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Kaithal News: सांसद ने दिए थे निर्देश, चार माह बाद भी पुलिस नहीं चुन पाई संवेदनशील जगह
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 13 Apr 2026 03:25 AM IST
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शहर के पेहोवा चौक से गुजरते वाहन चालक। संवाद
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नरेंद्र पंडित
कैथल। शहर के संवेदनशील स्थानों पर तीसरी आंख का पहरा बैठकों तक सिमट कर रह गया है। सांसद नवीन जिंदल के निर्देश के चार माह बाद भी अब तक उन जगहों का चयन भी नहीं हो पाया है, जहां कैमरे लगाए जाने हैं। इसमें पुलिस और नगर परिषद के अफसरों के बीच तालमेल की कमी देखी जा रही है।
पुलिस का तर्क है कि वे प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं, वहीं नगर परिषद को अभी तक वह आधिकारिक सूची नहीं मिली है जिसके आधार पर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सके।
प्रशासनिक ढिलाई का नतीजा यह है कि शहर के कई मुख्य प्रवेश द्वार और बाजार आज भी बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के हैं। बैठकों में किए जाने वाले बड़े-बड़े दावे केवल कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं। जानकारी के अनुसार वर्ष दिसंबर माह में हुई जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद नवीन जिंदल ने शहर के संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर सीसीटीवी कैमरे लगाने के कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। थाना शहर प्रभारी गीता ने बताया कि सूची लगभग तैयार है, जो जल्द ही नगर परिषद को सौंप दी जाएगी।
अब तक हॉट स्पॉट चिन्हित नहीं : बैठक में सांसद ने स्पष्ट किया था कि अपराध पर लगाम कसने और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए शहर के हर मुख्य चौक-चौराहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों को कैमरों से लैस किया जाए।
इसके लिए पुलिस विभाग को जिम्मेदारी दी गई थी कि वे उन हॉट स्पॉट को चिन्हित करें जहां आपराधिक घटनाएं अधिक होती हैं या जो सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हैं। इन जगहों की सूची नगर परिषद को सौंपी जानी थी, जिसे बजट जारी कर कैमरे लगवाने का काम पूरा करना था। शहर में चोरी, झपटमारी और तेज रफ्तार वाहनों के कारण हादसे होते हैं। ऐसे में सीसीटीवी अपराधियों में खौफ पैदा करते है। संवाद
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कैथल। शहर के संवेदनशील स्थानों पर तीसरी आंख का पहरा बैठकों तक सिमट कर रह गया है। सांसद नवीन जिंदल के निर्देश के चार माह बाद भी अब तक उन जगहों का चयन भी नहीं हो पाया है, जहां कैमरे लगाए जाने हैं। इसमें पुलिस और नगर परिषद के अफसरों के बीच तालमेल की कमी देखी जा रही है।
पुलिस का तर्क है कि वे प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं, वहीं नगर परिषद को अभी तक वह आधिकारिक सूची नहीं मिली है जिसके आधार पर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सके।
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प्रशासनिक ढिलाई का नतीजा यह है कि शहर के कई मुख्य प्रवेश द्वार और बाजार आज भी बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के हैं। बैठकों में किए जाने वाले बड़े-बड़े दावे केवल कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं। जानकारी के अनुसार वर्ष दिसंबर माह में हुई जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद नवीन जिंदल ने शहर के संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर सीसीटीवी कैमरे लगाने के कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। थाना शहर प्रभारी गीता ने बताया कि सूची लगभग तैयार है, जो जल्द ही नगर परिषद को सौंप दी जाएगी।
अब तक हॉट स्पॉट चिन्हित नहीं : बैठक में सांसद ने स्पष्ट किया था कि अपराध पर लगाम कसने और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए शहर के हर मुख्य चौक-चौराहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों को कैमरों से लैस किया जाए।
इसके लिए पुलिस विभाग को जिम्मेदारी दी गई थी कि वे उन हॉट स्पॉट को चिन्हित करें जहां आपराधिक घटनाएं अधिक होती हैं या जो सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हैं। इन जगहों की सूची नगर परिषद को सौंपी जानी थी, जिसे बजट जारी कर कैमरे लगवाने का काम पूरा करना था। शहर में चोरी, झपटमारी और तेज रफ्तार वाहनों के कारण हादसे होते हैं। ऐसे में सीसीटीवी अपराधियों में खौफ पैदा करते है। संवाद