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Kaithal News: चार साल से बंद 3.41 करोड़ की लिथोट्रिप्सी मशीन, मरीज निजी अस्पतालों पर निर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 28 Apr 2026 01:07 AM IST
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जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की जांच करते डॉक्टर अमरेंद्र। संवाद
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सोनू थुआ
कैथल। जिले में पथरी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सिविल अस्पताल में लगी 3.41 करोड़ रुपये की लिथोट्रिप्सी मशीन पिछले चार वर्षों से खराब पड़ी है। वर्ष 2020 में चूहों द्वारा तार कुतर दिए जाने से मशीन खराब हो गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इंजीनियरों को बुलाया, लेकिन पुर्जों की स्थिति ज्यादा खराब होने के कारण मशीन ठीक नहीं हो सकी। विभाग द्वारा अब तक नई मशीन की व्यवस्था भी नहीं की गई है।
सरकारी अस्पताल में यह सुविधा बंद होने से मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां इलाज का खर्च दोगुना तक पहुंच जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर पड़ रहा है। कई मरीज महंगे इलाज के कारण उपचार टाल देते हैं, जिससे उनकी समस्या और गंभीर हो जाती है।
चिकित्सकों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने से पथरी का आकार बढ़ सकता है और किडनी को गंभीर नुकसान हो सकता है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द लिथोट्रिप्सी मशीन को ठीक कराया जाए या नई मशीन उपलब्ध करवाई जाए, ताकि मरीजों को सस्ती और समय पर उपचार सुविधा मिल सके।
एक साल में 3584 मरीज पथरी के
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में एक वर्ष में 3584 मरीज पथरी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे हैं। औसतन रोजाना करीब 9.8, यानी लगभग 10 मरीज इस समस्या के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। मासिक आंकड़ा लगभग 298 से 300 मरीज बैठता है। पिछले तीन वर्षों में यह संख्या करीब 10,752 तक पहुंच चुकी है।
कसान निवासी मरीज मनोज ने बताया कि उसके पेट में पथरी है और वह इलाज के लिए सिविल अस्पताल आया था, लेकिन यहां सुविधा उपलब्ध नहीं है। यदि लिथोट्रिप्सी मशीन चालू होती तो कम खर्च में इलाज संभव था, लेकिन अब निजी अस्पताल में हजारों रुपये अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं।
डॉ. अमरेंद्र के अनुसार, पथरी की समस्या को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर इलाज न होने पर पथरी का आकार बढ़ सकता है, जिससे किडनी में संक्रमण या स्थायी नुकसान का खतरा रहता है। कई मामलों में सर्जरी तक की आवश्यकता पड़ सकती है। संवाद
लेजर तकनीक का प्रयोग
लिथोट्रिप्सी में किडनी की पथरी को तोड़ने के लिए लेजर तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस मशीन से 30 एमएम तक की पथरी को निकाला जा सकता है।
मुख्यालय को पत्र लिखा हुआ है। अस्पताल को जल्द लिथोट्रिप्सी मशीन मिलने की उम्मीद है। पुरानी मशीन को ठीक करवाने के लिए इंजीनियरों की टीम बुलाई गई थी, लेकिन मशीन की दयनीय हालत देखकर उन्होंने मरम्मत करने से इन्कार कर दिया था।
-डॉ दिनेश कंसल, पीएमओ, जिला नागरिक अस्पताल
पथरी के प्रमुख लक्षण और उपचार के तरीके
नागरिक अस्पताल में तैनात डॉ. अमरेंद्र ने पथरी के प्रमुख लक्षण और उपचार के तरीके बताए।
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पेट या कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द
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पेशाब के दौरान जलन या दर्द
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बार-बार पेशाब आने की समस्या
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पेशाब में खून आना
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उल्टी या जी मिचलाना
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दवाइयों से इलाज: छोटी पथरी अधिक पानी और दवाओं से निकल सकती है
n लिथोट्रिप्सी: बिना ऑपरेशन के शॉक वेव से पथरी को तोड़ा जाता है
n एंडोस्कोपी: छोटे उपकरणों की मदद से पथरी निकाली जाती है
n सर्जरी: बड़ी पथरी होने पर ऑपरेशन आवश्यक हो सकता है
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कैथल। जिले में पथरी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सिविल अस्पताल में लगी 3.41 करोड़ रुपये की लिथोट्रिप्सी मशीन पिछले चार वर्षों से खराब पड़ी है। वर्ष 2020 में चूहों द्वारा तार कुतर दिए जाने से मशीन खराब हो गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इंजीनियरों को बुलाया, लेकिन पुर्जों की स्थिति ज्यादा खराब होने के कारण मशीन ठीक नहीं हो सकी। विभाग द्वारा अब तक नई मशीन की व्यवस्था भी नहीं की गई है।
सरकारी अस्पताल में यह सुविधा बंद होने से मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां इलाज का खर्च दोगुना तक पहुंच जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर पड़ रहा है। कई मरीज महंगे इलाज के कारण उपचार टाल देते हैं, जिससे उनकी समस्या और गंभीर हो जाती है।
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चिकित्सकों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने से पथरी का आकार बढ़ सकता है और किडनी को गंभीर नुकसान हो सकता है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द लिथोट्रिप्सी मशीन को ठीक कराया जाए या नई मशीन उपलब्ध करवाई जाए, ताकि मरीजों को सस्ती और समय पर उपचार सुविधा मिल सके।
एक साल में 3584 मरीज पथरी के
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में एक वर्ष में 3584 मरीज पथरी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे हैं। औसतन रोजाना करीब 9.8, यानी लगभग 10 मरीज इस समस्या के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। मासिक आंकड़ा लगभग 298 से 300 मरीज बैठता है। पिछले तीन वर्षों में यह संख्या करीब 10,752 तक पहुंच चुकी है।
कसान निवासी मरीज मनोज ने बताया कि उसके पेट में पथरी है और वह इलाज के लिए सिविल अस्पताल आया था, लेकिन यहां सुविधा उपलब्ध नहीं है। यदि लिथोट्रिप्सी मशीन चालू होती तो कम खर्च में इलाज संभव था, लेकिन अब निजी अस्पताल में हजारों रुपये अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं।
डॉ. अमरेंद्र के अनुसार, पथरी की समस्या को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर इलाज न होने पर पथरी का आकार बढ़ सकता है, जिससे किडनी में संक्रमण या स्थायी नुकसान का खतरा रहता है। कई मामलों में सर्जरी तक की आवश्यकता पड़ सकती है। संवाद
लेजर तकनीक का प्रयोग
लिथोट्रिप्सी में किडनी की पथरी को तोड़ने के लिए लेजर तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस मशीन से 30 एमएम तक की पथरी को निकाला जा सकता है।
मुख्यालय को पत्र लिखा हुआ है। अस्पताल को जल्द लिथोट्रिप्सी मशीन मिलने की उम्मीद है। पुरानी मशीन को ठीक करवाने के लिए इंजीनियरों की टीम बुलाई गई थी, लेकिन मशीन की दयनीय हालत देखकर उन्होंने मरम्मत करने से इन्कार कर दिया था।
-डॉ दिनेश कंसल, पीएमओ, जिला नागरिक अस्पताल
पथरी के प्रमुख लक्षण और उपचार के तरीके
नागरिक अस्पताल में तैनात डॉ. अमरेंद्र ने पथरी के प्रमुख लक्षण और उपचार के तरीके बताए।
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पेट या कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द
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पेशाब के दौरान जलन या दर्द
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बार-बार पेशाब आने की समस्या
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पेशाब में खून आना
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उल्टी या जी मिचलाना
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दवाइयों से इलाज: छोटी पथरी अधिक पानी और दवाओं से निकल सकती है
n लिथोट्रिप्सी: बिना ऑपरेशन के शॉक वेव से पथरी को तोड़ा जाता है
n एंडोस्कोपी: छोटे उपकरणों की मदद से पथरी निकाली जाती है
n सर्जरी: बड़ी पथरी होने पर ऑपरेशन आवश्यक हो सकता है

जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की जांच करते डॉक्टर अमरेंद्र। संवाद

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