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कर्ण के आदर्शों को अपनाएं युवा : स्वामी वासुदेवानंद
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 09 Apr 2026 01:45 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने गढ़रथेश्वर तीर्थ कौल में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए महाभारत काल के महान दानवीर कर्ण के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कर्ण केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि त्याग, दान और आत्मसम्मान के प्रतीक थे।
उन्होंने महाभारत के तीन महान वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्ण और भीष्म पितामह जैसे वीरों ने अपने-अपने कर्तव्य और धर्म के लिए जीवन समर्पित किया। कर्ण हमें दान और वचन निभाने की प्रेरणा देते हैं, अर्जुन एकाग्रता और कर्तव्यनिष्ठा के प्रतीक हैं, जबकि भीष्म त्याग और अटूट प्रतिज्ञा के आदर्श हैं।
उन्होंने कहा कि यदि आज का युवा इन तीनों वीरों के गुणों को अपने जीवन में अपनाए, तो समाज में नैतिकता और संतुलन स्वतः स्थापित हो जाएगा। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति, धर्म और नैतिक मूल्यों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़कर समाज को सशक्त बनाना चाहिए। इस अवसर पर नरेश आढ़ती, देवीदयाल शर्मा घराडसी, राजेंद्र और बलवान आदि उपस्थित रहे।
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ढांड। शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने गढ़रथेश्वर तीर्थ कौल में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए महाभारत काल के महान दानवीर कर्ण के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कर्ण केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि त्याग, दान और आत्मसम्मान के प्रतीक थे।
उन्होंने महाभारत के तीन महान वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्ण और भीष्म पितामह जैसे वीरों ने अपने-अपने कर्तव्य और धर्म के लिए जीवन समर्पित किया। कर्ण हमें दान और वचन निभाने की प्रेरणा देते हैं, अर्जुन एकाग्रता और कर्तव्यनिष्ठा के प्रतीक हैं, जबकि भीष्म त्याग और अटूट प्रतिज्ञा के आदर्श हैं।
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उन्होंने कहा कि यदि आज का युवा इन तीनों वीरों के गुणों को अपने जीवन में अपनाए, तो समाज में नैतिकता और संतुलन स्वतः स्थापित हो जाएगा। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति, धर्म और नैतिक मूल्यों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़कर समाज को सशक्त बनाना चाहिए। इस अवसर पर नरेश आढ़ती, देवीदयाल शर्मा घराडसी, राजेंद्र और बलवान आदि उपस्थित रहे।