Haryana: करनाल में दो राइस मिलों में 10.19 करोड़ का धान घोटाला, DFSC की जांच में खुलासा, चार के खिलाफ मुकदमा
करनाल जिले में दो राइस मिलों में 10.19 करोड़ रुपये का धान घोटाला हो गया। यह घोटाला डीएफएससी मुकेश कुमार की ओर से किए गए भौतिक सत्यापन में सामने आया है। दोनों मिलों में 36 हजार क्विंटल धान कम पाया है।
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करनाल जिले में दो राइस मिलों में 10.19 करोड़ रुपये का धान घोटाला हो गया। यह घोटाला डीएफएससी मुकेश कुमार की ओर से किए गए भौतिक सत्यापन में सामने आया है। दोनों मिलों में 36 हजार क्विंटल धान कम पाया है। दोनों मिलों की मशीनें भी चालू हालात में नहीं थी। घोटाले में दो मिलों के चार संचालकों, दो डीएफएससी के निरीक्षकों और एक सहायक निरीक्षक के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं मे तरावड़ी थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। अब मामले में पुलिस जांच करेगी। 36 हजार क्विंटल धान गायब होने से सरकार को 10 करोड़ 19 लाख 52 हजार रुपये का नुकसान हुआ है।
जिला खाद्य एंव आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने तरावड़ी के बालाजी राइस मिल और विश्वकर्मा राइस मिल का भौतिक सत्यापन किया था। सत्यापन के दौरान बाला जी राइस मिल में 10 हजार क्विंटल धान कम पाया गया। मिल में धान की देखरेख की जिम्मेदारी डीएफएससी निरीक्षक देवेंद्र (निलंबित) और सहायक निरीक्षक रामफल (बर्खास्त) की थी। इसके अलावा सरकार को धान के बदले चावल उपलब्ध करवाने के लिए मिल के मालिक मोहित, सुरेंद्र और उनके पार्टनर अरूण की जिम्मेदारी थी। धान के बारे में पूछा गया तो कोई भी जानकारी नही दे पाए। इसके अलावा सत्यापन में मिल के अंदर स्क्रैप मशीनरी लगी मिली। आरोपी अब दूसरी मशीन लगा रहे थे। इसके बाद पांचों के खिलाफ तरावड़ी थाना में शिकायत दी गई। तरावड़ी थाना प्रभारी राजपाल ने बताया कि डीएफएससी मुकेश कुमार की शिकायत पर पांचों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
विश्वकर्मा राइस मिल में 26 हजार क्विंटल धान कम मिला
डीएफएससी के भौतिक सत्यापन में सामने आया है कि विश्वकर्मा राइस मिल में 26 हजार क्विंटल धान गायब था। मिल के अंदर धान से चावल बनाने के लिए मशीन भी नहीं लगी मिली। इससे साफ है कि मिल को गलत तरीके से धान अलॉट किया गया था। इसके अलॉटमेंट पर डीएफएससी विभाग के निरीक्षक हिमांशु और सहायक निरीक्षक रामफल (बर्खास्त) के हस्ताक्षर हैं। आरोपी मिल मालिक महेंद्र जांगड़ा अब मिल में मशीन लगा रहा था। इससे स्पष्ट है कि उसने विभाग के निरीक्षकों से मिलीभगत करके फर्जी तरीके से धान की अलॉटमेंट करवाई है। इस मामले में मिल संचालक डीएफएससी निरीक्षक हिमांशु और सहायक निरीक्षक रामफल के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की गई है।
मिल ने एक भी दाना चावल का नहीं लौटाया
विश्वकर्मा राइस मिल की ओर से सरकार को एक भी दाना चावल का नहीं लौटाया गया। इससे विभाग को शक हुआ। वहीं बालाजी राइस मिल ने भी बहुत कम चावल सरकार को दिया है। अब मामले में पुलिस जांच करेगी कि या तो यहां पर धान आया ही नहीं, या फिर मिल मालिक को निरीक्षकों ने मिलकर बेच दिया। दोनों मिलों में गबन हुए चावल से सरकार को 10.19 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा है।