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यूजीसी : प्रबंधन कर रहा गाइडलाइन का अध्ययन
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 29 Jan 2026 01:14 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) की नई पॉलिसी 2026 लागू करने का आदेश 13 जनवरी को जारी हो चुका है, लेकिन जिले के कॉलेजों में इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। कॉलेज प्रबंधन फिलहाल जारी गाइडलाइन का अध्ययन कर रहा है और इसके बाद ही आदेशानुसार इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
प्रभावित पॉलिसी के तहत सभी कॉलेजों में आंतरिक शिकायत निवारण समिति बनाना अनिवार्य है। इसके अलावा समयबद्ध जांच और रिपोर्ट यूजीसी को भेजना भी जरूरी होगा। नियमों का पालन न करने पर कॉलेज की मान्यता रद्द होने का प्रावधान भी है।
कॉलेजों में पहले से ही अन्य सेल बनाए हुए हैं, जो शिकायतों की जांच करते हैं। इस बीच शिक्षकों और सामाजिक संगठनों के बीच नीति को लेकर बहस भी तेज है। कुछ शिक्षक और सामाजिक संगठन इस पॉलिसी का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, कई शिक्षक नीति का विरोध भी कर रहे हैं। इस संबंध में डॉ. भीमराव आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य मनोज कुमार ने कहा कि कॉलेज में बीसीए कैटेगरी सेल और सेक्शुअल हरासमेंट इंप्लॉय सेल मौजूद है, जो किसी भी भेदभाव की गहनता से जांच करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी आदेशों का पालन संस्थान पूरी तरह से करेगा।
यूजीसी ने 12 जनवरी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियम लागू न करने पर कॉलेज की मान्यता पर संकट आ सकता है। गाइडलाइन का अध्ययन करके ही आगे कार्रवाई की जाएगी। संस्थान में पहले से ही समानता प्रकोष्ठ सक्रिय है, जो यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी विद्यार्थी के साथ किसी तरह का भेदभाव न हो। -गगन मित्तल, प्राचार्य-आरकेएसडी कॉलेज
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कैथल। यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) की नई पॉलिसी 2026 लागू करने का आदेश 13 जनवरी को जारी हो चुका है, लेकिन जिले के कॉलेजों में इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। कॉलेज प्रबंधन फिलहाल जारी गाइडलाइन का अध्ययन कर रहा है और इसके बाद ही आदेशानुसार इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
प्रभावित पॉलिसी के तहत सभी कॉलेजों में आंतरिक शिकायत निवारण समिति बनाना अनिवार्य है। इसके अलावा समयबद्ध जांच और रिपोर्ट यूजीसी को भेजना भी जरूरी होगा। नियमों का पालन न करने पर कॉलेज की मान्यता रद्द होने का प्रावधान भी है।
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कॉलेजों में पहले से ही अन्य सेल बनाए हुए हैं, जो शिकायतों की जांच करते हैं। इस बीच शिक्षकों और सामाजिक संगठनों के बीच नीति को लेकर बहस भी तेज है। कुछ शिक्षक और सामाजिक संगठन इस पॉलिसी का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, कई शिक्षक नीति का विरोध भी कर रहे हैं। इस संबंध में डॉ. भीमराव आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य मनोज कुमार ने कहा कि कॉलेज में बीसीए कैटेगरी सेल और सेक्शुअल हरासमेंट इंप्लॉय सेल मौजूद है, जो किसी भी भेदभाव की गहनता से जांच करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी आदेशों का पालन संस्थान पूरी तरह से करेगा।
यूजीसी ने 12 जनवरी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियम लागू न करने पर कॉलेज की मान्यता पर संकट आ सकता है। गाइडलाइन का अध्ययन करके ही आगे कार्रवाई की जाएगी। संस्थान में पहले से ही समानता प्रकोष्ठ सक्रिय है, जो यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी विद्यार्थी के साथ किसी तरह का भेदभाव न हो। -गगन मित्तल, प्राचार्य-आरकेएसडी कॉलेज