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Kaithal News: निजी अस्पतालों में सरकारी से ज्यादा सिजेरियन डिलीवरी

Thu, 13 Aug 2026 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 13 Aug 2026 12:53 AM IST
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Higher rate of Caesarean deliveries in private hospitals compared to government hospitals.
जिला नागरिक अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की जांच करते हुए नर्सिंग स्टाफ। संवाद
विक्रम पूनिया
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कैथल। जिले में अप्रैल से जून तक जिले में कुल 2,951 डिलीवरी हुईं, जिनमें 1,193 सिजेरियन ऑपेरेशन शामिल हैं। इनमें निजी अस्पतालों में सिजेरियन की दर 55 प्रतिशत से अधिक रही, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह 25 प्रतिशत से भी कम है।
आंकड़ों में यह बड़ा अंतर कई सवाल खड़े करता है। अस्पतालों में आने वाले मरीजों की स्थिति और जटिल मामलों के अनुपात में अंतर भी इसका एक कारण हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी अस्पताल स्तर पर किसी एक निश्चित सिजेरियन दर को मानक नहीं मानता है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अप्रैल से जून के बीच सरकारी अस्पतालों में 1,422 डिलीवरी हुईं, जिनमें 351 सिजेरियन थीं। इस हिसाब से सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन की दर 24.68 प्रतिशत रही। वहीं, निजी अस्पतालों में इसी अवधि में 1,529 डिलीवरी हुईं, जिनमें 842 सिजेरियन शामिल थीं। निजी अस्पतालों में सिजेरियन की दर 55.07 प्रतिशत रही।
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इन आंकड़ों के आधार पर यह सवाल उठता है कि दोनों क्षेत्रों में सिजेरियन की दर में इतना अंतर किन कारणों से है। विश्व स्वास्थ्य संगठन चिकित्सकीय जरूरत के आधार पर ही सिजेरियन किए जाने पर जोर देता है। सरकारी अस्पतालों में जहां करीब हर चार में से एक प्रसव सिजेरियन ऑपरेशन से हुआ वहीं निजी अस्पतालों में यह अनुपात हर दो में से एक से भी अधिक रहा।
कुल सिजेरियन डिलीवरी में भी निजी अस्पताल आगे : जिले में तीन माह के दौरान हुई सिजेरियन डिलीवरीमें निजी अस्पतालों की हिस्सेदारी करीब 71 प्रतिशत रही। इसके विपरीत कुल 2,951 डिलीवरी में निजी अस्पतालों की हिस्सेदारी करीब 52 प्रतिशत थी। सरकारी अस्पतालों में करीब 48 प्रतिशत डिलीवरी हुईं, लेकिन कुल सिजेरियन में उनकी हिस्सेदारी करीब 29 प्रतिशत रही।
चिकित्सकों के अनुसार सिजेरियन एक शल्य प्रक्रिया है, जिसकी जरूरत कई परिस्थितियों में मां या बच्चे की जान बचाने के लिए पड़ सकती है। बच्चे की
धड़कन में गड़बड़ी, प्रसव का आगे न बढ़ना, बच्चे की गलत स्थिति, प्लेसेंटा से जुड़ी समस्या और गर्भावस्था की गंभीर जटिलताओं जैसी स्थितियों में सिजेरियन आवश्यक हो सकता है। संवाद


ज्यादा सिजेरियन वाले अस्पतालों के डेटा की होगी समीक्षा
सीएमओ डॉ. रेणु चावला ने कहा कि विभाग अस्पतालों के सिजेरियन संबंधी आंकड़ों पर नजर रखता है। वह व्यक्तिगत तौर पर हर दो महीने में इस डेटा की समीक्षा करती हैं। इसके बावजूद अस्पतालों के आंकड़ों को अब गहराई से देखा जाएगा। यदि किसी अस्पताल में सिजेरियन की दर अधिक पाई जाती है तो इसकी जांच करवाई जाएगी। समीक्षा के दौरान यह भी देखा जाएगा कि सिजेरियन किन कारणों से किए गए और संबंधित मामलों में इसकी चिकित्सकीय आवश्यकता थी या नहीं।
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