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Kaithal News: पुरानी बसें हो रहीं जर्जर, नई बसें नहीं आने से यात्री परेशान

संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 13 Apr 2026 03:40 AM IST
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Old buses are becoming dilapidated, passengers are troubled due to non-arrival of new buses.
कैथल के बस अड्डे पर बस के इंतजार में खड़े यात्री।
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कैथल। जिले के रोडवेज डिपो में अगले सप्ताह चार और बसें जर्जर घोषित होने जा रही हैं। इससे डिपो में बसों की संख्या घटकर करीब 158 रह जाएगी। इससे यात्रियों को और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
डिपो में बसों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। जनसंख्या और रूटों के अनुसार डिपो में 250 बसों का बेड़ा है, लेकिन वर्तमान में यह संख्या काफी कम है। लगातार बसों के जर्जर होने और नई बसों की आपूर्ति न होने के कारण स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है। कई गांवों में बसों की आवाजाही कम हो गई है, जिसके चलते लोगों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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बॉक्स-

इन रूटों पर सेवा प्रभावित
बसों की कमी का असर सीधे तौर पर विभिन्न रूटों पर देखने को मिल रहा है। दिल्ली, असंध, जींद, करनाल, चंडीगढ़, हिसार और कुरुक्षेत्र सहित कई इंटरसिटी और लोकल रूटों पर बसों की संख्या घटा दी गई है। कुछ रूटों पर समय सारिणी पूरी तरह से गड़बड़ा चुकी है, जिससे यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

बॉक्स-

एक साल में 48 बसें हुईं जर्जर
पिछले एक वर्ष के दौरान डिपो की स्थिति और भी खराब हुई है। इस दौरान करीब 48 बसें जर्जर घोषित हो चुकी हैं। इसके मुकाबले डिपो को केवल 20 नई बसें ही मिल पाई हैं, जो जरूरत के हिसाब से काफी कम हैं। वर्तमान में डिपो से रूटों पर चल रही 90 बसें बेहद पुरानी हो चुकी हैं। ये बसें अक्सर रास्ते में खराब हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को बीच रास्ते में ही परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पुरानी बसों को वर्कशॉप में बार-बार मरम्मत कर रूटों पर भेजा जा रहा है, लेकिन यह समाधान स्थायी नहीं है। तकनीकी खराबियों के कारण बसें बार-बार जवाब दे रही हैं, जिससे सेवा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। डिपो को अभी 92 बसों की जरूरत है। संवाद

वर्जन-

अगले सप्ताह चार और बसें जर्जर घोषित होंगी। कुछ नई बसें आने की उम्मीद है। यात्रियों को परेशान नहीं होने दिया जा रहा है। यात्रियों की मांग के अनुसार बसों को चलाया जाता है।
अनिल कुमार, वर्कशॉप मैनेजर
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