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Kaithal News: मां कात्यायनी के नाम पर पड़ा कलायत का नाम
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 24 Mar 2026 01:15 AM IST
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कलायत में स्थित मां क.ात्यायनी का श्रीविग्रह
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निशीकांत शर्मा
कलायत। चैत्र नवरात्र में कलायत स्थित मां कात्यायनी शक्ति पीठ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कपिल मुनि मंदिर परिसर में स्थित यह शक्ति पीठ इन दिनों आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। छठा नवरात्र मां कात्यायनी को समर्पित है।
पुजारी संजय शास्त्री ने बताया कि मान्यता है कि मां कात्यायनी के नाम पर ही कलायत का नामकरण हुआ। यह स्थान देवी का प्राचीनतम धाम माना जाता है, जिससे क्षेत्र की धार्मिक आस्था गहराई से जुड़ी हुई है। हालांकि एक मत यह भी है कि कलायत का नाम भगवान कपिल के नाम पर पड़ा।
उन्होंने बताया कि मां कात्यायनी नवदुर्गा के नौ रूपों में छठा स्वरूप हैं। शास्त्रों में उनका उल्लेख पार्वती के रूप में भी मिलता है। उन्होंने बताया कि स्कंद पुराण के अनुसार, देवी कात्यायनी का प्राकट्य परमेश्वर के क्रोध से हुआ और उन्होंने सिंह पर आरूढ़ होकर महिषासुर का वध किया। वे आदिशक्ति का स्वरूप मानी जाती हैं।
कात्यायन ऋषि कुल में हुआ था अवतार : पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि कत नामक महर्षि के पुत्र कात्य हुए, जिनके गोत्र में महर्षि कात्यायन का जन्म हुआ। महर्षि कात्यायन ने भगवती की कठोर तपस्या कर उन्हें पुत्री रूप में पाने की कामना की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उनकी इच्छा पूर्ण की। बाद में देवताओं के तेज से उत्पन्न देवी ने महिषासुर का संहार किया। महर्षि कात्यायन द्वारा प्रथम पूजा किए जाने के कारण ही देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। संवाद
भगवान कपिल का मंदिर भी यहां है
कपिल मुनि मंदिर परिसर में मां कात्यायनी शक्ति पीठ के साथ भगवान कपिल का मंदिर भी स्थित है। मंदिर में स्थापित मां का विग्रह अत्यंत दुर्लभ और अद्वितीय माना जाता है, जिसमें देवी शेर की सवारी घोड़े की भांति करती हुई दिखाई देती हैं। इसके अलावा यहां मां दुर्गा, सरस्वती और काली की पाषाणकालीन दुर्लभ मूर्तियां भी स्थापित हैं। यह शक्ति पीठ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी विशिष्टता के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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कलायत। चैत्र नवरात्र में कलायत स्थित मां कात्यायनी शक्ति पीठ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कपिल मुनि मंदिर परिसर में स्थित यह शक्ति पीठ इन दिनों आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। छठा नवरात्र मां कात्यायनी को समर्पित है।
पुजारी संजय शास्त्री ने बताया कि मान्यता है कि मां कात्यायनी के नाम पर ही कलायत का नामकरण हुआ। यह स्थान देवी का प्राचीनतम धाम माना जाता है, जिससे क्षेत्र की धार्मिक आस्था गहराई से जुड़ी हुई है। हालांकि एक मत यह भी है कि कलायत का नाम भगवान कपिल के नाम पर पड़ा।
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उन्होंने बताया कि मां कात्यायनी नवदुर्गा के नौ रूपों में छठा स्वरूप हैं। शास्त्रों में उनका उल्लेख पार्वती के रूप में भी मिलता है। उन्होंने बताया कि स्कंद पुराण के अनुसार, देवी कात्यायनी का प्राकट्य परमेश्वर के क्रोध से हुआ और उन्होंने सिंह पर आरूढ़ होकर महिषासुर का वध किया। वे आदिशक्ति का स्वरूप मानी जाती हैं।
कात्यायन ऋषि कुल में हुआ था अवतार : पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि कत नामक महर्षि के पुत्र कात्य हुए, जिनके गोत्र में महर्षि कात्यायन का जन्म हुआ। महर्षि कात्यायन ने भगवती की कठोर तपस्या कर उन्हें पुत्री रूप में पाने की कामना की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उनकी इच्छा पूर्ण की। बाद में देवताओं के तेज से उत्पन्न देवी ने महिषासुर का संहार किया। महर्षि कात्यायन द्वारा प्रथम पूजा किए जाने के कारण ही देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। संवाद
भगवान कपिल का मंदिर भी यहां है
कपिल मुनि मंदिर परिसर में मां कात्यायनी शक्ति पीठ के साथ भगवान कपिल का मंदिर भी स्थित है। मंदिर में स्थापित मां का विग्रह अत्यंत दुर्लभ और अद्वितीय माना जाता है, जिसमें देवी शेर की सवारी घोड़े की भांति करती हुई दिखाई देती हैं। इसके अलावा यहां मां दुर्गा, सरस्वती और काली की पाषाणकालीन दुर्लभ मूर्तियां भी स्थापित हैं। यह शक्ति पीठ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी विशिष्टता के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

कलायत में स्थित मां क.ात्यायनी का श्रीविग्रह