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Kaithal News: रोडवेज के बेड़े में सिर्फ 158 बसें ही बचीं
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 29 Apr 2026 01:04 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के रोडवेज डिपो की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। मंगलवार को दो और बसों को जर्जर घोषित किए जाने के बाद डिपो का कुल बस बेड़ा घटकर 158 रह गया है। बसों की घटती संख्या का सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है, जिन्हें अब बस स्टॉप पर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
बसों की कमी के चलते दिल्ली, असंध, जींद, करनाल, चंडीगढ़, हिसार और कुरुक्षेत्र जैसे प्रमुख रूट प्रभावित हो गए हैं। कई रूटों पर बसों की संख्या कम कर दी गई है, जिससे समय सारिणी गड़बड़ा गई है। मजबूरी में यात्रियों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
नई बसें खरीदने की मांग : डिपो कर्मचारियों संदीप और कृष्ण कुमार ने कहा कि नई बसें खरीदी जानी चाहिए। इससे न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि डिपो की आमदनी भी बढ़ेगी।
92 नई बसों की जरूरत : डिपो के सुचारु संचालन के लिए करीब 92 नई बसों की आवश्यकता बताई जा रही है। समय रहते बसों की संख्या नहीं बढ़ाई गई तो आने वाले दिनों में परिवहन व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है।
वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि मंगलवार को जिन दो बसों को रूट से हटाया गया है, उन्होंने अपनी 10 साल की वैधता पूरी कर ली थी। नई बसों के लिए मुख्यालय को लिखा जा चुका है।
एक साल में 50 हुईं जर्जर
पिछले एक वर्ष में डिपो की हालत और खराब हुई है। इस दौरान करीब 50 बसें जर्जर घोषित हो चुकी हैं, जबकि इसके मुकाबले केवल 20 नई बसें ही डिपो को मिल पाई हैं। वर्तमान में लगभग 94 बसें ऐसी हैं जो काफी पुरानी हो चुकी हैं और अक्सर बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं। इन्हें बार-बार वर्कशॉप में मरम्मत कर रूट पर भेजा जाता है, लेकिन यह केवल अस्थायी समाधान साबित हो रहा है।
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कैथल। जिले के रोडवेज डिपो की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। मंगलवार को दो और बसों को जर्जर घोषित किए जाने के बाद डिपो का कुल बस बेड़ा घटकर 158 रह गया है। बसों की घटती संख्या का सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है, जिन्हें अब बस स्टॉप पर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
बसों की कमी के चलते दिल्ली, असंध, जींद, करनाल, चंडीगढ़, हिसार और कुरुक्षेत्र जैसे प्रमुख रूट प्रभावित हो गए हैं। कई रूटों पर बसों की संख्या कम कर दी गई है, जिससे समय सारिणी गड़बड़ा गई है। मजबूरी में यात्रियों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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नई बसें खरीदने की मांग : डिपो कर्मचारियों संदीप और कृष्ण कुमार ने कहा कि नई बसें खरीदी जानी चाहिए। इससे न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि डिपो की आमदनी भी बढ़ेगी।
92 नई बसों की जरूरत : डिपो के सुचारु संचालन के लिए करीब 92 नई बसों की आवश्यकता बताई जा रही है। समय रहते बसों की संख्या नहीं बढ़ाई गई तो आने वाले दिनों में परिवहन व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है।
वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि मंगलवार को जिन दो बसों को रूट से हटाया गया है, उन्होंने अपनी 10 साल की वैधता पूरी कर ली थी। नई बसों के लिए मुख्यालय को लिखा जा चुका है।
एक साल में 50 हुईं जर्जर
पिछले एक वर्ष में डिपो की हालत और खराब हुई है। इस दौरान करीब 50 बसें जर्जर घोषित हो चुकी हैं, जबकि इसके मुकाबले केवल 20 नई बसें ही डिपो को मिल पाई हैं। वर्तमान में लगभग 94 बसें ऐसी हैं जो काफी पुरानी हो चुकी हैं और अक्सर बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं। इन्हें बार-बार वर्कशॉप में मरम्मत कर रूट पर भेजा जाता है, लेकिन यह केवल अस्थायी समाधान साबित हो रहा है।

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