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अल्ट्रासाउंड केंद्रों और दवा विक्रेताओं की दुकानों का हर महीने होगा निरीक्षण : उपायुक्त

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 02:47 AM IST
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Ultrasound Centers and Pharmacies to Undergo Monthly Inspections: Deputy Commissioner
लघु सचिवालय आयोजित बैठक में लिंगानुपात सुधार को लेकर दिशा-निर्देश देतीं डीसी अपराजिता।
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कैथल। डीसी अपराजिता ने जिले में लिंगानुपात में सुधार लाने और भ्रूण हत्या जैसी गंभीर सामाजिक समस्या पर अंकुश लगाने के लिए केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सख्त कार्रवाई भी जरूरी है, इसलिए एक विशेष चार सदस्यीय कमेटी का गठित की जाए, जो अगले छह महीनों तक मासिक आधार पर विभिन्न अल्ट्रासाउंड केंद्रों एवं एमटीपी बिक्री केंद्रों, दवा विक्रेताओं की दुकानों का औचक निरीक्षण करेंगी।
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खामियां मिलने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस कमेटी में सिविल सर्जन, डीएसपी, महिला एवं बाल विकास से जिला कार्यक्रम अधिकारी तथा जिला ड्रग कंट्रोलर शामिल रहेंगे। डीसी अपराजिता मंगलवार को लघु सचिवालय में आयोजित डिस्ट्रिक्ट स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा निर्देश दे रही थीं। उन्होंने कहा कि लिंगानुपात के आंकड़ों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है, जिसको देखते हुए निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ाने की जरूरत है। जिले के लिंगानुपात को बढ़ाना है। अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए डिकॉय ऑपरेशन को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस अवसर पर डीएसपी सुशील प्रकाश, सिविल सर्जन डाॅ. रेणु चावला, डीडीपीओ रितु लाठर, सुभाष, गुरजीत कौर मौजूद रहे।
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डीसी अपराजिता ने कहा कि इस अभियान में आशा वर्कर और एएनएम की अहम भूमिका हो सकती है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि वे उन गर्भवती महिलाओं पर विशेष नजर रखें, जिनके पहले से बेटियां हैं और जो 12 सप्ताह के बाद गर्भपात करवाने की प्रक्रिया में हैं। सही सूचना देने वाले व्यक्ति को एक लाख तक का इनाम देने और उनकी पहचान गुप्त रखने का आश्वासन दिया गया है। जिला ड्रग कंट्रोलर ने बताया कि हरियाणा में एमटीपी किट की खुली बिक्री पूर्णत: प्रतिबंधित है और यह केवल अधिकृत केंद्रों पर विशेषज्ञों की देखरेख में ही उपलब्ध है। बैठक में यह भी सामने आया कि कुछ लोग पड़ोसी राज्यों में जाकर पोर्टेबल मशीनों के माध्यम से गुप्त रूप से लिंग जांच किए जाने की आशंका है और वहीं से अवैध रूप से किट लाते हैं। सिविल सर्जन डाॅ. रेणु चावला ने बताया कि अब अल्ट्रासाउंड जांच के लिए आभा आईडी अनिवार्य कर दी गई है, जिससे प्रत्येक केस की डिजिटल ट्रैकिंग सुनिश्चित होगी।
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