्यस्क मछली रोजाना 100 से 300 मच्छर लार्वा खा सकती है। यह मछली साफ और खारे दोनों प्रकार के पानी में जीवित रह सकती है और कम देखभाल में भी तेजी से बढ़ती है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि गंबूजिया मछलियों का यह प्रयोग डेंगू और मलेरिया नियंत्रण में महत्वपूर्ण साबित होगा। -डॉ. नीरज मंगला, डिप्टी सिविल सर्जन